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Toggleरीवा सुपर स्पेशलिटी में एक्सरे संकट, मोबाइल से चल रहा इलाज
रीवा : सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, जिसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रतीक माना जाता है, इन दिनों बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी से जूझ रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित इस अस्पताल में अब हालात ऐसे बन गए हैं कि एक्सरे विभाग में फिल्म खत्म होने के कारण मरीजों को रिपोर्ट मोबाइल फोन के कैमरे से फोटो खींचकर दी जा रही है. डॉक्टर भी उसी मोबाइल स्क्रीन पर रिपोर्ट देखकर मरीजों का इलाज करने को मजबूर हैं.
यह स्थिति न केवल अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि उन दावों की भी पोल खोल रही है जिनमें प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बताकर प्रचारित किया जाता है.
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मरीजों को नहीं मिल रही बुनियादी सुविधा
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल हर जांच और इलाज के लिए निर्धारित शुल्क वसूल रहा है. मरीजों से पर्ची कटवाई जा रही है, फीस ली जा रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें अधूरी व्यवस्था दी जा रही है.
एक्सरे कराने आने वाले मरीजों को अब फिल्म की जगह मोबाइल फोन पर खींची गई तस्वीरें थमा दी जा रही हैं. यही तस्वीरें डॉक्टरों को दिखाकर इलाज करवाना पड़ रहा है. कई मरीजों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन पैसे तो पूरा ले रहा है, लेकिन सुविधाएं आधी भी उपलब्ध नहीं हैं.
सप्लायर ने फिल्म देने से किया इनकार
जानकारी के अनुसार, अस्पताल के एक्सरे विभाग में कई दिनों से फिल्म का स्टॉक समाप्त है. सप्लायर ने फिल्म की बढ़ी कीमतों का हवाला देते हुए पुरानी दरों पर आपूर्ति से हाथ खड़े कर दिए हैं.
सबसे गंभीर बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन और डीन को इस संकट की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई. अब नए सिरे से कोटेशन मंगाने और ऑर्डर प्रक्रिया पूरी करने की बात कही जा रही है, जिसमें लंबा समय लग सकता है.
डीन और प्रबंधन की कार्यशैली पर उठे सवाल
अस्पताल की इस बदहाल स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं. बताया जा रहा है कि अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने में विफल साबित हो रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, कई बार व्यवस्थाओं को लेकर फटकार मिलने के बावजूद सुधार नहीं हुआ. परिणामस्वरूप अब मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है और अस्पताल की बदनामी बढ़ रही है.
बिना स्मार्टफोन वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान
मोबाइल फोटो के जरिए रिपोर्ट देने की यह व्यवस्था उन मरीजों के लिए और भी बड़ी समस्या बन गई है जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या जो तकनीक का उपयोग नहीं कर पाते.
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई बुजुर्ग और गरीब मरीजों को रिपोर्ट देखने और डॉक्टर को दिखाने में भारी दिक्कत हो रही है. कई मरीजों को दूसरों के फोन की मदद लेनी पड़ रही है, जिससे गोपनीयता और सुविधा दोनों प्रभावित हो रही हैं.
डॉक्टरों को भी इलाज में आ रही परेशानी
केवल मरीज ही नहीं, डॉक्टर भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं. मोबाइल स्क्रीन पर एक्सरे रिपोर्ट देखकर बीमारी का सटीक आकलन करना कठिन हो रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सरे जैसी जांचों की स्पष्ट फिल्म या डिजिटल स्क्रीन पर उच्च गुणवत्ता में उपलब्धता बेहद जरूरी होती है. मोबाइल फोटो के जरिए रिपोर्ट देखना मेडिकल प्रैक्टिस की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है.
करोड़ों की सुविधा, लेकिन व्यवस्था कंगाल
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को विंध्य क्षेत्र के मरीजों के लिए बड़ी स्वास्थ्य सुविधा के रूप में विकसित किया गया था. उम्मीद थी कि यहां लोगों को बड़े शहरों जैसी चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी.
लेकिन आज हालात यह हैं कि अस्पताल अपनी बुनियादी जरूरतें तक पूरी नहीं कर पा रहा. करोड़ों की मशीनें और भवन होने के बावजूद यदि एक्सरे फिल्म जैसी सामान्य सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो यह पूरे स्वास्थ्य प्रबंधन तंत्र की विफलता को दर्शाता है.
डिप्टी सीएम की साख पर असर
यह अस्पताल प्रदेश के डिप्टी सीएम की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल रहा है. ऐसे में यहां की बदहाल व्यवस्थाएं सीधे तौर पर उनकी छवि और विश्वसनीयता पर भी असर डाल रही हैं.
जनता का मानना है कि यदि वीआईपी प्रोजेक्ट माने जाने वाले अस्पताल की यह स्थिति है, तो सामान्य अस्पतालों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है.
जल्द समाधान नहीं तो बढ़ेगा संकट
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नई खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, लेकिन सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय देखते हुए मरीजों को निकट भविष्य में राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है.
यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है.
निष्कर्ष
रीवा का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आज स्वास्थ्य व्यवस्था की उस सच्चाई को उजागर कर रहा है जहां बड़े-बड़े दावों के पीछे जमीनी हकीकत बेहद कमजोर है. एक्सरे फिल्म जैसी बुनियादी जरूरत की कमी ने यह साबित कर दिया है कि केवल इमारतें और मशीनें स्वास्थ्य सेवा की गारंटी नहीं होतीं, बल्कि कुशल प्रबंधन और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है.
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है और मरीजों को कब तक बेहतर सुविधाएं मिल पाती हैं.
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