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Toggleसरसों भावांतर मंजूर, तुअर की 100% सरकारी खरीद से किसानों को बड़ी राहत
दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण मुलाकात ने बघेलखंड क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर नई उम्मीद और मुस्कान ला दी है. सरसों और तुअर की खेती करने वाले हजारों किसानों के लिए यह फैसला किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहानसे मुलाकात की. इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे.
बैठक के दौरान किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और कुछ बड़े फैसले लिए गए, जिनका सीधा फायदा मध्यप्रदेश के किसानों को मिलने वाला है.
इस बैठक का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि सरसों पर भावांतर भुगतान को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है, जबकि तुअर (अरहर) की 100% सरकारी खरीद का रास्ता भी साफ हो गया है.
सरसों पर भावांतर भुगतान को मिली मंजूरी
पिछले कुछ महीनों से सरसों का बाजार भाव गिरने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा था. किसानों की मांग थी कि सरकार भावांतर योजना के तहत उन्हें समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के बीच का अंतर दे.
अब केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
सरकार की इस मंजूरी के बाद संबंधित विभागों को भावांतर भुगतान तुरंत शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं.
इस फैसले के बाद सरसों उगाने वाले किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अब बाजार के कम दाम का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.
किसानों के लिए बड़ी राहत: तुअर की 100% सरकारी खरीद
बैठक में किसानों के लिए दूसरी बड़ी घोषणा तुअर (अरहर) की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद को लेकर हुई.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस संबंध में स्वीकृति पत्र भी सौंप दिया
इस फैसले का मतलब है कि अब तुअर उगाने वाले किसानों को बाजार में कीमत गिरने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी.
सरकार उनकी पूरी उपज को सरकारी उपार्जन केंद्रों पर खरीदेगी, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिलेगा.
बघेलखंड के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा
सरसों और तुअर की खेती बघेलखंड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की जाती है.
इस क्षेत्र के प्रमुख जिले हैं:
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रीवा
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सतना
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शहडोल
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सिंगरौली
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सीधी
इन जिलों में हजारों किसान सरसों और तुअर की खेती पर निर्भर हैं.
सरकार के इस फैसले से इन किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें अपनी फसल कम दाम पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी.
दलहन-तिलहन मिशन के तहत बढ़े लक्ष्य
बैठक में केवल सरसों और तुअर ही नहीं, बल्कि दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई.
सरकार ने दलहन-तिलहन मिशन के तहत कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं:
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मूंग और उड़द की खेती के लिए अतिरिक्त लक्ष्य तय किए जाएंगे
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किसानों को बेहतर बीज और तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी
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उत्पादन बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लागू की जाएंगी
इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ने की संभावना है.
फसल बीमा में आएगा बड़ा बदलाव
बैठक में फसल बीमा को लेकर भी एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया.
अब फसल नुकसान का आकलन केवल क्रॉप कटिंग प्रयोग से ही नहीं बल्कि सैटेलाइट तकनीक की मदद से भी किया जाएगा.
इस नई व्यवस्था के फायदे:
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नुकसान का सटीक आकलन
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बीमा भुगतान में पारदर्शिता
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किसानों को जल्दी मुआवजा
इस तकनीकी बदलाव से किसानों को बीमा राशि मिलने में होने वाली देरी भी कम होगी.
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2026 को घोषित किया गया “किसान कल्याण वर्ष”
बैठक के दौरान एक और बड़ी घोषणा की गई कि 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जाएगा.
इस दौरान किसानों के हित में कई नई योजनाएं शुरू की जाएंगी और मौजूदा योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा.
केंद्र सरकार ने इस अभियान में मध्यप्रदेश को विशेष प्राथमिकता देने का भी आश्वासन दिया है. शिवराज सिंह चौहान का किसानों के लिए संदेश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक के बाद कहा:
“मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है और यहां के किसान मेरे परिवार का हिस्सा हैं। किसानों को हरसंभव मदद देने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है.”
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सरकार लगातार नई नीतियां लागू कर रही है.
किसानों को क्या करना चाहिए?
सरकार के इन फैसलों के बाद किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:
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अपनी सरसों और तुअर की फसल को जल्दबाजी में कम दाम पर न बेचें
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सरकारी उपार्जन केंद्रों की जानकारी लेते रहें
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भावांतर भुगतान और खरीद प्रक्रिया से जुड़े निर्देशों पर नजर रखें
इन योजनाओं का सही लाभ उठाने से किसानों की आय में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है.
सरसों और तुअर की खरीद से केवल किसानों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसी तरह किसानों को समर्थन देती रही तो आने वाले समय में:
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किसानों की आय बढ़ेगी
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कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
निष्कर्ष
दिल्ली में हुई इस बैठक ने मध्यप्रदेश के किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है.
सरसों पर भावांतर भुगतान की मंजूरी और तुअर की 100% सरकारी खरीद जैसे फैसले किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने वाले साबित हो सकते हैं.
विशेष रूप से बघेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में किसान सरसों और तुअर की खेती करते हैं.
अगर सरकार इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करती है, तो यह फैसला प्रदेश की कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.
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