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जल जीवन मिशन की हकीकत: अनूपपुर के बरबसपुर में सूखी टंकियां और प्यासे लोग!

हर घर नल, हर घर जल—यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ तहसील के बरबसपुर गांव में यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है. लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई जल टंकी शोपीस बन चुकी है, हैंडपंप सूख चुके हैं, और ग्रामीण गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.

सरकारी आंकड़े और जमीनी हकीकत
सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को नल जल से जोड़ने का लक्ष्य था. 29 नवंबर 2023 को PIB की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 71% (13.69 करोड़) परिवारों तक जल आपूर्ति पहुंच चुकी है. लेकिन बरबसपुर गांव की हालत कुछ और ही बयां कर रही है. यहां के लोग आज भी तालाबों का गंदा पानी भरने को मजबूर हैं.

सूख चुके बोरवेल और ठप पड़ी जल आपूर्ति
गांव के बोरवेल सूख चुके हैं और समय पर मरम्मत न होने के कारण जल स्रोत मिट्टी से पट गए हैं. इसके चलते ग्रामीणों को ट्रैक्टरों से महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है. सरकारी स्तर पर जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई जल टंकी काम नहीं कर रही, जिससे साफ पानी का सपना अधूरा रह गया है.

सरकारी लापरवाही और अधूरी योजनाएं
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की अनदेखी के चलते लाखों की लागत से बनी जल टंकी ठप पड़ी है. पाइपलाइन जंग खा रही है, और गांववाले हर दिन साफ पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं. सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए 3.60 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है.

महिलाओं की बढ़ती मुश्किलें
गांव की महिलाओं को रोज़ाना घंटों कतार में खड़े होकर मुश्किल से पीने लायक पानी जुटाना पड़ता है. यह समस्या न सिर्फ उनकी दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रही है, बल्कि इससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे भी बढ़ गए हैं।

क्या मिलेगा ग्रामीणों को उनका हक?
जीवन का आधार पानी अब बरबसपुर के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. सवाल यह है कि क्या यह योजना भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगी या विंध्य के लोगों को उनका जल जीवन मिशन के तहत हक मिलेगा? सरकार और प्रशासन को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि हर गांव तक साफ पानी पहुंच सके.