Vindhya First

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी का झांसा, 8.5 लाख की ठगी का खुलासा

बांधवगढ़ में नौकरी का सपना बना जाल! फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर 8.5 लाख की ठगी, यूपी के दो युवक बने शिकार

Table of Contents

बांधवगढ़ में नौकरी का झांसा, लाखों की ठगी – युवाओं के सपनों पर पड़ा पानी

मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी दिलाने के नाम पर 8.5 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश के दो युवक फर्जी जॉइनिंग लेटर के जरिए ठगी का शिकार हुए.

मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की गई. यह घटना न सिर्फ प्रशासन के लिए चिंता का विषय है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए भी एक चेतावनी है जो सरकारी या प्रतिष्ठित संस्थानों में नौकरी पाने के सपने देखते हैं.

इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश के दो युवक ठगी का शिकार बने, जिन्हें एक शातिर आरोपी ने फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर करीब 8 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली.

कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ितों में से एक युवक दीपू शर्मा, जो एक फार्मा कंपनी में कार्यरत था, उसकी मुलाकात उत्तर प्रदेश निवासी अविराज नामक व्यक्ति से हुई. अविराज ने खुद को प्रभावशाली और उच्च संपर्कों वाला बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी दिला सकता है.

युवक पहले से ही बेहतर करियर की तलाश में था, ऐसे में उसने आरोपी की बातों पर विश्वास कर लिया.

 किस तरह ऐंठे गए लाखों रुपये?

आरोपी ने बेहद सुनियोजित तरीके से युवकों को अपने जाल में फंसाया. उसने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि नौकरी पक्की है, लेकिन कुछ “प्रोसेसिंग फीस” और “सेटिंग” के लिए पैसे देने होंगे.

  • अलग-अलग किस्तों में पैसे लिए गए

  • कुल रकम: ₹8,50,000

  • विश्वास बढ़ाने के लिए फर्जी दस्तावेज दिए गए

  • अंत में एक फर्जी जॉइनिंग लेटर भी थमा दिया गया

यही वह मोड़ था, जहां युवकों को लगा कि अब उनकी नौकरी पक्की हो चुकी है.

 फर्जी जॉइनिंग लेटर का खेल

आरोपी ने जो जॉइनिंग लेटर दिया, वह देखने में पूरी तरह असली लग रहा था. उसमें:

  • सरकारी लेटरहेड का इस्तेमाल

  • हस्ताक्षर और मुहर की नकली नकल

  • पद, वेतन और जॉइनिंग डेट की पूरी जानकारी

इन सब चीजों ने युवकों का विश्वास और मजबूत कर दिया.

यह भी पढ़ें –अमेरिकी कृषि आयात पर 50% शुल्क की मांग, किसान महापंचायत ने सरकार को सौंपा ज्ञापन

 उमरिया पहुंचकर खुला राज

नौकरी जॉइन करने की उम्मीद में दोनों युवक उमरिया पहुंच गए. यहां उन्होंने कोतवाली थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 4 में रहने वाले डॉ. शैलेन्द्र पाण्डेय के यहां किराए पर कमरा लिया.

करीब एक महीने तक दोनों युवक वहां रहे, लेकिन:

  • उनकी गतिविधियां सामान्य नहीं थीं

  • वे किसी काम पर नहीं जा रहे थे

  • हमेशा असमंजस में दिखाई देते थे

इन सब बातों ने मकान मालिक को संदेह में डाल दिया.

 मकान मालिक की सतर्कता से खुला मामला

डॉ. शैलेन्द्र पाण्डेय ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों से पूछताछ शुरू की.

पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को चौंका दिया.

 जांच में सामने आया सच

जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि:

  • दोनों युवक उत्तर प्रदेश के देवरिया और गोरखपुर के निवासी हैं

  • उन्हें नौकरी का झांसा देकर ठगा गया है

  • उनके पास मौजूद जॉइनिंग लेटर पूरी तरह फर्जी है

पुलिस ने दस्तावेजों की जांच की, जिसमें फर्जीवाड़ा साफ तौर पर सामने आ गया.

 पुलिस की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने:

  • दस्तावेजों की जांच पूरी की

  • आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया

  • आरोपी की तलाश शुरू कर दी

साथ ही, पीड़ितों को उनके गृह जिले में भी मामला दर्ज कराने की सलाह दी गई है.

 बढ़ते जॉब फ्रॉड: युवाओं के लिए चेतावनी

यह मामला कोई पहला नहीं है. देशभर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

खासकर:

  • सरकारी नौकरी

  • रेलवे

  • फॉरेस्ट डिपार्टमेंट

  • सेना और पुलिस भर्ती

इन सभी क्षेत्रों में फर्जी एजेंट सक्रिय हैं.

 कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?

अगर आप नौकरी की तलाश में हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें:

 1. कभी भी पैसे न दें

कोई भी सरकारी नौकरी पैसे लेकर नहीं दिलाई जाती.

 2. आधिकारिक वेबसाइट से ही आवेदन करें

हमेशा सरकारी वेबसाइट या आधिकारिक नोटिफिकेशन पर भरोसा करें.

3. दस्तावेजों की जांच करें

अगर कोई जॉइनिंग लेटर देता है, तो उसकी सत्यता जांचें.

 4. संदिग्ध लोगों से दूर रहें

अगर कोई “जुगाड़” या “सेटिंग” की बात करता है, तो सतर्क हो जाएं.

 प्रशासन के लिए चुनौती

इस तरह के मामलों से प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. जरूरत है:

  • जागरूकता अभियान चलाने की

  • फर्जी एजेंटों पर सख्त कार्रवाई करने की

  • भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की

 समाज के लिए संदेश

यह घटना एक सीख है कि:

 लालच और जल्दबाजी में लिया गया फैसला भारी पड़ सकता है
 हर चमकती चीज सोना नहीं होती
 जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है

 निष्कर्ष

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व जैसे प्रतिष्ठित स्थान के नाम पर ठगी होना बेहद चिंताजनक है. यह घटना न केवल पीड़ित युवकों के लिए आर्थिक और मानसिक नुकसान है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है.

जरूरत है सतर्क रहने की, जागरूक बनने की और दूसरों को भी जागरूक करने की.

यह भी पढ़ें –रीवा: बिना लाइसेंस मांस और मछली बिक्री पर प्रतिबंध,प्रशासन का सख्त आदेश