भारत में एनीमिया एक बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या है, जो महिलाओं और बच्चों को अधिक प्रभावित कर रही है. National Family Health Survey (NFHS-5) 2019-21 के अनुसार, 57% महिलाएं और 67% बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं. कई लोग मानते हैं कि एनीमिया केवल आयरन की कमी के कारण होता है, लेकिन हालिया शोध बताते हैं कि इसके पीछे विटामिन बी12 और फोलेट की कमी, वायु प्रदूषण, क्रॉनिक बीमारियां और असंतुलित आहार जैसे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं.
एनीमिया के प्रमुख कारण:
1. आयरन और विटामिन बी12 की कमी
एनीमिया को पहले केवल आयरन की कमी से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन European Journal of Clinical Nutrition (January 2025) में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, सिर्फ 30% मामले आयरन की कमी से होते हैं, जबकि 70% मामलों के पीछे अन्य पोषक तत्वों की कमी होती है. विटामिन बी12 और फोलेट की कमी शरीर में रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बाधित कर सकती है, जिससे हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है.
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2. वायु प्रदूषण का प्रभाव
Nature Journal में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, वायु प्रदूषण, विशेष रूप से PM 2.5, शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाता है और आयरन के अवशोषण को प्रभावित करता है. अध्ययन में पाया गया कि हर 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (µg/m³) PM 2.5 की वृद्धि से बच्चों में एनीमिया की दर 10% और महिलाओं में 7.23% तक बढ़ जाती है.
3. क्रॉनिक बीमारियां और दवाइयों का प्रभाव
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD), कैंसर, और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियां शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं. इसके अलावा, कुछ दवाइयां, जैसे कि कीमोथेरेपी और कुछ एंटीबायोटिक्स, भी रेड ब्लड सेल्स की संख्या को कम कर सकती हैं, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है.
4. असंतुलित आहार और पोषण की कमी
भारत में भोजन का एक बड़ा हिस्सा कार्बोहाइड्रेट-प्रधान होता है, जिसमें प्रोटीन, आयरन, और विटामिन बी12 की मात्रा कम होती है. इसके अलावा, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन पोषण की कमी को बढ़ा सकता है. हरी पत्तेदार सब्जियों, अंकुरित अनाज, और प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन एनीमिया की रोकथाम में सहायक हो सकता है.
सरकार द्वारा उठाए गए कदम और उनकी प्रभावशीलता:
1. एनीमिया मुक्त भारत अभियान
सरकार ने 2018 में “एनीमिया मुक्त भारत” अभियान शुरू किया, जिसके तहत आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट दिए जाते हैं और फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराया जाता है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ आयरन सप्लीमेंट देना समाधान नहीं है, क्योंकि अगर शरीर उसे अवशोषित नहीं कर पा रहा है, तो यह प्रभावी नहीं होगा.
2. वायु प्रदूषण पर नियंत्रण
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए स्वच्छ ईंधन, हरित क्षेत्र बढ़ाना, और इंडस्ट्री से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण जरूरी है. यदि हवा की गुणवत्ता में सुधार किया जाए, तो आयरन अवशोषण बेहतर हो सकता है और एनीमिया के मामलों में कमी आ सकती है.
3. संतुलित आहार और पोषण शिक्षा
लोगों को संतुलित आहार के महत्व के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है. विटामिन सी युक्त फल (जैसे अमरूद, संतरा, पपीता) आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं, जबकि हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, और नट्स शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करते हैं.
4. फूड फोर्टिफिकेशन की समीक्षा
हालांकि सरकार आयरन-फोर्टिफाइड फूड को बढ़ावा दे रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिवर्सल फोर्टिफिकेशन से आयरन की अधिकता हो सकती है, जिससे डायबिटीज और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए, सरकार को इस नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए.
5. जागरूकता अभियान
विशेषज्ञों का कहना है कि एनीमिया के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए वैसा ही अभियान चलाना होगा जैसा कोविड-19 के दौरान किया गया था. स्कूलों, आंगनवाड़ियों, और स्वास्थ्य केंद्रों में एनीमिया की जांच और पोषण शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए.