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क्या Microplastics हमारे शरीर पर घातक असर डाल रहे हैं?

आजकल के आधुनिक जीवन में हम प्लास्टिक का इस्तेमाल दिन-प्रतिदिन बढ़ाते जा रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्लास्टिक हमारे शरीर में भी घुल रहा है? वैज्ञानिकों के मुताबिक, हम रोज़ाना औसतन 2,40,000 माइक्रोप्लास्टिक कण अपने शरीर में प्रवेश कर रहे हैं. ये माइक्रोप्लास्टिक छोटे कण होते हैं जो 5 मिलीमीटर से भी छोटे होते हैं. ये कण हमारे खाने-पीने की चीजों, पानी और यहां तक कि हवा में भी पाए जाते हैं. अब यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इनसे पूरी तरह बचना लगभग नामुमकिन हो गया है. 2024 के अध्ययन के अनुसार हर साल 10 से 40 मिलियन टन माइक्रोप्लास्टिक्स पर्यावरण में प्रवेश कर रहे हैं, और यह संख्या 2040 तक दोगुनी हो सकती है.

माइक्रोप्लास्टिक्स का स्वास्थ्य पर प्रभाव
माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे शरीर में विभिन्न तरीकों से प्रवेश कर सकते हैं – जैसे कि हम जो पानी पीते हैं, वह माइक्रोप्लास्टिक्स से प्रदूषित हो सकता है, या फिर हम जो भोजन करते हैं, वह प्लास्टिक पैकेजिंग में रखा हो सकता है. इसके अलावा, हवा से भी ये कण हमारे शरीर में घुस सकते हैं. माइक्रोप्लास्टिक्स का स्वास्थ्य पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है. यह कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अंगों को प्रभावित कर सकते हैं. आईआईएससी (2024) के अध्ययन में पाया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक्स से कोशिकाओं की मौत हो सकती है और यह अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. इसके अतिरिक्त, यह कण हमारे रक्तप्रवाह में शामिल होकर हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन क्षमता पर भी असर डाल सकते हैं. कुछ अध्ययन बताते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक्स डीएनए को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर का कारण बन सकते हैं.

माइक्रोप्लास्टिक्स के समाधान और बचाव
इस समस्या का समाधान पूरी तरह से निकालना कठिन है, लेकिन हम कुछ उपायों से इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं. प्लास्टिक की बोतलों और पैकेजिंग से बचना, सिंथेटिक कपड़ों की बजाय प्राकृतिक कपड़े पहनना और पानी और भोजन को प्लास्टिक से मुक्त रखना कुछ महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं. इसके अलावा, सरकारों और उद्योगों को प्लास्टिक के उत्पादन और उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम बनाने होंगे. माइक्रोप्लास्टिक्स के खतरों से बचने के लिए हमें व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जागरूकता फैलानी होगी.