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भोपाल: भोपाल में पानी के सैंपल फेल, ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला

भोपाल: भोपाल में पानी के सैंपल फेल, ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला

भोपाल: भोपाल में पानी के सैंपल फेल, ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला

भोपाल:  इंदौर में 20 मौतों के बाद भोपाल में पानी के सैंपल फेल हुए हैं. जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला. जानिए प्रभावित इलाके, प्रशासन की कार्रवाई और स्वास्थ्य सलाह.

इंदौर के बाद भोपाल में पानी की गुणवत्ता पर संकट, सैंपल फेल होने से बढ़ी चिंता

मध्यप्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. इंदौर में दूषित पानी से कथित तौर पर 20 लोगों की मौत के बाद अब राजधानी भोपाल से भी चिंताजनक खबर सामने आई है. भोपाल में जांच के दौरान कई इलाकों से लिए गए पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं, जिनमें ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है. इस खुलासे के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और आम लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

किन इलाकों के पानी के सैंपल फेल हुए

भोपाल नगर निगम द्वारा हाल ही में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पानी के सैंपल लिए गए थे. जांच रिपोर्ट में चार सैंपल असुरक्षित पाए गए हैं. ये सैंपल मुख्य रूप से ग्राउंड वाटर स्रोतों यानी हैंडपंप और ट्यूबवेल से लिए गए थे.

प्रभावित इलाकों में शामिल हैं:

  • आदमपुर छावनी क्षेत्र

  • बजपई नगर

  • खानूगांव क्षेत्र

इन इलाकों में पानी पीने योग्य मानकों पर खरा नहीं उतरा, जिसके बाद इन स्रोतों से पानी के उपयोग पर रोक लगा दी गई है.

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क्या है ई-कोलाई बैक्टीरिया और क्यों है खतरनाक

ई-कोलाई बैक्टीरिया आमतौर पर मानव और पशुओं की आंतों में पाया जाता है, लेकिन जब यह पीने के पानी में पहुंच जाता है तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. यह बैक्टीरिया पानी में सीवेज या गंदगी के रिसाव का संकेत माना जाता है.

ई-कोलाई संक्रमण से हो सकती हैं ये समस्याएं:

  • दस्त और उल्टी

  • पेट में तेज दर्द

  • डिहाइड्रेशन

  • बच्चों और बुजुर्गों में जानलेवा स्थिति

विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां तेजी से गंभीर रूप ले सकती हैं, अगर समय रहते रोकथाम न की जाए.

इंदौर की घटना से क्यों बढ़ा डर

भोपाल में पानी के सैंपल फेल होने की खबर ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले ही इंदौर के एक इलाके में दूषित पानी से करीब 20 मौतों की रिपोर्ट सामने आई थी. इंदौर मामले में भी पानी में बैक्टीरिया मिलने की बात कही गई थी और सीवेज लाइन से पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका जताई गई थी.

इसी वजह से भोपाल में सामने आई यह रिपोर्ट और ज्यादा गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि दोनों मामलों में बैक्टीरियल कंटैमिनेशन एक जैसी समस्या के रूप में उभरकर सामने आया है.

नगर निगम और प्रशासन की कार्रवाई

भोपाल नगर निगम ने रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल कदम उठाए हैं:

  • प्रभावित इलाकों में ग्राउंड वाटर के उपयोग पर रोक

  • लोगों को हैंडपंप और ट्यूबवेल का पानी न पीने की सलाह

  • अन्य क्षेत्रों से भी अतिरिक्त सैंपल लेकर जांच

  • स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि नर्मदा से आने वाला ट्रीटेड पाइपलाइन पानी फिलहाल सुरक्षित है, क्योंकि उसका नियमित शुद्धिकरण किया जाता है.

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स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं

  • खुले जलस्रोतों से पानी का उपयोग न करें

  • दस्त, उल्टी या बुखार जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें

संक्रमण फैलने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है.

ग्राउंड वाटर क्यों बन रहा है बड़ा खतरा

विशेषज्ञ मानते हैं कि शहरी इलाकों में ग्राउंड वाटर के दूषित होने के पीछे कई कारण हैं:

  • पुरानी और लीकेज वाली सीवेज लाइनें

  • अवैध कनेक्शन

  • बिना ट्रीटमेंट के पानी का उपयोग

  • बढ़ता शहरीकरण

जब सीवेज का गंदा पानी जमीन में रिसता है, तो वह सीधे हैंडपंप और ट्यूबवेल के पानी को दूषित कर देता है.

आगे क्या होगी रणनीति

प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में:

  • पूरे शहर में विशेष जल परीक्षण अभियान

  • संवेदनशील इलाकों की पहचान

  • जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक जल आपूर्ति

  • दोषियों पर कार्रवाई

सरकार और नगर निगम का लक्ष्य है कि किसी भी कीमत पर इंदौर जैसी स्थिति भोपाल में न बनने दी जाए.

निष्कर्ष

इंदौर के बाद भोपाल में पानी के सैंपल फेल होना एक गंभीर चेतावनी है. यह मामला सिर्फ एक शहर का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की जल सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा है. समय रहते सख्त कदम और जन-जागरूकता ही ऐसे हादसों को रोक सकती है. आम लोगों को भी चाहिए कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित पानी का ही उपयोग करें.

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