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रीवा में फर्जी सिम नेटवर्क का भंडाफोड़, ऑपरेशन F.A.C.E. के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रीवा पुलिस ने ऑपरेशन F.A.C.E. के तहत फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया है

रीवा में फर्जी सिम नेटवर्क का भंडाफोड़, ऑपरेशन F.A.C.E. के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रीवा: मध्यप्रदेश के रीवा जिले में पुलिस ने साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले का खुलासा करते हुए फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है. ऑपरेशन F.A.C.E. (Facial Authentication Compliance Enforcement) के तहत चलाए गए विशेष अभियान में पुलिस ने ऐसे पीओएस (Point of Sale) एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों और तकनीकी हेरफेर के जरिए सिम कार्ड सक्रिय कर रहे थे.

इस कार्रवाई को रीवा पुलिस की हालिया सबसे महत्वपूर्ण साइबर अपराध विरोधी कार्रवाई माना जा रहा है, क्योंकि फर्जी सिम कार्ड अक्सर ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर ठगी और आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाते हैं.

केंद्र और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चला अभियान

यह अभियान दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर शुरू किया गया था. देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों और फर्जी मोबाइल कनेक्शन के मामलों को देखते हुए Operation F.A.C.E. लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य सिम जारी करने की प्रक्रिया में फेस ऑथेंटिकेशन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है.

रीवा जिले में इस अभियान का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान ने किया, जबकि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के मार्गदर्शन में विभिन्न थाना क्षेत्रों में व्यापक जांच अभियान चलाया गया.

तीन थाना क्षेत्रों में हुई व्यापक जांच

पुलिस टीमों ने सिविल लाइन, सिटी कोतवाली और समान थाना क्षेत्रों में पीओएस एजेंटों की गतिविधियों की गहन जांच की. इस दौरान कुल 72 CAF (Customer Application Form) की जांच की गई.

जांच का विवरण इस प्रकार रहा:

  • सिविल लाइन थाना क्षेत्र: 41 CAF जांच
  • सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र: 19 CAF जांच
  • समान थाना क्षेत्र: 12 CAF जांच

जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसने पूरे नेटवर्क की सच्चाई उजागर कर दी.

एक ही चेहरे पर जारी किए गए कई सिम कार्ड

पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कई सिम कार्ड एक ही व्यक्ति के चेहरे के आधार पर जारी किए गए थे. यानी फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा था.

CAF फॉर्म में दर्ज लाइव फोटो और दस्तावेजों की तुलना करने पर पाया गया कि:

  • ग्राहक के नाम अलग थे, लेकिन चेहरा एक ही व्यक्ति का था
  • कई मामलों में पीओएस एजेंटों ने अपनी ही फोटो अपलोड की
  • लाइव फोटो और दस्तावेजों में भारी विसंगतियां थीं

यह साफ संकेत था कि सिम जारी करने की प्रक्रिया में जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया गया.

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ऐसे चल रहा था फर्जी सिम का पूरा खेल

पुलिस की जांच में आरोपियों द्वारा अपनाया गया तरीका बेहद संगठित और तकनीकी रूप से योजनाबद्ध पाया गया.

आरोपियों की कार्यप्रणाली:

  1. फर्जी पहचान पत्र तैयार करना
    बिना दस्तावेज वाले ग्राहकों के लिए नकली आईडी बनाई जाती थी.
  2. फोटो एडिटिंग का इस्तेमाल
    आरोपी अपनी फोटो को फर्जी आईडी में एडिट कर देते थे.
  3. फेस ऑथेंटिकेशन में हेरफेर
    ग्राहक की जगह एजेंट खुद लाइव फोटो अपलोड कर देते थे.
  4. OTP सिस्टम का दुरुपयोग
    सत्यापन के लिए अपने या फर्जी मोबाइल नंबरों का उपयोग किया जाता था.
  5. ज्यादा कमीशन कमाने की लालच
    अधिक सिम एक्टिवेशन पर मिलने वाले कमीशन के कारण नियमों की अनदेखी की गई.

इस तरह आरोपी कम समय में बड़ी संख्या में सिम कार्ड सक्रिय कर रहे थे.

तीन आरोपी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

  • आशीष कुमार विश्वकर्मा उर्फ अनिकेत
  • कमल कुशवाहा उर्फ राजा
  • लवकुश गुप्ता

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है.

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

रीवा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:

भारतीय दंड संहिता (IPC)

  • धारा 419 — प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी
  • धारा 420 — धोखाधड़ी और ठगी
  • धारा 468 — जालसाजी
  • धारा 471 — फर्जी दस्तावेज का उपयोग

आईटी एक्ट

  • धारा 66C — पहचान की चोरी
  • धारा 66D — ऑनलाइन धोखाधड़ी

दूरसंचार अधिनियम

  • धारा 42(3)(ई)

इन धाराओं के तहत आरोपियों को कड़ी सजा का प्रावधान है.

क्यों खतरनाक होते हैं फर्जी सिम कार्ड?

फर्जी सिम कार्ड सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा होते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे सिम का इस्तेमाल अक्सर निम्न अपराधों में होता है:

  • साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी
  • बैंकिंग OTP धोखाधड़ी
  • सोशल मीडिया फर्जी अकाउंट
  • धमकी और ब्लैकमेल
  • संगठित अपराध नेटवर्क

इसलिए सरकार और पुलिस एजेंसियां अब सिम सत्यापन प्रक्रिया को अत्यधिक सख्त बना रही हैं.

ऑपरेशन F.A.C.E. का उद्देश्य

Operation F.A.C.E. का मुख्य लक्ष्य है:

  • फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य बनाना
  • फर्जी सिम एक्टिवेशन रोकना
  • पीओएस एजेंटों की जवाबदेही तय करना
  • डिजिटल सुरक्षा मजबूत करना

यह अभियान देशभर में चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है.

रीवा पुलिस का सख्त संदेश

रीवा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि:

  • फर्जी सिम जारी करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलेगा
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले एजेंटों पर कड़ी कार्रवाई होगी
  • साइबर अपराध रोकने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ाई जाएगी

पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने नाम पर जारी सिम की जानकारी समय-समय पर जांचते रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें.

डिजिटल युग में बढ़ती जिम्मेदारी

आज मोबाइल नंबर केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, सोशल मीडिया, सरकारी सेवाओं और डिजिटल पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण साधन बन चुका है. ऐसे में सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में लापरवाही बड़े अपराधों को जन्म दे सकती है.

रीवा पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ एक स्थानीय सफलता है, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ चल रही राष्ट्रीय मुहिम का अहम हिस्सा भी मानी जा रही है.

निष्कर्ष

रीवा में फर्जी सिम कार्ड रैकेट का खुलासा यह दिखाता है कि तकनीक का दुरुपयोग किस तरह अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन सकता है. हालांकि, पुलिस और दूरसंचार विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ अब सख्ती बढ़ चुकी है.

ऑपरेशन F.A.C.E. के तहत हुई यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे नेटवर्क पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. जांच जारी है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं.

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