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Toggleमैहर: अंधविश्वास के नाम पर महिला की बेरहमी से पिटाई, शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज की एनसीआर
मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है. भूत-प्रेत की भ्रांति में फंसे लोगों ने एक बीमार महिला को इलाज के बजाय हिंसा का शिकार बना दिया. घटना अमरपाटन थाना क्षेत्र के ग्राम मझगवां की है, जहां ‘प्रेत बाधा दूर करने’ के नाम पर महिला की बेरहमी से पिटाई कर दी गई.
घटना के बाद जब महिला की हालत बिगड़ने लगी, तब परिजनों की आंखों से अंधविश्वास का पर्दा हट पाया और आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस ने मामले में एनसीआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
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बीमारी को समझा भूत-प्रेत का साया
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार फरियादी रामफल लोनी ने अमरपाटन थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी पत्नी राजकुमारी लंबे समय से बीमार चल रही थीं. लगातार बीमारी के कारण परिवार मानसिक तनाव में था और धीरे-धीरे बीमारी को चिकित्सा समस्या के बजाय ‘भूतबाधा’ मान लिया गया.
ग्रामीण परिवेश में आज भी कई जगह बीमारियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने के बजाय अलौकिक शक्तियों से जोड़ दिया जाता है. इसी सोच ने इस घटना को जन्म दिया.
परिवार के एक रिश्तेदार गया लोनी ने दावा किया कि वह झाड़फूंक के जरिए महिला को ठीक कर सकता है. इसी भरोसे में पति-पत्नी 29 मार्च की सुबह करीब 11 बजे उसके घर पहुंचे.
इलाज के नाम पर शुरू हुई हिंसा
शिकायत के अनुसार, महिला के पहुंचते ही झाड़फूंक की प्रक्रिया शुरू करने के बहाने आरोपी गया लोनी ने अचानक महिला को लात-घूंसों से मारना शुरू कर दिया. शुरुआत में परिजन इसे कथित ‘उपचार प्रक्रिया’ समझते रहे, लेकिन धीरे-धीरे मारपीट क्रूरता में बदल गई.
आरोप है कि घटना के दौरान विवाद बढ़ने पर सत्यम लोनी और बिटिला लोनी भी मौके पर पहुंच गए। बिटिला ने महिला को पकड़ लिया, जबकि गया और सत्यम ने मिलकर महिला की जमकर पिटाई की.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला दर्द से चीखती रही, लेकिन अंधविश्वास के प्रभाव में मौजूद लोग इसे ‘भूत निकालने की प्रक्रिया’ मानते रहे.
बीच-बचाव से बची महिला की जान
स्थिति तब गंभीर हो गई जब महिला की हालत बिगड़ने लगी. मौके पर मौजूद रामकांत और रामजस ने हस्तक्षेप करते हुए किसी तरह मारपीट को रोका. इसके बाद घायल महिला को तत्काल इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरपाटन ले जाया गया.
डॉक्टरों ने जांच के दौरान महिला के हाथ, पैर और पीठ पर गंभीर चोटों की पुष्टि की. समय रहते उपचार मिलने से महिला की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है.
मौत के बाद फैली ‘भटकती आत्मा’ की भ्रांति
स्थानीय लोगों के अनुसार हाल ही में आरोपी पक्ष के परिवार में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी. इसके बाद गांव में ‘भटकती आत्मा’ और प्रेत बाधा की चर्चा फैल गई. इसी अंधविश्वास के चलते महिला को निशाना बनाया गया.
ग्रामीण समाज में अक्सर किसी अप्रिय घटना या बीमारी के बाद अलौकिक कारणों की कहानियां फैल जाती हैं, जो कई बार हिंसा और शोषण का कारण बनती हैं.
पुलिस ने दर्ज की एनसीआर
अमरपाटन थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने बताया कि मामले में शिकायत मिलने के बाद एनसीआर दर्ज कर ली गई है. पुलिस साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है.
उन्होंने कहा कि कानून किसी भी प्रकार की झाड़फूंक के नाम पर हिंसा या प्रताड़ना की अनुमति नहीं देता और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
समाज में अंधविश्वास की जड़ें अभी भी गहरी
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी है. तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति के इस दौर में भी समाज के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास गहराई से मौजूद है.
विशेषज्ञों के अनुसार अंधविश्वास के पीछे कई कारण होते हैं:
- शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी
- मानसिक और शारीरिक बीमारियों की सही जानकारी का अभाव
- सामाजिक दबाव और पारंपरिक मान्यताएं
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुंच
जब वैज्ञानिक इलाज उपलब्ध होने के बावजूद लोग झाड़फूंक या तंत्र-मंत्र का सहारा लेते हैं, तब ऐसे हादसे सामने आते हैं.
महिलाएं अक्सर बनती हैं शिकार
देशभर में सामने आने वाले कई मामलों में देखा गया है कि अंधविश्वास से जुड़ी हिंसा का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ता है. कभी ‘डायन’ बताकर तो कभी ‘प्रेत बाधा’ के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जागरूकता अभियान और शिक्षा ही ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है.
कानूनी दृष्टि से अपराध
भारतीय कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अंधविश्वास या झाड़फूंक के नाम पर शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध है. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों पर गंभीर धाराएं लग सकती हैं.
पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बीमारी या मानसिक समस्या होने पर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से संपर्क करें, न कि अंधविश्वास के जाल में फंसें.
जागरूकता ही समाधान
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक हिंसा का कारण भी बन सकता है. जरूरत है वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य एवं शिक्षा जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने की.
यदि समय रहते परिवार सही निर्णय न लेता, तो यह घटना और भी गंभीर रूप ले सकती थी. इस मामले ने यह साबित कर दिया कि अंधविश्वास की जगह जब जागरूकता लेती है, तभी इंसानियत बचती है.
निष्कर्ष
मैहर जिले की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक युग में भी अंधविश्वास किस तरह लोगों की सोच पर हावी है. बीमारी का इलाज हिंसा नहीं, बल्कि चिकित्सा और समझदारी है.
समाज को अब यह तय करना होगा कि वह डर और भ्रम के रास्ते पर चलेगा या विज्ञान और जागरूकता की दिशा में आगे बढ़ेगा.
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