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रीवा: किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर 56 लाख की ठगी, हरदा से आरोपी गिरफ्तार

किडनी ट्रांसप्लांट कराने का झांसा देकर 56 लाख रुपये की बड़ी ठगी का खुलासा। रीवा कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हरदा से गिरफ्तार किया

रीवा: किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर 56 लाख की ठगी, हरदा से आरोपी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के रीवा शहर से एक बेहद चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि लोगों के भरोसे पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. किडनी ट्रांसप्लांट कराने का झांसा देकर एक पीड़ित से 56 लाख रुपये की बड़ी रकम हड़पने वाले आरोपी को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला हरदा से गिरफ्तार कर लिया है.

बीमारी और मजबूरी का फायदा उठाकर की गई इस ठगी ने यह साबित कर दिया है कि साइबर और मेडिकल फ्रॉड अब नए और खतरनाक रूप ले चुके हैं. पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है और आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह भी सक्रिय हो सकता है.

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपी गिरफ्त में

इस पूरे मामले की कार्रवाई पुलिस अधीक्षक रीवा शैलेन्द्र सिंह चौहान के निर्देशन में संपन्न हुई. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरती सिंह तथा नगर पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) राजीव पाठक के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई.

थाना सिटी कोतवाली प्रभारी श्रृंगेश सिंह राजपूत के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग की मदद से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया और उसे हरदा जिले से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को न्यायालय में पेश कर एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ जारी है.

बीमारी की मजबूरी बनी ठगी का जरिया

मामले के प्रार्थी दिलीप कुमार सोनी (40 वर्ष), निवासी अशोक नगर तरहटी, वार्ड क्रमांक 31 रीवा ने 20 मार्च 2026 को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.

उन्होंने पुलिस को बताया कि अगस्त 2025 में उनकी पत्नी की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई थी. डॉक्टरों ने जांच के बाद किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी. परिवार पहले से ही मानसिक और आर्थिक दबाव में था, ऐसे समय में उन्हें एक व्यक्ति से संपर्क मिला जिसने इलाज कराने का भरोसा दिलाया.

यहीं से ठगी की पूरी साजिश शुरू हुई.

विश्वास जीतकर आरोपी ने बनाया शिकार

जांच में सामने आया कि आरोपी प्रियांशू पवार उर्फ आयुष पवार ने खुद को मेडिकल नेटवर्क से जुड़ा व्यक्ति बताकर पीड़ित का विश्वास जीता. उसने भोपाल स्थित एक प्रतिष्ठित अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराने का दावा किया.

आरोपी ने इलाज की प्रक्रिया, डॉक्टरों की उपलब्धता और ऑपरेशन की तैयारी का हवाला देते हुए अलग-अलग समय पर पैसे मांगे. विश्वास में आए पीड़ित ने आरोपी द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से कुल 56 लाख रुपये जमा कर दिए.

शुरुआत में आरोपी लगातार आश्वासन देता रहा, जिससे परिवार को लगा कि इलाज जल्द शुरू होगा.

बार-बार पैसों की मांग से बढ़ा शक

समय बीतने के बावजूद जब ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और आरोपी लगातार नई-नई वजह बताकर अतिरिक्त पैसे मांगता रहा, तब पीड़ित को संदेह हुआ.

पीड़ित ने अस्पताल और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई तो पता चला कि आरोपी द्वारा बताए गए दावे झूठे थे. इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ सुनियोजित ठगी की गई है.

तत्काल उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला गंभीरता से लिया गया.

तकनीकी जांच से मिला बड़ा सुराग

मामला दर्ज होते ही कोतवाली पुलिस ने डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल लोकेशन और बैंकिंग डिटेल्स की जांच शुरू की. तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया गया.

लगातार निगरानी के बाद पुलिस टीम ने हरदा जिले में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से लोगों को मेडिकल इलाज के नाम पर ठगने की कोशिश कर रहा था.

संगठित गिरोह होने की आशंका

प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी अकेला काम नहीं कर रहा था. पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को निशाना बनाता है.

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि:

  • क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरह की ठगी हुई है?
  • आरोपी के साथ और कौन-कौन शामिल हैं?
  • किन बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया?
  • क्या मेडिकल संस्थानों का नाम गलत तरीके से उपयोग किया गया?

जांच के बाद और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

मेडिकल फ्रॉड के बढ़ते मामले चिंता का विषय

विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर बीमारियों से जुड़े मामलों में लोग भावनात्मक और मानसिक रूप से कमजोर होते हैं. ठग इसी स्थिति का फायदा उठाते हैं.

मेडिकल फ्रॉड के मामलों में अक्सर देखा गया है कि आरोपी:

  • खुद को अस्पताल या डॉक्टर से जुड़ा बताते हैं
  • जल्दी इलाज कराने का भरोसा देते हैं
  • एडवांस फीस के नाम पर बड़ी रकम मांगते हैं
  • ऑनलाइन ट्रांसफर पर जोर देते हैं

ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है.

पुलिस की आमजन से अपील

रीवा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के इलाज, विशेषकर ट्रांसप्लांट जैसे संवेदनशील मामलों में पैसे देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें.

पुलिस ने लोगों को निम्न सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  • अस्पताल से सीधे संपर्क करें
  • डॉक्टर की आधिकारिक जानकारी सत्यापित करें
  • बिना दस्तावेज बड़ी रकम ट्रांसफर न करें
  • संदिग्ध कॉल या ऑफर की तुरंत शिकायत करें
  • केवल अधिकृत मेडिकल चैनल से ही इलाज प्रक्रिया अपनाएं

समाज के लिए बड़ा सबक

यह घटना केवल एक ठगी का मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है. जब बीमारी जैसी संवेदनशील परिस्थिति का इस्तेमाल अपराध के लिए किया जाता है, तो यह मानवीय संवेदनाओं पर सीधा हमला होता है.

ऐसे मामलों में समय पर शिकायत और पुलिस की सक्रियता ही पीड़ितों को न्याय दिला सकती है. रीवा पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, कानून की पकड़ से बच नहीं सकते.

निष्कर्ष

रीवा में सामने आया यह किडनी ट्रांसप्लांट ठगी मामला आधुनिक ठगी के बदलते स्वरूप को उजागर करता है. डिजिटल भुगतान और मेडिकल भरोसे का गलत इस्तेमाल कर अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

हालांकि पुलिस की तेज कार्रवाई से आरोपी गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और खुलासे हो सकते हैं.

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