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रीवा: तालाब निर्माण में अनियमितता, जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं

तिवनी पंचायत में तालाब गहरीकरण और अटल सरोवर निर्माण में कथित घोटाले की जांच महीनों बाद भी ठंडे बस्ते में

रीवा: तालाब निर्माण में अनियमितता, जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं

मध्य प्रदेश के रीवा जिले की जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत तिवनी में तालाब गहरीकरण और अटल सरोवर निर्माण से जुड़ा कथित भ्रष्टाचार का मामला प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है, कई स्तरों पर शिकायतों, निरीक्षण और जांच टीम के गठन के बावजूद अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई.

इस पूरे प्रकरण ने ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.  शिकायतकर्ता लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी मामला फाइलों में दबा नजर आ रहा है.

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क्या है पूरा मामला

ग्राम पंचायत तिवनी में मनरेगा योजना के तहत तालाब गहरीकरण और अटल सरोवर निर्माण कार्य कराया गया था. इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करना था.

लेकिन स्थानीय निवासी एवं शिकायतकर्ता प्रकाश तिवारी के अनुसार, इन कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं. आरोप है कि:

  • मजदूरों से काम कराने की बजाय मशीनों का उपयोग किया गया
  • योजना के नियमों का खुला उल्लंघन हुआ
  • सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया
  • निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ

इन आरोपों के बाद मामला धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया.

जांच टीम बनी, निरीक्षण भी हुआ

मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले मीडिया में खबरें प्रसारित हुईं. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच टीम गठित की गई.

दिनांक 12 दिसंबर 2025 को जांच दल ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान:

  • स्थल पंचनामा तैयार किया गया
  • जलभराव की स्थिति दर्ज की गई
  • शासकीय भवनों को हुए नुकसान की पुष्टि हुई
  • निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठे

जांच दल ने अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी थी. उम्मीद थी कि जल्द ही कार्रवाई होगी, लेकिन कई महीने गुजर जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

मनरेगा नियमों के उल्लंघन का आरोप

मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है. नियमों के अनुसार अधिकांश कार्य श्रम आधारित होने चाहिए.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि:

  • मजदूरों की जगह मशीनों से खुदाई कराई गई
  • फर्जी मजदूरी भुगतान दिखाया गया
  • वास्तविक श्रमिकों को रोजगार नहीं मिला

यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मनरेगा दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा.

अटल सरोवर निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल

अटल सरोवर निर्माण को क्षेत्र में जल संरक्षण की बड़ी परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया था. लेकिन ग्रामीणों के अनुसार निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद ही सरोवर की संरचना कमजोर पड़ गई.

आरोप हैं कि:

  • निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया
  • निर्माण प्रक्रिया तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं थी
  • संरचना का हिस्सा ध्वस्त हो गया

इसके परिणामस्वरूप आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हुई, जिससे ग्रामीणों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा.

जलभराव से प्रभावित हुए घर और सरकारी भवन

अवैध और गलत तरीके से किए गए गहरीकरण के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हुई. ग्रामीणों का कहना है कि:

  • कई घरों में पानी भर गया
  • शासकीय भवनों को क्षति पहुंची
  • ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा

जांच टीम ने भी अपने निरीक्षण में इन स्थितियों की पुष्टि की थी, फिर भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है.

आरक्षित भूमि के दुरुपयोग का आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है. शिकायतकर्ता के अनुसार जिस भूमि को स्टेडियम निर्माण के लिए आरक्षित किया गया था, वहां अन्य कार्य किए गए.

यदि यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है.

सीएम हेल्पलाइन और आरटीआई भी बेअसर

न्याय की उम्मीद में शिकायतकर्ता ने कई स्तरों पर प्रयास किए:

  • जनपद पंचायत सीईओ को शिकायत
  • जिला प्रशासन को आवेदन
  • मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज
  • सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी

लेकिन आरोप है कि अब तक किसी विभाग ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया.

यह स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है.

राजनीतिक दबाव के आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में जांच को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा. आरोपों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम भी सामने आए हैं.

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है.

शिकायतकर्ता को धमकियों का आरोप

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि शिकायत करने के बाद उन्हें धमकियां मिल रही हैं. यदि यह सच है, तो यह न केवल प्रशासनिक बल्कि कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है.

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

मामले में अब तक:

  • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई
  • दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई
  • विभागीय जवाब सामने नहीं आया

इससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है.

ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर बहस

यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है. यह सवाल उठाता है कि:

  • क्या योजनाओं की निगरानी प्रभावी है?
  • क्या जांच प्रक्रियाएं समयबद्ध हैं?
  • क्या शिकायतकर्ताओं को पर्याप्त संरक्षण मिलता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण योजनाओं की सफलता पारदर्शिता और जवाबदेही पर निर्भर करती है.

अब आगे क्या?

अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं. ग्रामीणों और शिकायतकर्ता की मांग है कि:

  • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
  • जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
  • प्रभावित लोगों को मुआवजा मिले
  • भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगे

यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है.

निष्कर्ष

तिवनी पंचायत का तालाब गहरीकरण और अटल सरोवर निर्माण विवाद प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही की कमी का प्रतीक बनता जा रहा है. जांच होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव यह दर्शाता है कि व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है.

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