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Toggleरीवा: निजी एम्बुलेंस का खेल बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सड़कों पर दौड़ती जानलेवा सेवाएं
रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जो न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है. यहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के नाम पर 200 से अधिक निजी एम्बुलेंस बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) और जरूरी मेडिकल सुविधाओं के सड़कों पर दौड़ रही हैं.
ये एम्बुलेंस, जो मरीजों के लिए जीवन रक्षक बननी चाहिए, अब उनके लिए खतरे का कारण बनती जा रही हैं. सवाल यह है कि आखिर किसकी शह पर ये अवैध गतिविधियां जारी हैं?
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क्या है पूरा मामला?
रीवा जिले में तेजी से बढ़ रही निजी एम्बुलेंस सेवाएं अब नियंत्रण से बाहर होती नजर आ रही हैं. इन एम्बुलेंस में न तो आवश्यक मेडिकल उपकरण हैं और न ही इनकी वैध पहचान.
प्रमुख समस्याएं:
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हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का अभाव
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ऑक्सीजन सिलेंडर और जीवन रक्षक उपकरणों की कमी
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बिना प्रशिक्षित स्टाफ
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सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन
ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के साथ खुला धोखा हो रहा है.
नियमों की धज्जियां उड़ाते एम्बुलेंस संचालक
सरकार द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, हर एम्बुलेंस में निम्न सुविधाएं अनिवार्य हैं:
आवश्यक सुविधाएं:
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ऑक्सीजन सिलेंडर और रेगुलेटर
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प्राथमिक चिकित्सा किट
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स्ट्रेचर और व्हीलचेयर
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कार्डियक मॉनिटर
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डिफिब्रिलेटर
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प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ
लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश निजी एम्बुलेंस इन मानकों पर खरी नहीं उतरतीं.
जमीनी हकीकत: नाम पर सेवा, असल में कारोबार
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम एक “कमाई का जरिया” बन चुका है.
मरीज परिजन बताते हैं:
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मामूली दूरी के लिए भी भारी शुल्क वसूला जाता है
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गंभीर मरीजों को भी बिना सुविधा वाली एम्बुलेंस में ले जाया जाता है
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कई बार रास्ते में ऑक्सीजन खत्म होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं
इससे साफ है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित शोषण तंत्र बन चुका है.
सरकारी एम्बुलेंस बनाम निजी एम्बुलेंस
जहां एक तरफ 108 एम्बुलेंस सेवा सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर सुविधाएं देती है, वहीं निजी एम्बुलेंस बिना किसी नियंत्रण के चल रही हैं.
| पहलू | सरकारी एम्बुलेंस | निजी एम्बुलेंस |
|---|---|---|
| पंजीकरण | अनिवार्य | कई बिना पंजीकरण |
| उपकरण | उपलब्ध | अधिकांश में कमी |
| स्टाफ | प्रशिक्षित | अक्सर अप्रशिक्षित |
| शुल्क | निर्धारित | मनमाना |
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट क्यों जरूरी?
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) सिर्फ एक नंबर प्लेट नहीं, बल्कि सुरक्षा का अहम हिस्सा है.
इसके फायदे:
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वाहन की पहचान सुनिश्चित
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फर्जी वाहनों पर रोक
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आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण
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ट्रैकिंग में आसानी
लेकिन रीवा में अधिकांश एम्बुलेंस बिना HSRP के चल रही हैं, जो कानून का सीधा उल्लंघन है.
ऑक्सीजन किट और उपकरणों का ऑडिट नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एम्बुलेंस में मौजूद ऑक्सीजन किट और अन्य उपकरणों का नियमित ऑडिट होना चाहिए.
जरूरी ऑडिट प्रक्रिया:
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हर महीने ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच
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उपकरणों की कार्यक्षमता टेस्ट
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एक्सपायरी दवाओं का निरीक्षण
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स्टाफ की ट्रेनिंग अपडेट
लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी तरह गायब है.
प्रशासन क्यों है खामोश?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इतनी बड़ी अनियमितता सामने है, तो प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
संभावित कारण:
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अधिकारियों की लापरवाही
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मिलीभगत की आशंका
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निगरानी तंत्र की कमजोरी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई एम्बुलेंस सीधे निजी अस्पतालों से जुड़ी हैं, जिससे एक पूरा “रेफरल नेटवर्क” बन चुका है.
मरीजों से हो रही है खुली लूट
निजी एम्बुलेंस संचालक मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं.
आम शिकायतें:
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5-10 किमी के लिए ₹2000-₹5000 तक चार्ज
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रात के समय दोगुना किराया
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ICU सुविधा के नाम पर अतिरिक्त शुल्क
यह स्थिति गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहद गंभीर है.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एम्बुलेंस सेवा एक जीवन रक्षक प्रणाली है, इसे व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए.
“अगर एम्बुलेंस में जरूरी उपकरण नहीं हैं, तो वह सिर्फ एक वाहन है, जीवन रक्षक नहीं.”
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए:
जरूरी कदम:
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सभी निजी एम्बुलेंस का पंजीकरण अनिवार्य
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बिना HSRP वाहनों पर तत्काल कार्रवाई
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नियमित मेडिकल ऑडिट
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शुल्क निर्धारण और निगरानी
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हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली
जनता की भूमिका भी अहम
इस मुद्दे को उठाने में आम जनता की भी महत्वपूर्ण भूमिका है.
आप क्या कर सकते हैं?
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बिना नंबर प्लेट एम्बुलेंस की शिकायत करें
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ओवरचार्जिंग की जानकारी प्रशासन को दें
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केवल प्रमाणित एम्बुलेंस का उपयोग करें
रीवा बना उदाहरण या चेतावनी?
रीवा की यह स्थिति पूरे राज्य और देश के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है.
निष्कर्ष
रीवा में निजी एम्बुलेंस सेवाओं की हकीकत बेहद चिंताजनक है. जहां एक ओर ये सेवाएं मरीजों की जान बचाने के लिए होती हैं, वहीं दूसरी ओर लापरवाही और लालच के कारण ये उनकी जान के लिए खतरा बनती जा रही हैं.
अब समय आ गया है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और इस अव्यवस्था को खत्म करे. साथ ही, जनता को भी जागरूक होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी.
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