Vindhya First

शहडोल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: सोनोग्राफी के लिए 100 KM सफर

शहडोल के ब्यौहारी में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने आई है. सोनोग्राफी सुविधा न होने से गर्भवती महिलाओं को 100 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है

शहडोल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: सोनोग्राफी के लिए 100 KM सफर

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावों के बीच शहडोल जिले के ब्यौहारी क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल दी है. करोड़ों रुपये की लागत से बने अस्पतालों की इमारतें तो खड़ी हैं, लेकिन उनके भीतर न जरूरी मशीनें हैं और न ही विशेषज्ञ डॉक्टर.

इसी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का एक दर्दनाक उदाहरण इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां एक महिला ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भावुक अपील करते हुए ब्यौहारी सिविल अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा शुरू कराने की मांग की है.

यह भी पढ़ें-कृषि विवाद: कृषि मेले पर सियासी टकराव जीतू पटवारी ने लगाए गंभीर आरोप

वायरल वीडियो ने खोली स्वास्थ्य विभाग की हकीकत

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ब्यौहारी क्षेत्र की निवासी मीना साकेत ने बताया कि स्थानीय सिविल अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन या प्रशिक्षित ऑपरेटर उपलब्ध नहीं है.

इस कारण गर्भवती महिलाओं को सामान्य जांच के लिए भी 90 से 100 किलोमीटर दूर शहडोल जिला अस्पताल जाना पड़ता है.

मीना साकेत ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान इतनी लंबी दूरी तय करना महिलाओं के लिए बेहद कष्टदायक और जोखिम भरा है.

मातृत्व बना मुश्किल सफर

गर्भावस्था के दौरान नियमित सोनोग्राफी जांच मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक मानी जाती है. लेकिन ब्यौहारी की महिलाओं के लिए यह सामान्य जांच भी किसी चुनौती से कम नहीं है.

घंटों का बस सफर, खराब सड़कें, शारीरिक कमजोरी और आर्थिक परेशानी—इन सबके बीच महिलाओं को मजबूरी में जिला अस्पताल जाना पड़ता है.

महिलाओं को हो रही प्रमुख परेशानियां:

  • पैरों में सूजन और थकान
  • यात्रा के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा
  • आपात स्थिति में समय पर इलाज न मिल पाने की आशंका
  • बार-बार यात्रा से आर्थिक बोझ

100 किलोमीटर की दूरी बन रही जानलेवा

ब्यौहारी से जिला अस्पताल शहडोल की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है. सामान्य परिस्थितियों में यह सफर 2 से 3 घंटे का हो सकता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क और परिवहन व्यवस्था इसे और कठिन बना देती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए आपातकालीन स्थितियों में इतनी दूरी जानलेवा साबित हो सकती है. यदि किसी महिला को अचानक ब्लीडिंग, हाई BP या प्रसव पीड़ा शुरू हो जाए, तो समय पर चिकित्सा न मिलना गंभीर परिणाम दे सकता है.

करोड़ों की इमारत, लेकिन सुविधाएं गायब

ब्यौहारी सिविल अस्पताल का भवन आधुनिक ढांचे के साथ तैयार किया गया है. सरकार ने इसे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित किया था.

लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल केवल भवन बनकर रह गया है-

  • मशीनें नहीं
  • विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
  • टेक्नीशियन नहीं
  • जांच सुविधाएं अधूरी

यानी अस्पताल मरीजों के इलाज का केंद्र कम और रेफरल सेंटर ज्यादा बन चुका है.

गरीब परिवारों पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ

सिर्फ दूरी ही नहीं, बल्कि आर्थिक पक्ष भी ग्रामीण परिवारों को परेशान कर रहा है.

एक बार शहडोल जिला अस्पताल आने-जाने में गरीब परिवारों को:

  • बस/वाहन किराया
  • खाने-पीने का खर्च
  • दिहाड़ी/काम का नुकसान
  • साथ आने वाले परिजन का अतिरिक्त खर्च

जैसे बोझ उठाने पड़ते हैं.

ऐसे में कई परिवार मजबूरी में जांच टाल देते हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच समय पर नहीं हो पाती.

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग

यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—

जब करोड़ों की लागत से अस्पताल तैयार किया गया, तो आवश्यक मशीनों और विशेषज्ञों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

यदि अस्पतालों में मूलभूत जांच सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं, तो ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे के सुदृढ़ीकरण के दावे कितने सार्थक हैं?

महिलाओं की मांग: ब्यौहारी में तुरंत शुरू हो सोनोग्राफी सेवा

स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. ब्यौहारी सिविल अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन तत्काल स्थापित की जाए
  2. प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट/ऑपरेटर की नियुक्ति की जाए
  3. प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित हो
  4. गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जांच शिविर लगाए जाएं

क्या मुख्यमंत्री लेंगे संज्ञान?

मीना साकेत की अपील अब केवल एक महिला की व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह ब्यौहारी और आसपास के हजारों परिवारों की सामूहिक आवाज बन चुकी है.

सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो तेजी से जनसमर्थन जुटा रहा है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई करेगा.

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

ब्यौहारी का यह मामला केवल एक अस्पताल की कमी नहीं दर्शाता, बल्कि यह ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की व्यापक चुनौतियों को सामने लाता है.

जब बुनियादी जांच सुविधाएं भी जिला मुख्यालय पर निर्भर हों, तब ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है.

निष्कर्ष

डिजिटल इंडिया, स्वास्थ्य क्रांति और आधुनिक चिकित्सा के दावों के बीच यदि एक गर्भवती महिला को सिर्फ सोनोग्राफी के लिए 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़े, तो यह केवल सिस्टम की विफलता नहीं बल्कि संवेदनहीनता का प्रमाण है.

ब्यौहारी की महिलाओं की यह पुकार अब शासन-प्रशासन के लिए परीक्षा है. देखना होगा कि यह आवाज फाइलों में दबती है या वास्तव में बदलाव का कारण बनती है.

यह भी पढ़ें-रीवा ब्रेकिंग: अस्पताल में आरक्षक की शर्मनाक हरकत, वीडियो वायरल