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शिक्षा में अव्वल, सुरों में निपुण, प्रोफेसर शिवांगी मिश्रा की अनोखी कहानी!

सतना जिले की शिवांगी मिश्रा ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की, बल्कि संगीत के प्रति अपने जुनून को भी बरकरार रखा.  बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली शिवांगी ने संगीत में भी खुद को साबित किया और विद्यालय एवं प्रदेश स्तरीय कई प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल किया. उनकी प्रतिभा और समर्पण को देखते हुए कॉलेज ने उन्हें संगीत के क्षेत्र में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया.

शिक्षा और संगीत का संतुलन
शिवांगी ने अपनी मेहनत और लगन के बलबूते प्रोफेसर की उपाधि प्राप्त की. लेकिन उनके दिल में संगीत के लिए एक अलग ही स्थान था. उन्होंने न केवल शिक्षण कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त की, बल्कि संगीत साधना को भी जारी रखा. उनके लिए संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति थी.

ग़ज़ल से लेकर शास्त्रीय संगीत तक की यात्रा
शिवांगी मिश्रा ने अपने संगीत अभ्यास को निरंतर जारी रखते हुए ग़ज़ल, शास्त्रीय संगीत, सेमी-क्लासिकल और बॉलीवुड गानों में महारथ हासिल की. उनकी गहरी रुचि और कड़ी मेहनत ने उन्हें शास्त्रीय संगीत के जटिल रागों में भी निपुण बना दिया. उनके पसंदीदा संगीत शैलियों में शामिल हैं:

  • ग़ज़ल – जो उनकी आवाज़ में गहराई और भावनाओं को उभारता है.
  • ठुमरी – जिसमें नज़ाकत और कोमलता की झलक मिलती है.
  • दादरा – जो छोटी लेकिन भावपूर्ण शैली मानी जाती है.
  • ख़याल गायकी – जो भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार मानी जाती है.
  • राग नंद – जिसे गाना बहुत ही कठिन माना जाता है, लेकिन शिवांगी ने इसे भी अपने कौशल से सहज बना दिया.

संगीत के प्रति अनवरत समर्पण
अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, शिवांगी हर दिन घंटों रियाज़ करती हैं. उनका मानना है कि संगीत साधना ही असली सफलता की कुंजी है. उन्होंने कई मंचों पर अपनी प्रस्तुति दी है और अपनी मधुर आवाज़ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है.

आने वाले समय में लक्ष्य
शिवांगी का सपना है कि वह संगीत के क्षेत्र में और ऊंचाइयों तक पहुंचे और नई पीढ़ी को संगीत की बारीकियां सिखाएं. वह चाहती हैं कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच बनाए.