ऑपरेशन प्रहार:
ऑपरेशन प्रहार रीवा
ऑपरेशन प्रहार: नशे के खिलाफ जंग
रीवा, मध्यप्रदेश—यह शहर कभी अपनी सांस्कृतिक पहचान और शैक्षणिक विरासत के लिए जाना जाता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यहाँ नशे का जाल धीरे-धीरे फैलने लगा। स्कूल-कॉलेज के आसपास, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाहरी इलाकों में नशीली कफ सिरप, गांजा और अवैध शराब का कारोबार पनपने लगा। यह खतरा सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के भविष्य का बनता जा रहा था।इसी चुनौती के जवाब में रीवा पुलिस ने एक सख़्त और निर्णायक कदम उठाया—“ऑपरेशन प्रहार”। यह सिर्फ एक पुलिस अभियान नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ छेड़ी गई एक संगठित जंग है.
क्या है ऑपरेशन प्रहार?
ऑपरेशन प्रहार रीवा पुलिस द्वारा शुरू किया गया एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य जिले में नशे, अपराध और अवैध गतिविधियों पर सख़्ती से रोक लगाना है। इस अभियान के तहत नशीली कफ सिरप, गांजा, ड्रग्स, अवैध शराब, जुआ-सट्टा और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लगातार छापेमारी, चेकिंग और गिरफ्तारियाँ की जाती हैं।स्कूल-कॉलेज परिसरों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ढाबों, किराये के मकानों और संदिग्ध इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जाती है। पुलिस की टीमें अचानक दबिश देती हैं, वाहनों की चेकिंग होती है और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जाती है।ऑपरेशन प्रहार केवल कानून लागू करने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास है कि रीवा में अपराध और नशे के लिए कोई जगह नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य जिले को सुरक्षित, जागरूक और नशामुक्त बनाना है.
गिरफ्तारियाँ और कार्रवाई: आंकड़े जो कहानी कहते हैं
ऑपरेशन प्रहार के तहत अब तक कई बड़ी सफलताएँ सामने आई हैं। पुलिस ने 16 पेटियों में कुल 1,920 बोतल नशीली कफ सिरप के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया, जिनमें रीवा, उत्तर प्रदेश और बनारस के आरोपी शामिल थे। इन सभी के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।इसी अभियान में एक मारुति कार से 557 प्रतिबंधित ऑनरेक्स कफ सिरप जब्त की गई और प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़ने में जुटी है—कौन सप्लाई करता है, कौन बेचता है और यह ज़हर किन-किन इलाकों तक पहुँचाया जाता है।इन कार्रवाइयों ने यह साफ कर दिया है कि ऑपरेशन प्रहार सिर्फ छोटे अपराधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे नशा नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने की दिशा में बढ़ रहा है।
क्यों खतरनाक है नशीली कफ सिरप?
नशीली कफ सिरप आम दवा की तरह दिखती है, लेकिन इसमें मौजूद रसायन दिमाग पर गहरा असर डालते हैं। यह सस्ती और आसानी से मिलने वाली होने के कारण युवाओं के बीच तेजी से फैलती है।
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इसके लगातार सेवन से
याददाश्त कमजोर होती है,मानसिक संतुलन बिगड़ता है,लिवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ता है,गंभीर मामलों में जान तक जा सकती हैसबसे खतरनाक पहलू यह है कि बच्चे इसे “दवा” समझकर सुरक्षित मान लेते हैं, जबकि हकीकत में यह नशे की सबसे खामोश और घातक शक्ल है।
NDPS एक्ट क्या है?
NDPS एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) भारत का एक सख़्त कानून है, जिसका उद्देश्य नशीले पदार्थों जैसे गांजा, चरस, अफीम, हेरोइन, नशीली दवाओं और कफ सिरप की अवैध खरीद–फरोख्त, तस्करी, भंडारण और सेवन पर रोक लगाना है।नशीली सिरप की अवैध बिक्री भी इसी एक्ट के अंतर्गत आती है। इसी कारण ऑपरेशन प्रहार के तहत पकड़े गए आरोपियों पर NDPS एक्ट लगाया जाता है, ताकि नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
समाज पर असर: भरोसा और जागरूकता
ऑपरेशन प्रहार का असर सिर्फ अपराधियों पर नहीं, बल्कि समाज पर भी दिखने लगा है। रात में बढ़ी गश्त, सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी और लगातार हो रही कार्रवाइयों से लोगों में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है।माता-पिता अब अधिक निश्चिंत महसूस कर रहे हैं कि उनके बच्चे स्कूल और कॉलेज के आसपास सुरक्षित हैं। स्थानीय लोग भी पुलिस को सूचनाएँ देने लगे हैं। यह अभियान धीरे-धीरे एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है, जिसमें नागरिक भी भागीदार बन रहे हैं।
आगे की राह
नशा एक ऐसा जाल है जो धीरे-धीरे पूरे समाज को खोखला कर देता है। ऑपरेशन प्रहार ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो इस जाल को तोड़ा जा सकता है।रीवा पुलिस का यह अभियान एक मिसाल बन रहा है—यह दिखाता है कि कानून, प्रशासन और समाज मिलकर चाहें तो आने वाली पीढ़ी को अंधेरे से बचाया जा सकता है।क्योंकि यह सिर्फ अपराध के खिलाफ लड़ाई नहीं है-यह भविष्य को बचाने की जंग है।
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