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2 रुपए और 2 मुट्ठी चावल से 40 करोड़ तक का सफर, पद्मश्री फूलबासन बाई ने कैसे बदली हजारों महिलाओं की तकदीर?

छत्तीसगढ़ की मिट्टी में जन्मी एक साधारण महिला, फूलबासन बाई यादव जो आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. फूलबासन बाई का जन्म राजनंदगांव जिले में एक गरीब परिवार में हुआ था. बचपन से ही उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन अपना हौसला कभी कमजोर नहीं होने दिया. शादी के बाद भी आर्थिक तंगी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने साहस, परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है.

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
विपरीत परिस्थितियों में फूलबासन बाई ने गरीबी, कुपोषण और बाल विवाह से लड़ने की ठानी. साल 2001 में उन्होंने दो रुपये और दो मुट्ठी चावल से 11 महिलाओं के साथ मिलकर महिला समूह का काम शुरू किया. जिसमें उन्हें कई तरह के समाजिक विरोध भी झेलना पड़े, लेकिन अपने मजबूत हौसले से उन्होंने सभी को मात दे दी. इसके बाद उन्होने ‘मां बम्लेश्वरी जनहित कार्य समिति’ की स्थापना की, जिसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया. यह संगठन महिलाओं को रोजगार, शिक्षा, और वित्तीय साक्षरता से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है. फूलबासन बाई ने महिलाओं को सिलाई, डेयरी, कृषि और अन्य छोटे-छोटे व्यवसायों से जोड़ा, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें. फूलबासन बाई आज करीब दो लाख महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित कर चुकी हैं और करीब 14 हजार महिला समूहों का गठन किया है.

सम्मान और पुरस्कार
फबलबासन के सामाजिक कार्यों और योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया. ऐसा कोई साल नहीं बीता जिसमें उन्हे सम्मान न मिला हो. भारत सरकार ने साल 2012 में फूलबासन बाई को पद्मश्री सम्मान से नवाजित किया, जो उनके अथक प्रयासों और कड़ी मेहनत की सच्ची पहचान है. इसके अलावा फूलबासन बाई ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे बड़े मंच पर पहुंचकर अपनी प्रेरणादायक यात्रा को पूरे देश के सामने प्रस्तुत किया, फिर सीजन-12 में फूलबासन बाई यादव ने शो में 50 लाख रुपये जीते.

फूलबासन बाई से सीखने योग्य बातें
फूलबासन बाई यादव का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिनाइयां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हमारे अंदर इच्छाशक्ति और समर्पण है, तो हम हर बाधा को पार कर सकते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही दिशा और मार्गदर्शन से महिलाएं न केवल खुद को सशक्त बना सकती हैं, बल्कि समाज में भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं. उनका जीवन संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ने की एक अनूठी मिसाल है, जो हम सभी को प्रेरित करता है.