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Toggleकृषि विवाद: कृषि मेले पर सियासी टकराव जीतू पटवारी ने लगाए गंभीर आरोप
कृषि विवाद: भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कृषि मेले में जाने से रोके जाने का आरोप लगाया. MSP, गेहूं खरीदी और किसानों के नुकसान को लेकर सरकार पर उठाए बड़े सवाल.
कृषि मेले को लेकर बढ़ा विवाद, जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. भोपाल में जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर कृषि मेले में जाने से रोका जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ‘कृषि कल्याण वर्ष’ मना रही है, तो एक किसान के बेटे को ही ऐसे आयोजन से दूर क्यों रखा जा रहा है.
विदिशा दौरे में सामने आई किसानों की परेशानी
जीतू पटवारी ने बताया कि हाल ही में वे विदिशा जिले के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना. किसानों ने उन्हें बताया कि गेहूं की सरकारी समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी समय पर नहीं हो सकी, जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा.
पटवारी के अनुसार, करीब 20 लाख क्विंटल गेहूं किसानों को ₹2000 से कम कीमत पर बेचना पड़ा. वर्तमान में भी मंडियों में गेहूं ₹2200 से ₹2300 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल ₹400 से ₹500 तक का नुकसान हो रहा है.
MSP व्यवस्था पर उठे सवाल
पटवारी ने कहा कि MSP का लाभ किसानों तक सही समय पर नहीं पहुंच पा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण किसानों को अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा.
उनका कहना है कि यदि खरीदी समय पर होती, तो किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने की नौबत नहीं आती। यह सीधे तौर पर किसानों के हितों के साथ अन्याय है.
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कृषि मेले में शामिल होने की इच्छा
जीतू पटवारी ने बताया कि उन्होंने विदिशा में आयोजित हो रहे कृषि मेले में शामिल होने की इच्छा जताई थी. यह मेला शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी सहित कई केंद्रीय मंत्री और अधिकारी शामिल हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि एक किसान होने के नाते उनका भी अधिकार है कि वे इस मेले में जाकर नई तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों को समझें.
“मुझसे डर किस बात का है?”
पटवारी ने दावा किया कि उन्होंने प्रशासन को पहले ही पत्र लिखकर मेले में शामिल होने की अनुमति मांगी थी और यह आश्वासन भी दिया था कि वे किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं फैलाएंगे.
उन्होंने कहा,
“मैंने कलेक्टर और अधिकारियों से बात की, यहां तक कि शिवराज सिंह चौहान जी के OSD से भी संपर्क किया. इसके बावजूद ADG स्तर से फोन कर कहा गया कि सरकार चाहती है कि मैं वहां न जाऊं। आखिर मुझसे डर किस बात का है?”
पुलिस बल की तैनाती पर उठे सवाल
पटवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें रोकने के लिए रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. प्रशासन द्वारा उन्हें सर्किट हाउस बुलाया गया, लेकिन अब तक मेले में शामिल होने के लिए कोई स्पष्ट अनुमति या समय नहीं दिया गया है.
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को इस तरह रोकना उचित नहीं है.
“विपक्ष का दायित्व है सकारात्मक भूमिका निभाना”
जीतू पटवारी ने कहा कि विपक्ष का काम केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि सरकार को सुझाव देना और समाज के विकास में सहयोग करना भी है.
उन्होंने कहा,
“हम कृषि मेले में जाकर नई तकनीकों को समझना चाहते हैं, ताकि किसानों की आय बढ़े और उत्पादन में सुधार हो सके. यह हमारा दायित्व है कि हम किसानों के बीच जागरूकता फैलाएं.”
कृषि कल्याण वर्ष’ पर उठे बड़े सवाल
पटवारी ने सरकार के ‘कृषि कल्याण वर्ष’ अभियान पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जब सरकार किसानों के कल्याण की बात कर रही है, तो फिर एक किसान के बेटे को ही कृषि मेले में जाने से क्यों रोका जा रहा है.
उन्होंने इसे सरकार की नीयत और नीतियों पर बड़ा सवाल बताते हुए कहा कि इससे किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर संदेह पैदा होता है.
राजनीति में बढ़ सकती है गर्मी
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है. कांग्रेस इस मुद्दे को किसानों के हितों से जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति बना सकती है, वहीं सरकार की ओर से भी जल्द प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है.
कृषि जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह का विवाद आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है.
निष्कर्ष
भोपाल से उठी यह सियासी बहस अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है. जीतू पटवारी के आरोपों ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जबकि प्रशासनिक पक्ष का जवाब अभी सामने आना बाकी है.
अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है और क्या पटवारी को कृषि मेले में शामिल होने की अनुमति मिलती है या नहीं.
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