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अंकिता भंडारी हत्याकांड: अंकिता भंडारी हत्याकांड 2022 का पूरा विवरण पढ़ें। वनंतरा रिज़ॉर्ट, आरोपियों की गिरफ्तारी, पोस्टमार्टम, बुलडोज़र विवाद, SIT जांच और ताज़ा कानूनी अपडेट.
अंकिता भंडारी हत्याकांड: पूरा मामला, जांच और ताज़ा अपडेट
अंकिता भंडारी (11 नवंबर 2003 – 18 सितंबर 2022) उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की एक 19 वर्षीय युवती थीं, जो ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं. सितंबर 2022 में उनका रहस्यमयी ढंग से लापता होना और बाद में हत्या का खुलासा पूरे देश में आक्रोश और बहस का कारण बना. इस मामले को इसलिए भी व्यापक राष्ट्रीय ध्यान मिला क्योंकि इसमें राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के आरोप लगे और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे.
पृष्ठभूमि
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के दोभ-श्रीकोट गांव की रहने वाली थीं. उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद देहरादून से होटल मैनेजमेंट में छह महीने का डिप्लोमा किया. इसके बाद 28 अगस्त 2022 को उन्होंने वनंतरा रिज़ॉर्ट, ऋषिकेश में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम शुरू किया.
अंकिता का जम्मू निवासी पुष्प दीप कुमार से संपर्क था, जिनसे उनकी मुलाकात ऑनलाइन हुई थी. नौकरी शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद अंकिता ने अपने करीबियों को बताया था कि रिज़ॉर्ट में उसे मानसिक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.
उत्पीड़न और “वीआईपी” विवाद
जांच के दौरान सामने आया कि अंकिता पर एक कथित “वीआईपी” को ₹10,000 के बदले “अतिरिक्त सेवाएं” देने का दबाव बनाया जा रहा था. अंकिता ने इसका विरोध किया, जिसके बाद रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य से उसकी कहासुनी हुई। यही विवाद आगे चलकर उसकी मौत का कारण बना.
लापता होने से हत्या तक
18 सितंबर 2022 को अंकिता ने अपने माता-पिता की कॉल का जवाब नहीं दिया. परिवार जब रिज़ॉर्ट पहुंचा तो अंकिता अपने कमरे में नहीं मिली. उसी दिन उसने पुष्प दीप कुमार की कॉल का भी जवाब नहीं दिया, जिससे शक और गहराता गया.
अंकिता के पिता ने राजस्व थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती दो दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. बाद में मामला लक्ष्मण झूला पुलिस को सौंपा गया.
आरोपी और कबूलनामा
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया:
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पुलकित आर्य – वनंतरा रिज़ॉर्ट का मालिक
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अंकित गुप्ता – रिज़ॉर्ट का सहायक प्रबंधक
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सौरभ भास्कर – रिज़ॉर्ट का मैनेजर
पूछताछ के दौरान तीनों ने अपराध स्वीकार किया. उनके अनुसार, पुलकित और अंकिता के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद वे उसे कार में बैठाकर ले गए. रास्ते में विवाद बढ़ा और अंकिता को धक्का देकर चिल्ला नहर में फेंक दिया गया. इसके बाद वे रिज़ॉर्ट लौट आए और कर्मचारियों को झूठी कहानी बताई.
शव की बरामदगी और पोस्टमॉर्टम
24 सितंबर 2022 को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने अंकिता का शव चिल्ला नहर के बैराज से बरामद किया. एम्स ऋषिकेश में हुए पोस्टमॉर्टम में बताया गया कि अंकिता के शरीर पर चोटों के निशान थे, जो मृत्यु से पहले कुंद वस्तु से आघात की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया.
हालांकि, अंकिता के परिवार ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर असंतोष जताया और अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया. उनका आरोप था कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है.
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बुलडोज़र कार्रवाई और विवाद
मामले के सामने आते ही वनंतरा रिज़ॉर्ट पर बुलडोज़र चलाया गया और उसमें आग लगने से भारी नुकसान हुआ. शुरुआत में इसे “त्वरित न्याय” की कार्रवाई बताया गया, लेकिन बाद में जिला प्रशासन ने सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया.
परिवार और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि रिज़ॉर्ट को गिराकर अहम सबूत नष्ट कर दिए गए.
जांच, SIT और चार्जशीट
पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. वहीं, अंकिता के पिता और स्थानीय लोगों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख किया.
दिसंबर 2022 में पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ लगभग 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें अपहरण और हत्या के आरोप शामिल हैं.
नया अपडेट: JCB चालक का बयान
22 दिसंबर को अंकिता भंडारी के पिता ने मीडिया को बताया कि रिज़ॉर्ट पर JCB चलाने वाले चालक दीपक ने ADJ कोटद्वार कोर्ट में बयान दिया है. उसके अनुसार, उसे JCB चलाने का आदेश यमकेश्वर से भाजपा विधायक रेनू बिष्ट और एसडीएम द्वारा दिया गया था.
इस बयान के बाद बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दबाव और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप और गहरे हो गए हैं.
अंतिम संस्कार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कई अपीलों के बाद 25 सितंबर 2022 को अंकिता का अंतिम संस्कार श्रीनगर (गढ़वाल) के एनआईटी घाट पर किया गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा का आश्वासन दिया. पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और कई अन्य नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया.
निष्कर्ष
अंकिता भंडारी हत्याकांड सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और महिला सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है. आज भी यह मामला न्याय प्रणाली की निष्पक्षता और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है. देश की नजरें अब अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं—क्या अंकिता को सच में न्याय मिलेगा?