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डिजिटल जनगणना: ऐप से होगी पहचान

डिजिटल जनगणना: ऐप से होगी पहचान

डिजिटल जनगणना: ऐप से होगी पहचान


डिजिटल जनगणना: भारत में डिजिटल जनगणना की तारीख तय हो गई है. अब कागज नहीं, मोबाइल ऐप से होगी आपकी पहचान. जानिए नई जनगणना की प्रक्रिया, फायदे, डेटा सुरक्षा और सरकार की तैयारियां.

आ गई जनगणना की तारीख, अब कागजों से नहीं ऐप से होगी आपकी पहचान

भारत में जनगणना को लेकर बड़ी और ऐतिहासिक पहल की जा रही है। दशकों से कागजी फॉर्म और रजिस्टरों के जरिए होने वाली जनगणना अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाली जनगणना में मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा. इसका उद्देश्य प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और ज्यादा सटीक बनाना है.

डिजिटल जनगणना न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव लाएगी, बल्कि आम नागरिकों की पहचान, सरकारी योजनाओं और नीति निर्माण को भी नई दिशा देगी.

क्या है डिजिटल जनगणना?

डिजिटल जनगणना वह प्रक्रिया है, जिसमें जनगणना से जुड़ा पूरा डेटा मोबाइल ऐप, टैबलेट और ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से एकत्र किया जाएगा. इसमें गणनाकर्मी (Enumerator) घर-घर जाकर मोबाइल डिवाइस के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे.

इस बार कागजी फॉर्म भरने, बाद में डेटा एंट्री और गलती सुधार जैसी लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा.

कब होगी अगली जनगणना?

सरकार की तैयारियों के अनुसार अगली जनगणना पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में कराई जाएगी. इसकी अधिसूचना और चरणबद्ध कार्यक्रम तय किया जा चुका है.
जनगणना को दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा:

  1. मकान सूचीकरण और आवास गणना

  2. जनसंख्या गणना

इन दोनों चरणों में ऐप आधारित डेटा कलेक्शन किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी.

कैसे काम करेगा जनगणना ऐप?

डिजिटल जनगणना के लिए खासतौर पर तैयार किया गया मोबाइल ऐप निम्नलिखित तरीके से काम करेगा:

  • गणनाकर्मी को सरकार द्वारा अधिकृत लॉगिन मिलेगा

  • घर-घर जाकर नागरिकों की जानकारी ऐप में दर्ज की जाएगी

  • डेटा सीधे सुरक्षित सरकारी सर्वर पर अपलोड होगा

  • लोकेशन टैगिंग से फर्जी एंट्री की संभावना कम होगी

  • गलतियों को तुरंत सुधारा जा सकेगा

इससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा सटीक और भरोसेमंद बनेगी.

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कौन-कौन सी जानकारी ली जाएगी?

डिजिटल होने के बावजूद जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों का दायरा लगभग वही रहेगा, जैसे:

  • परिवार के सदस्यों की संख्या

  • उम्र, लिंग और शिक्षा

  • रोजगार और आजीविका

  • आवास की स्थिति

  • बुनियादी सुविधाएं

हालांकि, डेटा संग्रह का तरीका आधुनिक और तकनीक आधारित होगा.

डेटा सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम?

डिजिटल जनगणना में सबसे बड़ा सवाल डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा का है। सरकार ने इस पर खास जोर दिया है.

  • डेटा एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग

  • केवल अधिकृत कर्मचारियों को एक्सेस

  • किसी भी निजी जानकारी का व्यावसायिक उपयोग नहीं

  • कानून के तहत डेटा संरक्षण

सरकार का दावा है कि नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और केवल सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए इस्तेमाल होगी.

डिजिटल जनगणना के बड़े फायदे

1. समय और लागत की बचत

कागज, छपाई और मैनुअल डेटा एंट्री पर होने वाला खर्च बचेगा.

2. ज्यादा सटीक आंकड़े

टाइपिंग और एंट्री की गलतियां कम होंगी.

3. पारदर्शिता

डेटा सीधे सिस्टम में जाने से हेरफेर की गुंजाइश घटेगी.

4. बेहतर योजनाएं

सटीक आंकड़ों से सरकार योजनाओं को सही जरूरतमंदों तक पहुंचा सकेगी.

5. पर्यावरण संरक्षण

कागज के कम इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा होगा.

आम नागरिकों के लिए क्या बदलेगा?

आम नागरिकों को जनगणना के लिए अब ज्यादा कागजी झंझट नहीं झेलना पड़ेगा. पहचान और जानकारी देना आसान होगा.

हालांकि, नागरिकों को यह ध्यान रखना होगा कि वे सही और पूरी जानकारी दें, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल सके.

भारत के लिए क्यों अहम है डिजिटल जनगणना?

भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में जनगणना नीति निर्माण की रीढ़ होती है.
चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास या सामाजिक योजनाएं – सब कुछ जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर करता है.

डिजिटल जनगणना से भारत डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है.

निष्कर्ष

“अब कागजों से नहीं, ऐप से होगी आपकी पहचान” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. डिजिटल जनगणना से न केवल प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि देश को सटीक और भरोसेमंद आंकड़े भी मिलेंगे.

यह पहल भारत को तकनीक के जरिए ज्यादा सक्षम, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.

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