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Indian Army Parade: भारत गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास | हथियारों की नुमाइश क्यों?

Indian Army Parade: भारत गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास | हथियारों की नुमाइश क्यों?

Indian Army Parade: भारत गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास | हथियारों की नुमाइश क्यों?

Indian Army Parade: हर साल 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जब टैंक गरजते हैं, मिसाइलें सलामी देती हैं और तीनों सेनाओं के जवान कदमताल करते हैं—तो दुनिया देखती है। लेकिन सवाल यही है की क्या ये सिर्फ एक परेड है? या इसके पीछे इतिहास, रणनीति और राजनीति की एक लंबी कहानी छुपी है?

आज हम बताएँगे—

  • परेड की शुरुआत कहां से हुई?
  • भारत हथियारों की नुमाइश क्यों करता है?
  • और क्यों अमेरिका, ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देश इससे दूरी बनाए रखते हैं

परेड का इतिहास: युद्ध से राष्ट्र तक

परेड की जड़ें युद्ध और शक्ति प्रदर्शन से जुड़ी हैं।
रोमन साम्राज्य में विजयी सेनाएँ राजधानी में परेड करती थीं—ताकि जनता को बताया जा सके कि राज्य सुरक्षित है।

ब्रिटिश राज में भी सैन्य परेड का मकसद था—

  • शासक की ताकत दिखाना
  • जनता पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालना

भारत ने इसी परंपरा को आज़ादी के बाद नए अर्थ दिए।


भारत में गणतंत्र दिवस परेड क्यों होती है?

भारत की गणतंत्र दिवस परेड केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र का उत्सव है।

इसके तीन बड़े उद्देश्य हैं:

संविधान की सर्वोच्चता का संदेश

26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना।
परेड उस दिन की याद दिलाती है जब सत्ता राजा से नहीं, संविधान से चलने लगी


राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रदर्शन

भारत एक ऐसा देश है जिसकी सीमाएँ—

  • पाकिस्तान
  • चीन
  • आतंकवाद
    से जुड़ी चुनौतियों से घिरी हैं।

परेड में हथियारों की नुमाइश पड़ोसियों के लिए रणनीतिक संदेश होती है की “भारत कमजोर नहीं है।”


जनता और सेना के बीच भरोसा

जब आम नागरिक टैंक, मिसाइल और जवानों को करीब से देखता है,
तो सेना सिर्फ खबर नहीं, भावना बन जाती है


हथियारों की नुमाइश क्यों ज़रूरी है?

भारत की परेड में अब ज़्यादातर हथियार स्वदेशी होते हैं—

  • अग्नि मिसाइल
  • तेजस फाइटर जेट
  • अर्जुन टैंक

ये संदेश सिर्फ दुश्मनों के लिए नहीं, बल्कि
अपने नागरिकों और दुनिया के रक्षा बाज़ार के लिए भी होता है।

यह बताता है कि भारत अब केवल खरीदार नहीं, निर्माता है।


पश्चिमी देश परेड से क्यों कतराते हैं?

अब सवाल उठता है—
जब भारत, रूस, चीन ऐसा करते हैं,
तो अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस क्यों नहीं?

इसके पीछे 4 बड़े कारण हैं:


1️⃣ सैन्य शक्ति पहले से स्थापित

अमेरिका को दुनिया को यह दिखाने की ज़रूरत नहीं कि वह ताकतवर है।
उसकी ताकत उसके ग्लोबल बेस और युद्ध इतिहास से साबित है।


2️⃣ हथियारों का राजनीतिक विरोध

पश्चिमी देशों में हथियारों की नुमाइश को
– टैक्स की बर्बादी
– युद्ध प्रचार
माना जाता है।

वहाँ जनता सवाल पूछती है—“स्कूल या अस्पताल क्यों नहीं?”


3️⃣ शक्ति का नया तरीका

पश्चिम अब ताकत दिखाता है—

  • टेक्नोलॉजी
  • इकोनॉमी
  • डिप्लोमेसी से, न कि सड़कों पर टैंकों से।

4️⃣ ऐतिहासिक अपराधबोध

औपनिवेशिक इतिहास के कारण पश्चिमी देश अब खुले सैन्य प्रदर्शन से बचते हैं— ताकि “आक्रामक राष्ट्र” की छवि न बने।


भारत और पश्चिम का फर्क क्या है?

भारत पश्चिमी देश
परेड = लोकतंत्र + सुरक्षा परेड = शक्ति प्रदर्शन
पड़ोसी खतरे वैश्विक प्रभुत्व
जनता को भरोसा जनता से जवाबदेही

क्या परेड सिर्फ दिखावा है?

नहीं। भारत के लिए परेड है—

  • इतिहास की याद
  • वर्तमान की चेतावनी
  • भविष्य का संकेत

यह सिर्फ हथियार नहीं दिखाती, यह बताती है कि लोकतंत्र सुरक्षित हाथों में है।


निष्कर्ष: परेड एक संदेश है

जब भारत परेड करता है, वह दुनिया से कहता है—

“हम शांति चाहते हैं,
लेकिन कमजोरी नहीं।”

और शायद यही कारण है कि भारत की परेड आज भी जरूरी है और पश्चिम की नहीं।