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Toggleमध्य प्रदेश: लाड़ली बहना योजना की राशि रुकी, सड़कों पर उतरी महिलाएं
मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना की राशि समय पर न मिलने से महिलाएं परेशान हैं. कई जिलों में लाभार्थी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही हैं। जानिए पूरा मामला, सरकार का पक्ष और महिलाओं की मांगें.
लाड़ली बहना योजना की राशि बंद, बढ़ी महिलाओं की परेशानी
मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह सकारात्मक नहीं बल्कि चिंता बढ़ाने वाली है. राज्य के कई जिलों में योजना की मासिक राशि समय पर खातों में न पहुंचने से लाखों महिलाएं परेशान हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि नाराज लाभार्थी महिलाएं अब सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही हैं और सरकार से जवाब मांग रही हैं.
लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक निश्चित राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है. लेकिन हाल के महीनों में भुगतान में देरी या राशि न आने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं.
कई जिलों में प्रदर्शन, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
प्रदेश के इंदौर, भोपाल, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा और ग्वालियर समेत कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय, तहसील परिसर और प्रमुख सड़कों पर धरना-प्रदर्शन किया. हाथों में तख्तियां लिए महिलाएं “राशि दो, जवाब दो” जैसे नारे लगाती नजर आईं.
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि लाड़ली बहना योजना की राशि उनके घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद जरूरी है. अचानक भुगतान रुकने से उनका घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया है.
लाभार्थियों का दर्द: “योजना पर ही टिकी थी उम्मीद”
प्रदर्शन में शामिल कई महिलाओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे मजदूरी, छोटे काम या सीमित आय पर निर्भर हैं. लाड़ली बहना योजना की राशि उनके लिए आर्थिक संबल थी.
एक महिला लाभार्थी ने कहा,
“सरकार ने कहा था कि हर महीने पैसा आएगा, इसी भरोसे हमने कर्ज लिए, बच्चों का दाखिला कराया. अब जब पैसे नहीं आ रहे तो घर चलाना मुश्किल हो गया है.”
कई महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वे बार-बार बैंक और पंचायत के चक्कर काट रही हैं, लेकिन कहीं से स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा.
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भुगतान रुकने के पीछे क्या वजह?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राशि न आने के पीछे तकनीकी खामियां, केवाईसी अपडेट न होना, आधार-बैंक लिंकिंग में गड़बड़ी और कुछ मामलों में पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया को वजह बताया जा रहा है. हालांकि, महिलाओं का कहना है कि उन्होंने पहले ही सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे और पहले नियमित रूप से राशि मिलती रही है, फिर अचानक भुगतान क्यों रुका—इसका जवाब कोई नहीं दे रहा.
कुछ जिलों में अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि डेटा अपडेट और बजट आवंटन से जुड़ी प्रक्रियाओं में देरी के कारण भुगतान प्रभावित हुआ है.
विपक्ष का हमला, सरकार से सवाल
लाड़ली बहना योजना की राशि को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर हमला तेज कर दिया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनावी वादों को पूरा करने में असफल हो रही है और महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर योजना जारी है तो राशि समय पर क्यों नहीं दी जा रही, और अगर कोई बदलाव किया गया है तो सरकार को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देनी चाहिए.
सरकार और प्रशासन का पक्ष
सरकार की ओर से यह कहा गया है कि लाड़ली बहना योजना बंद नहीं की गई है और न ही किसी लाभार्थी का पैसा रोका गया है. अधिकारियों के अनुसार, जिन महिलाओं को राशि नहीं मिली है, उनके मामलों की जांच की जा रही है और जल्द ही भुगतान बहाल किया जाएगा.
प्रशासन ने महिलाओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अपनी शिकायतें आधिकारिक पोर्टल, पंचायत या जिला कार्यालय में दर्ज कराएं. सरकार का दावा है कि तकनीकी समस्याएं दूर होते ही लंबित राशि खातों में भेज दी जाएगी.
सवालों के घेरे में व्यवस्था
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक पैसा खातों में नहीं पहुंचता, तब तक महिलाओं की परेशानी कम नहीं होने वाली. लगातार हो रहे प्रदर्शनों से यह साफ है कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी योजना में अगर भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता नहीं होगी, तो असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है. सरकार को चाहिए कि वह न केवल भुगतान सुनिश्चित करे, बल्कि महिलाओं को सही जानकारी भी समय पर दे.
आगे क्या?
फिलहाल, लाड़ली बहना योजना की राशि को लेकर प्रदेशभर में माहौल गर्म है. महिलाएं साफ कह रही हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और प्रशासन कितनी जल्दी इस संकट का समाधान निकाल पाते हैं और क्या वाकई सभी पात्र महिलाओं को उनकी लंबित राशि समय पर मिल पाती है या नहीं.
लाड़ली बहना योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जाती रही है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसकी कार्यान्वयन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.