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TogglePrakhar Vishwakarma: अमेरिकी मंच पर युवा वैज्ञानिक को निमंत्रण
Prakhar Vishwakarma: बंसल इंस्टिट्यूट भोपाल के छात्र और युवा मिसाइल मैन प्रखर विश्वकर्मा को अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी द्वारा ग्लोबल फिजिक्स समिट 2026, डेनवर (अमेरिका) में शामिल होने का विशेष निमंत्रण मिला. जानिए उनके अंतरिक्ष शोध, रक्षा नवाचार और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की पूरी कहानी.
भारत के युवा वैज्ञानिक की वैश्विक उड़ान
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के पलेरा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले युवा अंतरिक्ष शोधकर्ता प्रखर विश्वकर्मा आज भारत के वैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. एयरोस्पेस और डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी असाधारण उपलब्धियों के कारण उन्हें दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था American Physical Society (APS) द्वारा अमेरिका के डेनवर में आयोजित ग्लोबल फिजिक्स समिट 2026 में शामिल होने का विशेष निमंत्रण प्राप्त हुआ है.
15 से 20 मार्च 2026 तक आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 13,000 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता भाग लेंगे. ऐसे मंच पर मध्य प्रदेश के एक युवा का चयन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है.
बंसल इंस्टिट्यूट भोपाल से वैश्विक पहचान तक
प्रखर विश्वकर्मा वर्तमान में Bansal Group of Institutes, भोपाल से बी.टेक की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन्स प्राप्त कर तकनीकी उत्कृष्टता का प्रमाण दिया. उनकी विशेषज्ञता एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट डिजाइनिंग में मानी जाती है.
छात्र जीवन में ही 30 से अधिक देशों की स्पेस और डिफेंस एजेंसियों के लिए रॉकेट, ड्रोन और सैटेलाइट सिस्टम डिजाइन करना उनकी असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है. यही कारण है कि उन्हें “युवा मिसाइल मैन” के नाम से जाना जाने लगा है.
प्रोजेक्ट RAM: रक्षा तकनीक में क्रांतिकारी पहल
प्रखर विश्वकर्मा द्वारा विकसित प्रोजेक्ट RAM (Relaunch Automatic Missile) रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक अभिनव अवधारणा है. यह एक ऐसी उन्नत मिसाइल प्रणाली है जो:
- अत्यधिक सटीकता से लक्ष्य भेद सकती है
- मिशन पूरा होने के बाद सुरक्षित रूप से अपने बेस पर वापस लौट सकती है
- पुनः उपयोग (Reusable Technology) के सिद्धांत पर आधारित है
इस अभिनव तकनीक को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सराहना मिली है, जिनमें Vikram Sarabhai Space Centre और Nehru Science Centre शामिल हैं. रक्षा क्षेत्र में इस तरह की रीयूजेबल मिसाइल प्रणाली भविष्य की सैन्य रणनीतियों को नई दिशा दे सकती है.जर्मनी से अमेरिका तक: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान
अमेरिका में होने वाले इस सम्मेलन से पहले प्रखर को जर्मनी में आयोजित International Space Expo में भी आमंत्रित किया जा चुका है. वहां उनके प्रस्तुत किए गए प्रोजेक्ट्स और रिसर्च को वैश्विक विशेषज्ञों ने सराहा.
अब ग्लोबल फिजिक्स समिट 2026 में भाग लेना उनके वैज्ञानिक करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है. यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है.इसरो स्पेस ट्यूटर: भविष्य के वैज्ञानिक तैयार करने का मिशन
प्रखर विश्वकर्मा केवल एक शोधकर्ता ही नहीं, बल्कि एक समर्पित शिक्षक भी हैं. वे Indian Space Research Organisation (ISRO) के पंजीकृत “स्पेस ट्यूटर” के रूप में कार्य कर रहे हैं.
वे प्रतिदिन लगभग 600 से 700 बच्चों को खगोल विज्ञान और रॉकेट विज्ञान की शिक्षा प्रदान करते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म और वर्चुअल क्लासरूम के माध्यम से वे देशभर के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियों से परिचित करा रहे हैं.
उनका मानना है कि “यदि बच्चों को सही दिशा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिया जाए, तो भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकता है.सम्मान और उपलब्धियां
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इंटरनेशनल आइकॉन अवॉर्ड 2025
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपलब्धियों के लिए विश्व रिकॉर्ड संस्था द्वारा सम्मानित.
NASA Scientist for a Day
यूरेनस के चंद्रमा पर अनुसंधान के लिए चयनित.
इन उपलब्धियों ने उन्हें न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित युवा वैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया है.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में युवा शक्ति
प्रखर विश्वकर्मा का स्पष्ट लक्ष्य है—भारत को रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना। उनका कहना है:
“यह निमंत्रण केवल मेरी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी भारतीय युवाओं का सम्मान है जो विज्ञान के माध्यम से देश की सेवा करना चाहते हैं.
उनकी सोच “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा को वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है. वे मानते हैं कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है, जिसे सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो वे वैश्विक नेतृत्व कर सकते हैं.
मध्य प्रदेश से वैश्विक मंच तक: प्रेरणा की कहानी
टीकमगढ़ जैसे छोटे शहर से निकलकर अमेरिका के डेनवर में होने वाले वैश्विक सम्मेलन तक पहुंचना यह दर्शाता है कि प्रतिभा स्थान की मोहताज नहीं होती। यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं.
प्रखर विश्वकर्मा ने यह सिद्ध कर दिया है कि:
- शिक्षा और समर्पण सफलता की कुंजी हैं
- नवाचार से राष्ट्र की दिशा बदली जा सकती है
- युवा शक्ति ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है
निष्कर्ष
ग्लोबल फिजिक्स समिट 2026 में प्रखर विश्वकर्मा की भागीदारी केवल एक आमंत्रण नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक है. यह उपलब्धि देश के युवाओं को यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो विश्व मंच पर पहचान बनाना संभव है.
प्रखर विश्वकर्मा आज केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक प्रेरणा हैं—एक ऐसी प्रेरणा जो भारत को अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है.
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