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ToggleRewa news: बीएड परीक्षा में रिश्वत के आरोप, APSU टीम जांच के घेरे में
Rewa news: रीवा के APSU से जुड़ी बीएड परीक्षा में पैसों की मांग का मामला सामने आया है. जांच शुरू, दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी.
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) एक बार फिर विवादों में घिर गया है. इस बार मामला बीएड की एक्सटर्नल परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें परीक्षा लेने गई विश्वविद्यालय की टीम पर गंभीर आरोप लगे हैं. इस घटना ने न केवल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी चिंता बढ़ा दी है.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 को सीधी शिक्षा महाविद्यालय में बीएड एक्सटर्नल परीक्षा आयोजित की गई थी. इस परीक्षा को संपन्न कराने के लिए APSU की तीन सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची थी. इस टीम में डॉ. अरदेन्दु रंजन मिश्रा, डॉ. अरुण पांडेय और डॉ. शोभारानी दुबे शामिल थे.
महाविद्यालय प्रबंधन का आरोप है कि परीक्षा के दौरान टीम के सदस्यों ने प्रति विद्यार्थी 15 हजार रुपये की मांग की. यह आरोप बेहद गंभीर है क्योंकि यह सीधे तौर पर परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को प्रभावित करता है.
कॉलेज प्रबंधन का दावा
महाविद्यालय के प्रबंधन ने बताया कि उन्होंने टीम की मांग के अनुसार पूरी राशि देने में असमर्थता जताई. इसके बाद आपसी बातचीत के बाद 7 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी के हिसाब से भुगतान किया गया. हालांकि, यह भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी जहां भुगतान की बात सामने आई.
प्रबंधन का यह भी आरोप है कि पूरी राशि न मिलने से नाराज होकर टीम के एक सदस्य, डॉ. अरदेन्दु रंजन मिश्रा ने कथित तौर पर पहले से भरे गए परीक्षा फॉर्मेट को फाड़ दिया. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न केवल अनुशासनहीनता बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी माना जाएगा.
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महाविद्यालय के प्राचार्य ने विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव को लिखित शिकायत भेजी है. शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.
रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि शिकायत को संज्ञान में लिया गया है और इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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छात्रों और अभिभावकों में चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता का माहौल है. बीएड जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में इस तरह के आरोप सामने आना शिक्षा व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. छात्रों का कहना है कि वे मेहनत से परीक्षा देते हैं, लेकिन अगर इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो उनका भविष्य असुरक्षित महसूस होता है.
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक कॉलेज या एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करता है. यदि परीक्षा लेने वाली टीम ही इस तरह के आरोपों में घिर जाए, तो निष्पक्ष मूल्यांकन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है. विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे अपनी परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
आगे क्या?
फिलहाल, इस मामले की जांच शुरू हो चुकी है और सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या वास्तव में आरोप सही साबित होते हैं.
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है. वहीं, यदि आरोप गलत साबित होते हैं, तो भी इस पूरे मामले ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब देना विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए जरूरी हो जाएगा.
निष्कर्ष
रीवा के APSU से जुड़ा यह मामला शिक्षा जगत के लिए एक चेतावनी है. यह दिखाता है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है.
अब जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले, ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.
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