Table of Contents
ToggleToll Tax Rule Change: अधूरे एक्सप्रेस-वे पर अब पूरा टोल नहीं देना होगा
टोल नियम: Toll Tax Rule Change के तहत अब अधूरे या आधे बने एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों से पूरा टोल नहीं वसूला जाएगा. जानिए नए नियम, शर्तें और आम जनता को मिलने वाला फायदा.
आम यात्रियों को बड़ी राहत
हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वालों के लिए सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. अब अगर कोई एक्सप्रेस-वे या राष्ट्रीय राजमार्ग अधूरा है, तो उस पर यात्रियों से पूरा टोल टैक्स वसूलना गलत माना जाएगा.
यह नया नियम लंबे समय से उठ रही शिकायतों के बाद लाया गया है, जिसमें लोग अधूरी सड़क, डायवर्जन, खराब लेन और निर्माण कार्य के बावजूद पूरा टोल देने को मजबूर थे.
क्या है नया टोल टैक्स नियम?
नए Toll Tax Rule Change के अनुसार:
-
यदि एक्सप्रेस-वे या हाईवे पूरी तरह तैयार नहीं है
-
यदि सड़क पर निर्माण कार्य जारी है
-
यदि सभी लेन चालू नहीं हैं
-
यदि सुरक्षा मानक पूरे नहीं होते
तो ऐसी स्थिति में यात्रियों से पूरा टोल टैक्स नहीं लिया जा सकता.
यह नियम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत लागू किया गया है.
अधूरा एक्सप्रेस-वे किसे माना जाएगा?
नियमों के मुताबिक, कोई भी सड़क या एक्सप्रेस-वे तब अधूरा माना जाएगा जब:
-
सभी निर्धारित लेन चालू न हों
-
सर्विस रोड तैयार न हो
-
पुल, अंडरपास या फ्लाईओवर अधूरे हों
-
बार-बार ट्रैफिक डायवर्जन लगाया गया हो
-
सड़क की गति सीमा घटाई गई हो
ऐसी स्थिति में टोल वसूली या तो कम की जाएगी या पूरी तरह रोकी जाएगी.
टोल में कितनी कटौती होगी?
NHAI के नियमों के अनुसार:
-
यदि सड़क का 75% से कम हिस्सा चालू है → टोल में भारी कटौती
-
यदि निर्माण कार्य चल रहा है → आंशिक टोल
-
यदि सड़क पूरी तरह मानकों पर खरी नहीं उतरती → शून्य टोल (Zero Toll)
इसका सीधा फायदा आम वाहन चालकों, ट्रांसपोर्टरों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा.
यह भी पढ़ें-S-400 सौदा: रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीद को मंजूरी
आम जनता को क्या फायदा होगा?
यह फैसला यात्रियों के लिए कई तरह से राहत लेकर आया है:
-
अधूरी सड़क पर पूरा पैसा नहीं देना पड़ेगा
-
सफर की लागत कम होगी
-
समय और ईंधन की बर्बादी का मुआवज़ा मिलेगा
-
टोल प्लाज़ा पर मनमानी वसूली रुकेगी
लंबे समय से लोग सवाल उठा रहे थे कि जब सुविधा अधूरी है, तो शुल्क पूरा क्यों?
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को राहत
ट्रक, बस और कमर्शियल वाहनों के लिए यह नियम बेहद अहम है। अधूरे एक्सप्रेस-वे पर:
-
वाहनों की रफ्तार कम होती है
-
ईंधन की खपत बढ़ती है
-
डिलीवरी में देरी होती है
अब टोल में कटौती से परिवहन लागत घटेगी, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है.
सरकार का क्या कहना है?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि:
“टोल टैक्स सुविधा के बदले लिया जाता है। यदि सुविधा पूरी नहीं है, तो पूरा शुल्क लेना अनुचित है.”
सरकार का उद्देश्य है:
-
पारदर्शिता बढ़ाना
-
यात्रियों का भरोसा जीतना
-
ठेकेदारों पर गुणवत्ता का दबाव बनाना
ठेकेदारों पर बढ़ेगी जवाबदेही
नए नियमों से सड़क निर्माण कंपनियों पर भी असर पड़ेगा:
-
समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव
-
घटिया काम पर आर्थिक नुकसान
-
देरी होने पर टोल वसूली रुक सकती है
इससे इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है.
अगर फिर भी पूरा टोल वसूला जाए तो क्या करें?
यदि किसी अधूरे एक्सप्रेस-वे पर पूरा टोल लिया जा रहा है, तो आप:
-
NHAI की हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकते हैं
-
टोल प्लाज़ा पर मौजूद शिकायत रजिस्टर में एंट्री करा सकते हैं
-
FASTag ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं
यात्री का अधिकार है कि वह सुविधा के अनुसार ही शुल्क दे.
आगे क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम के बाद:
-
टोल नीति ज्यादा उपभोक्ता-हितैषी बनेगी
-
सड़क निर्माण की रफ्तार बढ़ेगी
-
फर्जी या जल्दबाज़ी में चालू किए गए प्रोजेक्ट कम होंगे
यह फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
निष्कर्ष
Toll Tax Rule Change आम जनता के हित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है. अब अधूरे या आधे-अधूरे एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों को मजबूरी में पूरा टोल नहीं देना पड़ेगा. यह नियम न केवल यात्रियों को राहत देगा, बल्कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही भी तय करेगा.
यह भी पढ़ें- बांग्लादेश चुनाव: BNP की जीत से बदली सियासी तस्वीर