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UPSC 2026 नया नियम: सेवा में रहते रैंक सुधार का रास्ता लगभग बंद!

UPSC 2026 नया नियम: सेवा में रहते रैंक सुधार का रास्ता लगभग बंद!

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UPSC 2026 नया नियम: सेवा में रहते रैंक सुधार का रास्ता लगभग बंद!

UPSC 2026 नया नियम: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को लेकर वर्ष 2026 से एक बड़ा और दूरगामी बदलाव लागू होने जा रहा है. नए नियमों के तहत अब IAS, IPS, IFS या अन्य अखिल भारतीय सेवाओं में चयनित अधिकारी सेवा में रहते हुए रैंक सुधार या मनपसंद सेवा प्राप्त करने के लिए केवल एक अतिरिक्त प्रयास ही कर सकेंगे.

अब तक प्रचलित “बार-बार प्रयास” की रणनीति पर UPSC ने स्पष्ट रूप से लगाम लगाने का संकेत दिया है. यह बदलाव न केवल लाखों नए UPSC अभ्यर्थियों को प्रभावित करेगा, बल्कि पहले से चयनित अधिकारियों की तैयारी और करियर रणनीति को भी पूरी तरह बदल देगा.

UPSC सेवा में रहते रैंक सुधार पर नई पाबंदी

पिछले कई वर्षों से UPSC सिविल सेवा परीक्षा में यह देखने को मिलता रहा है कि कुछ उम्मीदवार पहले चयन को “स्टेप-1” मानते थे. IAS, IPS या किसी अन्य सेवा में चयन के बाद वे दोबारा परीक्षा देकर बेहतर रैंक, पसंदीदा कैडर या शीर्ष सेवा (जैसे IAS या IFS) पाने की कोशिश करते थे.

कई मामलों में अधिकारी तीन से चार बार तक सिविल सेवा परीक्षा देते रहे. इससे एक तरफ अनुभव का लाभ मिलता था, लेकिन दूसरी ओर यह व्यवस्था नए उम्मीदवारों के लिए प्रतिस्पर्धा को और कठिन बना रही थी.

UPSC 2026 से इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह नया नियम लागू किया जा रहा है.

अब तक क्या थी व्यवस्था

अब तक UPSC के नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था जो चयन के बाद प्रयासों की संख्या को सीमित करता हो। व्यवस्था इस प्रकार थी:

  • उम्मीदवार अपनी आयु सीमा और कुल प्रयास सीमा के भीतर

  • चयन के बाद भी

  • बार-बार सिविल सेवा परीक्षा दे सकता था

इसका परिणाम यह हुआ कि कई अनुभवी और पहले से चयनित अधिकारी दोबारा परीक्षा में शामिल होते रहे, जिससे नए अभ्यर्थियों के लिए टॉप रैंक तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया.

सरकार और UPSC ने यह फैसला क्यों लिया

सरकार और UPSC, दोनों स्तरों पर यह महसूस किया गया कि यह व्यवस्था दीर्घकाल में प्रशासनिक प्रणाली के लिए नुकसानदायक है. इसके पीछे प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:

1. प्रशासनिक स्थिरता की कमी

चयन के बाद भी अधिकारी दोबारा परीक्षा की तैयारी में लग जाते थे, जिससे प्रशिक्षण और फील्ड पोस्टिंग पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते थे.

2. सेवा के प्रति प्रतिबद्धता पर असर

एक बार चयन के बाद अधिकारी का प्राथमिक फोकस प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर होना चाहिए, न कि अगली UPSC परीक्षा पर.

3. नई प्रतिभाओं के अवसर सीमित होना

UPSC 2026 नया नियम: सेवा में रहते रैंक सुधार पर रोक
UPSC 2026 नया नियम: सेवा में रहते रैंक सुधार पर रोक

बार-बार वही अनुभवी उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होते रहे, जिससे फ्रेशर्स के लिए अवसर कम हो रहे थे.

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4. परीक्षा की मूल भावना पर असर

UPSC केवल चयन का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा है. इसे “ट्रायल सिस्टम” बनते देख आयोग ने हस्तक्षेप जरूरी समझा.

UPSC 2026 नए नियम में क्या बदला

UPSC के प्रस्तावित आंतरिक दिशानिर्देशों के अनुसार:

  • चयनित अधिकारी सिर्फ एक बार रैंक सुधार के लिए परीक्षा दे सकेगा

  • दूसरा या तीसरा अतिरिक्त प्रयास अनुमति योग्य नहीं होगा

  • यह नियम IAS, IPS, IFS सहित सभी अखिल भारतीय सेवाओं पर लागू होगा

  • नियम 2026 से चयनित बैच पर प्रभावी होगा

हालांकि, 2025 या उससे पहले चयनित अधिकारियों को पुराने नियमों के तहत आंशिक राहत मिल सकती है. इस संबंध में अंतिम स्थिति आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट की जाएगी.

किन अधिकारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

इस फैसले का सीधा प्रभाव उन अधिकारियों पर पड़ेगा:

  • जिन्होंने “पहले चयन, फिर बेहतर रैंक” की रणनीति बनाई थी

  • जो निचली रैंक पर चयन के बाद दोबारा प्रयास की योजना में थे

  • जो होम कैडर या टॉप सर्विस के लिए बार-बार परीक्षा देते थे

अब ऐसे उम्मीदवारों को पहले ही प्रयास में अधिक गंभीरता और स्पष्ट लक्ष्य के साथ तैयारी करनी होगी.

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नए UPSC अभ्यर्थियों के लिए क्या बदलेगा

नए उम्मीदवारों के लिए यह नियम काफी हद तक सकारात्मक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • टॉप रैंक पर बार-बार वही चेहरे नहीं दिखेंगे

  • फ्रेशर्स को बेहतर अवसर मिलेंगे

  • प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत संतुलित होगी

  • “Elite Recycling” की प्रवृत्ति में कमी आएगी

इससे UPSC परीक्षा ज्यादा न्यायसंगत और अवसर-आधारित बन सकती है.

सरकार और UPSC का आधिकारिक पक्ष

UPSC से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह फैसला परीक्षा की गरिमा और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी था. सरकार भी चाहती है कि अधिकारी सेवा में आने के बाद पूरे समर्पण के साथ अपने दायित्व निभाएं.

सूत्रों के अनुसार, इस नियम को लेकर विस्तृत अधिसूचना समय पर जारी की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम या गलत व्याख्या की स्थिति न बने.

अभ्यर्थी अब अपनी रणनीति कैसे बनाएं

UPSC 2026 के इस बदलाव के बाद उम्मीदवारों को अपनी तैयारी में कुछ अहम बदलाव करने होंगे:

  • पहली ही कोशिश को “फाइनल अटेम्प्ट” मानकर तैयारी करें

  • सेवा और कैडर प्राथमिकता बेहद सोच-समझकर भरें

  • केवल आधिकारिक UPSC नोटिफिकेशन पर भरोसा करें

  • सोशल मीडिया अफवाहों और अपुष्ट खबरों से दूरी बनाए रखें

निष्कर्ष

UPSC 2026 से लागू होने वाला यह नियम सिविल सेवा परीक्षा की सोच और दिशा दोनों को बदलने वाला है. अब UPSC केवल चयन की परीक्षा नहीं, बल्कि एक निर्णायक अवसर बनता जा रहा है.

यह बदलाव उन उम्मीदवारों के लिए चेतावनी है जो परीक्षा को प्रयोग की तरह लेते थे, और उन अभ्यर्थियों के लिए अवसर है जो पहली ही बार में पूरी तैयारी और प्रतिबद्धता के साथ उतरने को तैयार हैं.

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