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Toggleअमेरिकी कृषि आयात पर 50% शुल्क की मांग, किसान महापंचायत की सरकार से बड़ी अपील
किसान महापंचायत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 50% आयात शुल्क लगाने की मांग उठाई है। बैठक में किसानों की फसल कीमत, MSP गारंटी कानून, ऋण माफी और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
देश के किसानों के हितों की रक्षा को लेकर किसान म हापंचायत ने एक बड़ा मुद्दा उठाया है. संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अमेरिका से आयात होने वाले कृषि उत्पादों पर कम से कम 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाए, ताकि भारतीय किसानों को सस्ती विदेशी कृषि उपज के कारण हो रहे नुकसान से बचाया जा सके.
इस मांग को लेकर 13 मार्च 2026 को राजस्थान के बारां जिले में किसान भवन में किसान महापंचायत जिला कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नरेंद्र चौहान ने की. बैठक में भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई और किसानों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई.
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से भेजा जाएगा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर किसानों की चिंता
बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे भारतीय किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
किसान महापंचायत के प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह ने कहा कि पहले भारतीय कृषि उत्पादों पर अमेरिका में लगभग 3 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता था, जिसे बढ़ाकर अब 18 प्रतिशत कर दिया गया है.
वहीं दूसरी ओर भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों को शून्य प्रतिशत आयात शुल्क पर बेचने की अनुमति मिलने से भारतीय बाजार में सस्ते विदेशी उत्पादों की बाढ़ आ सकती है.
उनके अनुसार इस असंतुलन से भारतीय किसानों की फसलों के दाम गिरने का खतरा बढ़ गया है.
अमेरिकी किसानों को भारी सब्सिडी का मुद्दा
किसान नेताओं ने यह भी बताया कि अमेरिका अपने किसानों को भारी मात्रा में नकद सब्सिडी देता है, जिसके कारण वहां के कृषि उत्पाद बेहद कम लागत में तैयार हो जाते हैं.
इन उत्पादों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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मक्का
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सोयाबीन
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गेहूं
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खाद्य तेल
जब ये उत्पाद भारतीय बाजार में कम कीमत पर पहुंचते हैं तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों की उपज के बाजार भाव पर पड़ता है.
किसान महापंचायत का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है तो भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो सकती है.
MSP से नीचे बिक रही किसानों की उपज
बैठक में यह भी कहा गया कि देश के कई हिस्सों में किसानों की फसलें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बिक रही हैं.
इसके पीछे प्रमुख कारण बताए गए:
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विदेशी कृषि उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा
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बाजार में कीमतों का गिरना
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लागत में लगातार वृद्धि
किसान नेताओं के अनुसार वर्तमान हालात में किसानों को खेती की लागत भी पूरी नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है.
50% आयात शुल्क लगाने की मांग
इन परिस्थितियों को देखते हुए किसान महापंचायत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की कि:
अमेरिका से आयात होने वाले कृषि उत्पादों पर कम से कम 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाए.
संगठन का कहना है कि इससे:
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विदेशी कृषि उत्पादों की अनुचित प्रतिस्पर्धा कम होगी
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भारतीय किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी
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कृषि बाजार में संतुलन बना रहेगा
MSP गारंटी कानून की भी उठी मांग
बैठक में किसानों की एक पुरानी मांग को भी दोहराया गया. संगठन ने सरकार से आग्रह किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए.
किसान नेताओं का कहना है कि यदि MSP गारंटी कानून लागू होता है तो किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की सुरक्षा मिल सकेगी.
इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि:
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किसानों की पूरी फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए
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किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाया जाए
किसानों के फसली ऋण माफ करने की मांग
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि देश के कई किसान राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए कृषि ऋण के बोझ से दबे हुए हैं.
किसान महापंचायत ने मांग की कि:
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किसानों के फसली ऋण माफ किए जाएं
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छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक राहत दी जाए
संगठन का मानना है कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे खेती में फिर से निवेश कर सकेंगे.
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प्राकृतिक आपदा से नुकसान पर मुआवजा देने की मांग
बैठक में वर्ष 2025 की खरीफ फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया.
किसान नेताओं ने कहा कि कई किसानों की फसलें:
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सूखा
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बाढ़
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ओलावृष्टि
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अतिवृष्टि
जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण नष्ट हो गई थीं.
इसलिए सरकार से मांग की गई कि:
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किसानों को मुआवजा तुरंत दिया जाए
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फसल बीमा योजना के क्लेम का जल्द भुगतान किया जाए
जेनेटिक मोडिफाइड बीजों पर प्रतिबंध की मांग
बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा जेनेटिक मोडिफाइड (GM) बीजों का भी उठा.
किसान महापंचायत ने मांग की कि:
देश में GM बीजों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए.
संगठन का कहना है कि इससे:
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पारंपरिक कृषि प्रणाली प्रभावित हो सकती है
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किसानों की बीज निर्भरता बढ़ सकती है
ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे परियोजना पर चिंता
बैठक में किसानों ने ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे परियोजना पर भी चिंता जताई.
किसानों का कहना है कि:
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इस परियोजना के कारण बड़ी मात्रा में कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है
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इससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है
इसलिए संगठन ने मांग की कि:
किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण न किया जाए.
सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की मांग
बैठक में किसानों ने सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी.
उन्होंने सरकार से कहा कि:
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लंबित सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जाए.
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हर खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाए.
किसानों का मानना है कि यदि सिंचाई सुविधाएं मजबूत होंगी तो कृषि उत्पादन भी बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा.
बैठक में कई किसान नेता रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में किसान महापंचायत के कई पदाधिकारी और किसान नेता मौजूद रहे.
इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
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प्रदेश मंत्री मनजिंदर सिंह अटवाल
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जिलाध्यक्ष नरेंद्र चौहान
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संभाग अध्यक्ष बालकिशोर पांचाल
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नगर अध्यक्ष कांतिचंद शर्मा
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जिला उपाध्यक्ष कृष्ण चन्द्र शर्मा खांकरा
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जिला कोषाध्यक्ष हेमराज सुमन
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जिला मंत्री नरेन्द्र सुमन
इसके अलावा विभिन्न विधानसभा और तहसील स्तर के पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए.
सरकार तक पहुंचेगा किसानों का संदेश
बैठक के अंत में किसान महापंचायत ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि किसानों की सभी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार किया जाएगा.
यह ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार को भेजा जाएगा, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द हो सके.
निष्कर्ष
किसान महापंचायत की इस बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय किसान वैश्विक व्यापार नीतियों से सीधे प्रभावित हो रहे हैं. यदि विदेशी कृषि उत्पादों को बिना संतुलित नीति के भारतीय बाजार में प्रवेश दिया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा असर किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
इसलिए किसान संगठनों की मांग है कि सरकार कृषि व्यापार नीति में संतुलन बनाए, किसानों को उचित मूल्य दिलाए और उनकी आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करे.
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