Table of Contents
Toggleमऊगंज: मऊगंज सिविल अस्पताल की हकीकत बुजुर्ग मरीज को थप्पड़
मऊगंज: मऊगंज सिविल अस्पताल में अव्यवस्था, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों से बदसलूकी का मामला सामने आया है. डिप्टी कलेक्टर के औचक निरीक्षण में गंदगी, स्टाफ की कमी और लापरवाही की कई गंभीर खामियां उजागर हुईं.
डॉक्टर नदारद और गंदगी से भरे वार्ड
मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले का सिविल अस्पताल इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और लापरवाही को लेकर सुर्खियों में है. जिस अस्पताल पर हजारों लोगों को बेहतर इलाज देने की जिम्मेदारी है, वहीं अब मरीजों के साथ बदसलूकी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और गंदगी से भरे वार्डों की तस्वीरें सामने आ रही हैं.
हाल ही में डिप्टी कलेक्टर के औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल की बदहाली की जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल में साफ-सफाई की कमी, स्टाफ की लापरवाही और मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार जैसी कई गंभीर समस्याएं उजागर हुईं.
यह भी पढ़ें-बिजली बिल: सीधी में भारी बिजली बिल से हाहाकार, आंदोलन की तैयारी
डिप्टी कलेक्टर के निरीक्षण में खुली अस्पताल की पोल
मऊगंज सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डिप्टी कलेक्टर पवन गोरैया को अस्पताल की वास्तविक स्थिति देखकर हैरानी हुई.
निरीक्षण के दौरान वार्डों में गंदगी का अंबार लगा हुआ मिला. कई मरीजों के बिस्तरों पर चादर तक नहीं थीं और पूरे अस्पताल परिसर में बदबू फैली हुई थी.
अस्पताल की हालत ऐसी दिख रही थी मानो यह कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं बल्कि लंबे समय से उपेक्षा का शिकार एक जर्जर संस्थान हो. मरीजों और उनके परिजनों ने भी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई.
पांच महीने से नहीं मिला वेतन, सफाई कर्मचारी हड़ताल पर
अस्पताल की गंदगी के पीछे एक बड़ा कारण सफाई कर्मचारियों की हड़ताल बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार पिछले लगभग पांच महीनों से सफाई कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला है.
वेतन न मिलने से नाराज कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं, जिसके कारण अस्पताल की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है.
इसके अलावा कई आउटसोर्स कर्मचारी भी महीनों से वेतन न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा.
ओपीडी समय में भी डॉक्टरों की कुर्सियां खाली
निरीक्षण के दौरान सबसे चिंताजनक स्थिति तब सामने आई जब ओपीडी का समय होने के बावजूद कई डॉक्टर अपनी कुर्सियों से नदारद मिले.
मरीज अस्पताल में घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं मिले. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई डॉक्टर सरकारी अस्पताल में कम समय देते हैं और अधिकतर समय निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस करते हैं.
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
अनुभवहीन कर्मचारी को सौंपी गई एक्सरे की जिम्मेदारी
अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है. यहां एक्सरे जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक आउटसोर्स कर्मचारी पुष्पेंद्र पांडे को सौंप दी गई है, जिसके पास एक्सरे संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं बताया जा रहा.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की जिम्मेदारी अनुभवहीन व्यक्ति को देना मरीजों की सेहत के साथ बड़ा जोखिम हो सकता है. इससे जांच रिपोर्ट की सटीकता पर भी सवाल उठ सकते हैं.
यह भी पढ़ें- LPG संकट: भारत की रसोई पर मंडराता नया खतरा!
मरीजों को नहीं मिल रहा पौष्टिक भोजन
सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को पौष्टिक भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराने का प्रावधान होता है, लेकिन मऊगंज सिविल अस्पताल में यह व्यवस्था भी चरमराई हुई नजर आई.
निरीक्षण के दौरान पता चला कि कई मरीजों को निर्धारित भोजन नहीं मिल रहा है. कुछ मरीजों और उनके परिजनों को जमीन पर बैठकर साधारण नाश्ता जैसे समोसे खाकर दिन बिताना पड़ रहा है.
यह स्थिति न केवल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है बल्कि मरीजों के अधिकारों का भी उल्लंघन है.
बुजुर्ग मरीज को डॉक्टर ने मारा थप्पड़
अस्पताल में सबसे शर्मनाक घटना तब सामने आई जब आंख की जांच कराने आए एक बुजुर्ग मरीज के साथ डॉक्टर द्वारा मारपीट की गई.
बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने ओपीडी के दौरान सरेआम बुजुर्ग मरीज को थप्पड़ मार दिया. इस घटना ने अस्पताल की संवेदनशीलता और डॉक्टरों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को अपमान और बदसलूकी का सामना करना पड़ रहा है.
निरीक्षण के बाद फिर पुराने ढर्रे पर लौटी व्यवस्था
हैरानी की बात यह भी सामने आई कि डिप्टी कलेक्टर के निरीक्षण के बाद कुछ समय के लिए अस्पताल में हलचल जरूर दिखाई दी, लेकिन उनके जाते ही स्थिति फिर से पहले जैसी हो गई.
कई कर्मचारी अस्पताल से गायब हो गए और व्यवस्थाएं फिर से ढीली पड़ गईं. इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है.
सीसीटीवी और सार्थक ऐप से खुल सकती है सच्चाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों की लोकेशन को सार्थक ऐप के माध्यम से जांचा जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.
इससे यह भी पता चल सकता है कि डॉक्टर और कर्मचारी वास्तव में अस्पताल में कितनी देर मौजूद रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रहे हैं या नहीं.
कार्रवाई की मांग तेज
अस्पताल की बदहाली सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी समाज की बुनियादी जरूरत होती हैं. ऐसे में अस्पतालों में लापरवाही और अव्यवस्था को किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो मरीजों की जिंदगी के साथ बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है.
बड़ा सवाल: क्या सुधरेगी व्यवस्था?
मऊगंज सिविल अस्पताल की मौजूदा स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा.
मरीजों और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और अस्पताल की व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाएगा ताकि लोगों को बेहतर और सम्मानजनक इलाज मिल सके.
यह भी पढ़ें- गैस संकट: एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, शादी-समारोह और कारोबार प्रभावित