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ToggleLPG संकट: भारत की रसोई पर मंडराता नया खतरा!
LPG संकट: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण भारत में LPG संकट की आशंका बढ़ रही है. जानिए गैस सिलेंडर की किल्लत क्यों हो रही है, भारत कितना आयात करता है और सरकार क्या कदम उठा रही है.
भारत के कई शहरों में इन दिनों एक नई परेशानी धीरे-धीरे सामने आने लगी है—रसोई गैस सिलेंडर की देर से डिलीवरी और कुछ जगहों पर किल्लत की शिकायतें. गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और कई उपभोक्ताओं को बुकिंग के कई दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा.
मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में रहने वाले एक उपभोक्ता आदित्य के साथ भी ऐसा ही हुआ. उन्होंने 6 मार्च को IVRS के माध्यम से LPG सिलेंडर बुक किया. सामान्यतः एक दिन के भीतर गैस की डिलीवरी हो जाती थी, लेकिन इस बार तीन दिन बीत जाने के बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा. जब उन्होंने दोबारा नंबर मिलाया तो IVRS काम नहीं कर रहा था.
आखिरकार जब वे गैस एजेंसी पहुंचे तो वहां अफरातफरी का माहौल था. कई लोग शिकायत कर रहे थे कि गैस बुकिंग नहीं हो रही, तो कुछ लोग बता रहे थे कि उन्हें बुकिंग के एक सप्ताह बाद भी सिलेंडर नहीं मिला. कई उपभोक्ता अतिरिक्त पैसे देकर भी सिलेंडर लेने को तैयार थे.
यह घटना सिर्फ एक शहर की नहीं है. देश के कई हिस्सों से गैस सप्लाई में देरी और कॉमर्शियल सिलेंडरों की कमी की खबरें सामने आ रही हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत किसी नए LPG संकट की ओर बढ़ रहा है?
भारत में LPG की बढ़ती मांग
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है. देश में हर साल करीब 33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की जरूरत होती है.
अगर इसे सिलेंडरों में समझें तो भारत में हर साल लगभग 235 करोड़ गैस सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं. यानी औसतन रोज़ करीब 64 लाख सिलेंडर की खपत होती है.
इस खपत में से:
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लगभग 88 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग के लिए होती है
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करीब 12 प्रतिशत गैस कॉमर्शियल उपयोग के लिए होती है
कॉमर्शियल गैस का उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और कई छोटे-बड़े उद्योगों में किया जाता है. यही कारण है कि LPG की सप्लाई में थोड़ी भी बाधा आने पर इसका असर सीधे आम लोगों और कारोबार दोनों पर दिखाई देता है.
आयात पर भारी निर्भरता
भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जबकि बाकी गैस देश की रिफाइनरियों में तैयार होती है.
खाड़ी क्षेत्र के कई देश भारत को LPG और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई करते हैं. इनमें सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई जैसे देश प्रमुख हैं.
यही वजह है कि जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रकार का तनाव या संकट पैदा होता है, तो उसका असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी पड़ सकता है.
कई राज्यों में सप्लाई प्रभावित
हाल के दिनों में देश के कई राज्यों से गैस सप्लाई प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं.
मध्य प्रदेश में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी से होटल-रेस्टोरेंट संचालक परेशान हैं.
राजस्थान के जयपुर में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में अचानक उछाल देखने को मिला. जहां पहले सिलेंडर लगभग 1911 रुपये में मिल रहा था, वहीं अब कुछ जगहों पर यह 2500 रुपये तक में बिकने की खबरें सामने आईं.
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बुकिंग के चार से पांच दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा। कुछ क्षेत्रों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर वितरण किया गया.
बिहार और पंजाब जैसे राज्यों में भी गैस बुकिंग और डिलीवरी से जुड़ी तकनीकी और सप्लाई समस्याओं की शिकायतें सामने आई हैं.
इसी तरह मुंबई और पुणे में गैस की कमी के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट आंशिक रूप से बंद होने की स्थिति में पहुंच गए.
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LPG क्या है और कैसे बनती है
LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण होती है—प्रोपेन और ब्यूटेन.
यह गैस सीधे जमीन से नहीं निकलती, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों की रिफाइनिंग के दौरान बनने वाला एक बाई-प्रोडक्ट होती है.
LPG बनने की दो मुख्य प्रक्रियाएं होती हैं.
पहली प्रक्रिया में जब जमीन से प्राकृतिक गैस या कच्चा तेल निकाला जाता है, तो उसके साथ प्रोपेन और ब्यूटेन गैस भी निकलती हैं. इन्हें अलग करके रिफाइन किया जाता है और LPG तैयार की जाती है.
दूसरी प्रक्रिया तेल रिफाइनरियों में होती है. जब कच्चे तेल को गर्म करके पेट्रोल, डीजल और केरोसिन जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं, तब कुछ गैसें निकलती हैं। इन्हें इकट्ठा करके भी LPG बनाई जाती है.
भारत में रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर LPG उत्पादन करती हैं.
सिलेंडर में गैस लिक्विड क्यों होती है
LPG को सिलेंडर में उच्च दबाव के साथ भरा जाता है. दबाव बढ़ने से गैस के अणु एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं और वह तरल रूप में बदल जाती है.
इससे कम जगह में अधिक गैस संग्रहित की जा सकती है.
LPG की एक खास विशेषता यह भी है कि यह हवा से भारी होती है। इसलिए यदि गैस लीक होती है तो वह ऊपर जाने के बजाय नीचे की ओर फैलती है.
इसी वजह से LPG में एक विशेष रसायन एथिल मर्कैप्टन मिलाया जाता है. इससे गैस में तीखी गंध आती है और लीक होने पर तुरंत पता चल जाता है.
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
भारत की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. इन देशों से भारत आने वाले जहाजों को एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरना पड़ता है जिसे Strait of Hormuz कहा जाता है.
यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
हाल के समय में Middle East में बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.
जहाजों की संख्या कम होने और कई गैस संयंत्रों के प्रभावित होने के कारण ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ा है. इसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है.
भारत के पास कितना स्टॉक
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत के पास सीमित अवधि के लिए LPG का बफर स्टॉक मौजूद है.
अनुमानों के मुताबिक:
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तत्काल उपलब्ध बफर स्टॉक लगभग 10 दिन का है
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मौजूदा स्टॉक और समुद्र में आ रहे जहाजों को जोड़ने पर लगभग 40–45 दिन तक जरूरत पूरी हो सकती है
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रणनीतिक भंडार को शामिल करने पर यह अवधि करीब आठ सप्ताह तक बढ़ सकती है
सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक सप्लायर देशों से संपर्क करने के निर्देश दिए हैं.
संभावित विकल्प
यदि भविष्य में LPG की कमी बढ़ती है तो कुछ वैकल्पिक ऊर्जा विकल्प अपनाए जा सकते हैं.
इंडक्शन कुकटॉप बिजली से चलने वाला एक आसान विकल्प है. इसके अलावा सोलर कूकर भी कम लागत में खाना बनाने का पर्यावरण अनुकूल तरीका है.
इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर कम बिजली में भोजन तैयार करने का एक और विकल्प है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस प्लांट भी उपयोगी साबित हो सकते हैं.
निष्कर्ष
भारत में उभरता LPG संकट केवल गैस सप्लाई की समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था की जटिलता को भी दर्शाता है.
जब दुनिया के किसी हिस्से में राजनीतिक या सैन्य तनाव बढ़ता है तो उसका असर हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों तक पहुंच सकता है. खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और समुद्री मार्गों में बाधा इसका स्पष्ट उदाहरण है.
आने वाले समय में भारत को ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयात के स्रोतों में विविधता, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों पर अधिक ध्यान देना होगा.
क्योंकि अंततः ऊर्जा आत्मनिर्भरता ही वह रास्ता है जो देश को ऐसे वैश्विक संकटों से सुरक्षित रख सकता है.
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