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Toggleब्लिंकिट ग्रोथ बूम: 104% बढ़ी नेट ऑर्डर वैल्यू, इटरनल की आय में नया उछाल
भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. फूड डिलीवरी और इंस्टेंट डिलीवरी की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनी ब्लिंकिट ने वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी की नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में 104% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
वहीं, जोमैटो की मूल कंपनी इटरनल (Eternal) ने भी अपने मुनाफे और आय में उल्लेखनीय उछाल दिखाया है. इटरनल का मुनाफा लगभग साढ़े चार गुना बढ़कर 174 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह संकेत है कि कंपनी अब केवल फूड डिलीवरी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि क्विक कॉमर्स और ग्रोथ इंजन के रूप में ब्लिंकिट को आगे बढ़ा रही है.
यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं, बल्कि पूरे भारतीय ई-कॉमर्स और रिटेल सेक्टर के बदलते स्वरूप की कहानी है.
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ब्लिंकिट की धमाकेदार ग्रोथ
ब्लिंकिट ने बीते एक साल में अपनी ग्रोथ से सभी को चौंका दिया है. कंपनी की नेट ऑर्डर वैल्यू में 104% की सालाना वृद्धि हुई है, जो किसी भी बड़े डिजिटल रिटेल प्लेटफॉर्म के लिए बेहद मजबूत संकेत माना जाता है.
कंपनी की एडजस्टेड EBITDA लगभग 9 गुना बढ़कर 37 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यह दिखाता है कि ब्लिंकिट सिर्फ ऑर्डर बढ़ाने पर नहीं, बल्कि लाभदायक मॉडल पर भी काम कर रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों की बदलती आदतें—जैसे किराना, दवाइयां, फल-सब्जियां, और दैनिक जरूरत का सामान 10-15 मिनट में घर तक पहुंचना-ब्लिंकिट की सफलता की सबसे बड़ी वजह हैं.
आज उपभोक्ता समय बचाना चाहते हैं, और ब्लिंकिट ने इसी जरूरत को सबसे तेज़ी से समझा है.
नए स्टोर्स ने बढ़ाई रफ्तार
जनवरी-मार्च तिमाही में ब्लिंकिट ने 216 नए स्टोर जोड़े, जिससे कुल स्टोर संख्या 2,243 तक पहुंच गई. यह विस्तार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी तेजी से फैल रहा है.
कंपनी अब छोटे शहरों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाना चाहती है, जहां इंस्टेंट डिलीवरी की मांग तेजी से बढ़ रही है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में क्विक कॉमर्स की असली लड़ाई मेट्रो शहरों में नहीं, बल्कि उभरते शहरों में होगी.
इटरनल की आय अब नए बिजनेस से
जोमैटो की मूल कंपनी इटरनल की कुल आय अब सिर्फ फूड डिलीवरी पर निर्भर नहीं है. कंपनी का बड़ा हिस्सा अब नए बिजनेस से आ रहा है, जिसमें ब्लिंकिट सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन चुका है.
जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में इटरनल की आय 196.5% बढ़कर 17,292 करोड़ रुपये हो गई. वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कुल आय 168% बढ़कर 54,364 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की रणनीति अब स्पष्ट है-फूड डिलीवरी से आगे बढ़कर क्विक कॉमर्स, ग्रॉसरी डिलीवरी और हाई-फ्रीक्वेंसी शॉपिंग की दिशा में तेज विस्तार.
जोमैटो की हिस्सेदारी और रणनीतिक बदलाव
जोमैटो की इटरनल में 19% हिस्सेदारी है, लेकिन अब कंपनी का ध्यान धीरे-धीरे केवल रेस्टोरेंट डिलीवरी से हटकर व्यापक डिजिटल कॉमर्स मॉडल पर जा रहा है.
ब्लिंकिट के जरिए कंपनी उपभोक्ता की रोजमर्रा की खरीदारी की आदतों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ रही है. यह रणनीति लंबे समय में ज्यादा स्थिर और मजबूत रेवेन्यू मॉडल तैयार कर सकती है.
जहां फूड डिलीवरी सप्ताह में कुछ बार होती है, वहीं ग्रॉसरी और दैनिक सामान की जरूरत लगभग रोज होती है. यही कारण है कि निवेशक भी इस मॉडल को ज्यादा टिकाऊ मान रहे हैं.
फूड डिलीवरी बिजनेस भी मजबूत
हालांकि फोकस ब्लिंकिट पर है, लेकिन फूड डिलीवरी बिजनेस भी लगातार मजबूत बना हुआ है. कंपनी के फूड डिलीवरी सेगमेंट में मुनाफा 24% बढ़कर 532 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
जोमैटो के मासिक सक्रिय ग्राहक (MAU) और ऑर्डर वॉल्यूम दोनों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है.
इसका मतलब साफ है—कंपनी ने अपने पुराने बिजनेस को कमजोर नहीं होने दिया, बल्कि नए बिजनेस को साथ लेकर संतुलित ग्रोथ मॉडल तैयार किया है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
ब्लिंकिट और इटरनल के ये आंकड़े निवेशकों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत हैं. लगातार बढ़ती ऑर्डर वैल्यू, स्टोर विस्तार, बेहतर EBITDA और मजबूत फूड डिलीवरी बिजनेस—ये सभी संकेत बताते हैं कि कंपनी लंबी रेस की तैयारी कर रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि क्विक कॉमर्स सेक्टर आने वाले 5 वर्षों में भारत के रिटेल बाजार का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला हिस्सा बन सकता है.
यदि कंपनियां लाभप्रदता बनाए रखते हुए विस्तार करती हैं, तो यह निवेशकों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है.
भारत में क्विक कॉमर्स का भविष्य
भारत में डिजिटल खरीदारी का अगला चरण क्विक कॉमर्स ही माना जा रहा है. पहले जहां लोग ऑनलाइन शॉपिंग के लिए 2-3 दिन इंतजार करते थे, अब 10 मिनट की डिलीवरी सामान्य होती जा रही है.
ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट, बिगबास्केट और अन्य कंपनियां इसी रेस में आगे बढ़ रही हैं. लेकिन मजबूत नेटवर्क, तेज डिलीवरी और ग्राहक भरोसा—यही असली जीत तय करेगा.
ब्लिंकिट ने फिलहाल इस दौड़ में मजबूत बढ़त बनाई है.
निष्कर्ष
ब्लिंकिट की 104% नेट ऑर्डर वैल्यू ग्रोथ सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते भारत की नई खरीदारी आदतों का संकेत है. इटरनल की बढ़ती आय और मुनाफा यह साबित करता है कि कंपनी ने भविष्य की दिशा सही पहचानी है.
फूड डिलीवरी से आगे बढ़कर क्विक कॉमर्स की दुनिया में यह विस्तार आने वाले वर्षों में भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई कहानी लिख सकता है.
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