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गर्मी: डिहाइड्रेशन का बढ़ता खतरा, गर्मी में बढ़ रही डायबिटीज, माइग्रेन और किडनी की समस्या

भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. पानी की कमी से डायबिटीज, माइग्रेन, किडनी समस्या, लो ब्लड प्रेशर और यूरिन इन्फेक्शन जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

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गर्मी: डिहाइड्रेशन का बढ़ता खतरा, गर्मी में बढ़ रही डायबिटीज, माइग्रेन और किडनी की समस्या

भारत में लगातार बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रही, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है. अप्रैल से ही कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और मई-जून में इसके और अधिक बढ़ने की आशंका है.  तेज धूप, लू और शरीर में पानी की लगातार कमी यानी डिहाइड्रेशन अब लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है.

विशेषज्ञों के अनुसार, डिहाइड्रेशन केवल प्यास लगने तक सीमित समस्या नहीं है. यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है. खासकर डायबिटीज, माइग्रेन, किडनी की बीमारी, यूरिन इन्फेक्शन, लो ब्लड प्रेशर और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है.

अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही कई बार अस्पताल तक पहुंचा देती है.

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डिहाइड्रेशन क्या है और क्यों है खतरनाक?

जब शरीर से पसीने, पेशाब, उल्टी या दस्त के माध्यम से पानी अधिक मात्रा में बाहर निकल जाता है और उसकी पूर्ति पर्याप्त रूप से नहीं हो पाती, तो शरीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में पहुंच जाता है.

गर्मी के मौसम में यह समस्या और तेजी से बढ़ती है क्योंकि शरीर लगातार पसीने के जरिए पानी खोता रहता है. यदि समय पर पर्याप्त पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी पोषण न मिले, तो शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है.

यही असंतुलन आगे चलकर गंभीर बीमारियों का कारण बनता है.

डायबिटीज मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा

कम पानी पीने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है. जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे ग्लूकोज की सांद्रता बढ़ जाती है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि डिहाइड्रेशन इंसुलिन के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है. इससे डायबिटीज मरीजों में हाई शुगर, थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं.

गर्मी के मौसम में डायबिटीज मरीजों को सामान्य लोगों की तुलना में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

किडनी पर बढ़ता है सीधा दबाव

किडनी शरीर के लिए फिल्टर की तरह काम करती है. यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालती है. लेकिन जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

कम पानी पीने से यूरिन गहरा पीला हो जाता है, पेशाब कम आता है और शरीर के विषैले तत्व बाहर नहीं निकल पाते. इससे किडनी स्टोन, यूरिन इन्फेक्शन और गंभीर मामलों में किडनी फेलियर तक की आशंका बढ़ सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक पानी की कमी किडनी को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती है.

माइग्रेन अटैक को बढ़ाता है डिहाइड्रेशन

जो लोग पहले से माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए गर्मी और पानी की कमी सबसे बड़ा ट्रिगर बन सकती है.

डिहाइड्रेशन से दिमाग में ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर, आंखों में भारीपन और तेज माइग्रेन अटैक की संभावना बढ़ जाती है.

कई लोग इसे सामान्य सिरदर्द समझकर दर्द निवारक दवा ले लेते हैं, लेकिन यदि कारण डिहाइड्रेशन है, तो यह समस्या बार-बार लौट सकती है.

यूरिन इन्फेक्शन का बढ़ता खतरा

जब शरीर पर्याप्त पानी नहीं लेता, तो बैक्टीरिया शरीर से सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाते. इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) का खतरा बढ़ जाता है.

विशेष रूप से महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट में दर्द और कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हैं.

समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है.

लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी का जोखिम

शरीर में पानी की कमी से ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है, जिससे लो ब्लड प्रेशर की स्थिति बनती है.

इसका असर चक्कर, थकान, कमजोरी, धुंधला दिखना और अचानक बेहोशी के रूप में सामने आ सकता है. बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में यह खतरा अधिक होता है.

कई बार लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले सकता है.

शुरुआती लक्षण जिन्हें कभी नजरअंदाज न करें

डिहाइड्रेशन शरीर को पहले ही संकेत देने लगता है. यदि इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है.

प्रमुख लक्षण:

  • बार-बार प्यास लगना
  • मुंह और होंठ सूखना
  • गहरे रंग का पेशाब
  • पेशाब कम आना
  • लगातार थकान
  • चक्कर आना
  • सिरदर्द
  • कमजोरी
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • चिड़चिड़ापन
  • त्वचा का रूखापन
  • हाथ-पैर ठंडे पड़ना

ये संकेत बताते हैं कि शरीर मदद मांग रहा है.

बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा सावधानी

बच्चों का शरीर तेजी से पानी खोता है क्योंकि वे खेलते समय पानी पीना भूल जाते हैं. वहीं बुजुर्गों में प्यास का एहसास कम हो जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन जल्दी बढ़ सकता है.

गर्भवती महिलाओं और बाहर काम करने वाले लोगों को भी गर्मी में विशेष सतर्क रहने की जरूरत है.

इन वर्गों के लिए नियमित पानी, तरल पदार्थ और संतुलित खानपान बेहद जरूरी है.

बचाव के आसान लेकिन जरूरी उपाय

डिहाइड्रेशन से बचाव मुश्किल नहीं है, बस कुछ जरूरी आदतों को अपनाना होगा.

1. प्यास लगने का इंतजार न करें

हर 1 से 2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें. केवल प्यास लगने पर पानी पीना पर्याप्त नहीं है.

2. नारियल पानी और ओआरएस लें

नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, बेल का शरबत और ओआरएस शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं.

3. दोपहर की तेज धूप से बचें

दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप सबसे अधिक खतरनाक होती है. इस समय बाहर निकलने से बचें.

4. हल्के और सूती कपड़े पहनें

सिंथेटिक कपड़ों की बजाय ढीले और सूती कपड़े पहनें, ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे.

5. पानी से भरपूर फल खाएं

तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा, नींबू, नारियल पानी और दही जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को हाइड्रेट रखते हैं.

6. चाय-कॉफी और जंक फूड कम करें

अधिक कैफीन और तला-भुना भोजन शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा सकता है.

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

यदि मरीज को लगातार उल्टी, तेज चक्कर, बेहोशी, बहुत कम पेशाब, तेज बुखार, भ्रम की स्थिति या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

गंभीर डिहाइड्रेशन कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है.

निष्कर्ष

गर्मी केवल मौसम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की परीक्षा भी है. डिहाइड्रेशन एक ऐसी समस्या है, जिसे लोग अक्सर हल्के में लेते हैं, लेकिन इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.

डायबिटीज, माइग्रेन, किडनी रोग, यूरिन इन्फेक्शन, लो ब्लड प्रेशर और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं सिर्फ पानी की कमी से तेजी से बढ़ सकती हैं.

इसलिए जरूरी है कि हम अपने शरीर के संकेतों को समझें, समय पर पानी पिएं और छोटी-छोटी सावधानियों को अपनी दैनिक आदत बनाएं.

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