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Toggleशहडोल: मरीज की हालत बिगड़ी, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक निजी अस्पताल पर इलाज में कथित लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि हाथ में फ्रैक्चर और गहरे घाव के इलाज के दौरान अस्पताल ने आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिससे मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई. परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल ने इलाज शुरू होने के पहले ही दिन करीब 45 हजार रुपये शुल्क के रूप में ले लिए. अब पूरे मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है.
यह मामला शहडोल शहर के आदित्य हॉस्पिटल से जुड़ा है. शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते दूसरे अस्पताल में इलाज नहीं कराया जाता, तो मरीज की जान पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत मिलने के बाद जांच का भरोसा दिया है.
हाथ में फ्रैक्चर और गहरे घाव के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती
जानकारी के अनुसार, राजेंद्र कॉलोनी सिरौजा निवासी दीपाली उपाध्याय ने अपने बेटे सत्यम उपाध्याय को हाथ में फ्रैक्चर और गहरे घाव की वजह से इलाज के लिए शहडोल स्थित आदित्य हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल में बेहतर उपचार मिलेगा और मरीज जल्द स्वस्थ हो जाएगा.
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने बिना घाव की समुचित सफाई किए और आवश्यक उपचार पूरा किए बिना ही हाथ की हड्डी को सेट कर प्लास्टर चढ़ा दिया. उनका कहना है कि इलाज में बरती गई इसी कथित लापरवाही के कारण घाव के भीतर संक्रमण फैल गया.
संक्रमण बढ़ने से बिगड़ती गई मरीज की हालत
पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्लास्टर के अंदर घाव लगातार खराब होता गया और उसमें संक्रमण फैलने लगा. धीरे-धीरे घाव में पस भर गई, लेकिन समय रहते इसकी पहचान नहीं की गई. परिजनों का कहना है कि मरीज लगातार दर्द से परेशान था और उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी.
परिवार का आरोप है कि अस्पताल की ओर से स्थिति की गंभीरता को समय पर नहीं समझा गया. जब हालत ज्यादा खराब हो गई, तब मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया.
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इलाज के नाम पर 45 हजार रुपये वसूलने का आरोप
दीपाली उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने भर्ती के पहले ही दिन इलाज के नाम पर लगभग 45 हजार रुपये जमा करा लिए. उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि लेने के बावजूद मरीज को उचित उपचार नहीं मिला.
परिजनों का आरोप है कि यदि इलाज निर्धारित चिकित्सीय मानकों के अनुसार किया जाता, तो मरीज की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. उनका कहना है कि आर्थिक नुकसान के साथ-साथ परिवार को मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा.
दूसरे अस्पताल में खुला कथित लापरवाही का मामला
परिजनों के अनुसार, जब मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ने लगी तो उसे तत्काल बुढ़ार स्थित स्वास्तिक हॉस्पिटल ले जाया गया. वहां चिकित्सक डॉ. आर.सी. जैन ने मरीज की जांच की.
परिवार का दावा है कि जांच के बाद प्लास्टर हटाया गया तो घाव के भीतर बड़ी मात्रा में पस जमा मिली. इसके बाद संक्रमण को साफ कर आवश्यक उपचार शुरू किया गया. परिजनों का कहना है कि समय पर सही इलाज मिलने से मरीज की स्थिति में सुधार आया और उसकी जान बच सकी.
CMHO से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित की मां दीपाली उपाध्याय ने पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) शहडोल से की है. शिकायत में उन्होंने अस्पताल की कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
परिवार का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो भविष्य में अन्य मरीज भी ऐसी परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं. उनका कहना है कि निजी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है.
स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया भरोसा
इस मामले में CMHO डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है. शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. यदि जांच में इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले में पीड़ित परिवार ने निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं अस्पताल की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अस्पताल और जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो जांच में यह तथ्य भी सामने आएगा. फिलहाल मामला जांच के अधीन है और सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है.
रिपोर्ट: कृष्णा तिवारी