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Toggleमऊगंज: छात्रावास घोटाले में एडीएम पर कार्रवाई की सिफारिश
मऊगंज: रीवा जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में छात्रावासों की मरम्मत और आवश्यक सामग्री की खरीदी में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी है. वर्तमान में मऊगंज में पदस्थ अपर कलेक्टर (ADM) पीके पांडे के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. जांच प्रतिवेदन के आधार पर रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने संभागायुक्त (कमिश्नर) को पत्र भेजकर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का प्रस्ताव भेजा है. इससे पहले इसी मामले में विभाग के दो कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है.
करीब तीन करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला
मामला रीवा जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, करीब 110 छात्रावासों की मरम्मत, बिजली सामग्री और अन्य आवश्यक सामान की खरीदी में लगभग तीन करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे.
शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई. जांच में कई स्तरों पर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की गई.
शिकायत पर गठित हुई जांच समिति
जानकारी के अनुसार, कमल सिंह बघेल नामक व्यक्ति ने जिला प्रशासन को शिकायत दी थी कि छात्रावासों की मरम्मत और निर्माण सामग्री की खरीदी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है.
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच समिति गठित की. समिति ने विभिन्न दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेखों की जांच की. जांच के दौरान कई शिकायतें प्रथम दृष्टया सही पाई गईं.
बिना मरम्मत कराए निकाली गई राशि
जांच में सामने आया कि कई छात्रावासों में मरम्मत कार्य कराए बिना ही मरम्मत के नाम पर भुगतान किया गया. इसके अलावा बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए सामग्री खरीदी के नाम पर भी सरकारी राशि खर्च किए जाने के आरोप सामने आए.
रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं और कार्यों के निष्पादन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं.
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दो कर्मचारी पहले ही हो चुके हैं निलंबित
इस मामले में आदिम जाति कल्याण विभाग के स्टोर एवं निर्माण शाखा से जुड़े दो कर्मचारियों, विकास तिवारी और पटेल बाबू, को पहले ही निलंबित किया जा चुका है.
जिला प्रशासन ने उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किए थे.
पीके पांडे की भूमिका भी जांच के दायरे में
जिस समय कथित घोटाला हुआ, उस दौरान वर्तमान मऊगंज एडीएम पीके पांडे रीवा में आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक का प्रभार संभाल रहे थे.
जांच समिति ने उनकी भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया. इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया.
जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ प्रशासन
सूत्रों के अनुसार, नोटिस के जवाब में पीके पांडे ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया. हालांकि, जिला प्रशासन को उनका जवाब संतोषजनक नहीं लगा.
इसके बाद जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने संभागायुक्त को पत्र भेजकर उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है.
कमिश्नर के स्तर पर होगा फैसला
अब यह मामला संभागायुक्त के पास पहुंच चुका है. प्रशासनिक नियमों के अनुसार, संबंधित प्राधिकारी जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लेंगे.
यदि जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोप पुष्ट पाए जाते हैं, तो संबंधित नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.
कलेक्टर ने भेजा कार्रवाई का प्रस्ताव
रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पुष्टि की है कि जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद नियमानुसार संभागायुक्त को कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया है.
उन्होंने कहा कि मामले में जांच प्रक्रिया पूरी कर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की अनुशंसा की गई है.
जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
करीब तीन करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में पहले दो कर्मचारियों के निलंबन के बाद अब एडीएम स्तर के अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है.
फिलहाल अंतिम निर्णय संभागायुक्त स्तर पर लिया जाएगा. पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर सभी की नजर बनी हुई है.
रिपोर्ट: दीपक सिंह गहरवर