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रीवा: रीवा रिंग रोड टोल पर जाम, छह गेट बंद होने से बढ़ी परेशानी

रीवा रिंग रोड टोल पर छह गेट बंद, एक गेट से आवाजाही के चलते लगा जाम. विधायक प्रदीप पटेल ने मौके पर पहुंचकर सभी गेट खुलवाए.

रीवा: रीवा रिंग रोड टोल पर जाम, छह गेट बंद होने से बढ़ी परेशानी

जिले की रिंग रोड पर टोल संचालन को लेकर उस समय स्थिति बिगड़ गई, जब टोल परिसर में मौजूद कई गेट बंद कर दिए गए और वाहनों की आवाजाही केवल एक गेट से कराई जा रही थी. एक साथ बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने से टोल नाके पर लंबी कतार लग गई और वाहन चालकों को जाम की स्थिति का सामना करना पड़ा.

मामले की जानकारी उस समय सामने आई, जब मऊगंज से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल इसी मार्ग से गुजर रहे थे. टोल नाके पर वाहनों की भीड़ और अव्यवस्था देखकर विधायक अपने वाहन से नीचे उतरे और मौके पर मौजूद टोल प्रबंधन से पूरे मामले की जानकारी ली. बातचीत के बाद बंद किए गए टोल गेटों को खुलवाया गया, जिसके बाद वाहनों की आवाजाही सामान्य करने की कोशिश की गई.

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छह गेट बंद, एक से चल रहा था यातायात

जानकारी के अनुसार, रीवा रिंग रोड के टोल संचालन का जिम्मा अग्रोह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास है। कंपनी को यह टोल संचालन कार्य MPHRDC की ओर से दिए गए टेंडर के तहत मिला है.

आरोप है कि टोल परिसर में करीब छह गेटों पर बैरियर लगाकर उन्हें बंद कर दिया गया था. इसके बाद आम वाहनों की आवाजाही के लिए केवल एक टोल गेट को खुला रखा गया. जैसे-जैसे वाहनों की संख्या बढ़ी, एक ही गेट से यातायात संचालित होने के कारण वाहनों की कतार लंबी होती चली गई.

टोल पर कुछ समय के लिए ऐसी स्थिति बन गई कि वाहन चालकों को आगे बढ़ने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा. इससे यात्रियों और स्थानीय वाहन चालकों में परेशानी देखी गई.

अचानक टोल पर पहुंचे विधायक

बताया जा रहा है कि मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इसी मार्ग से गुजर रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर टोल नाके पर लगी वाहनों की भीड़ पर पड़ी.

विधायक ने अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ वाहन से उतरकर मौके का जायजा लिया. उन्होंने टोल प्रबंधन से बातचीत करते हुए पूछा कि जब टोल परिसर में कई गेट मौजूद हैं, तो उन्हें बंद रखकर केवल एक गेट से वाहनों की आवाजाही क्यों कराई जा रही है.

मौके पर मौजूद टोल मैनेजर से बातचीत के बाद विधायक ने बंद पड़े टोल गेटों को तत्काल खुलवाया. उनका कहना था कि टोल संचालन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े.

पुलिस भी पहुंची मौके पर

मामले की सूचना समान थाना पुलिस को भी दी गई. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और टोल परिसर की स्थिति का जायजा लिया.

पुलिस की मौजूदगी में टोल संचालन और वाहनों की आवाजाही की स्थिति देखी गई. मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

हालांकि, टोल के कितने गेट किस वजह से बंद किए गए थे और उन्हें बंद रखने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था, इसको लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इस संबंध में टोल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है.

टोल व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद टोल संचालन की व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि टोल परिसर में छह गेट मौजूद हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में उन्हें बंद कर केवल एक गेट से यातायात संचालित करने की जरूरत क्यों पड़ी?

टोल पर वाहनों की संख्या बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त गेट खोले जाने चाहिए या नहीं, इसकी व्यवस्था क्या है? क्या टोल प्रबंधन के पास यातायात का दबाव बढ़ने पर तत्काल सभी उपलब्ध गेट संचालित करने की कोई व्यवस्था है? इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है.

टोल नाके पर वाहन चालक निर्धारित शुल्क देकर सड़क सुविधा का उपयोग करते हैं. ऐसे में उनकी अपेक्षा रहती है कि भुगतान की प्रक्रिया सुचारु हो और टोल पार करने में अनावश्यक समय बर्बाद न हो. यदि उपलब्ध गेटों का संचालन नहीं किया जाता और केवल एक गेट से वाहनों को निकाला जाता है, तो स्वाभाविक रूप से वहां जाम की स्थिति बन सकती है.

विधायक के हस्तक्षेप के बाद खुले गेट

मौके पर पहुंचे विधायक प्रदीप पटेल के हस्तक्षेप के बाद बंद टोल गेटों को खुलवाया गया. इसके बाद वाहनों को अतिरिक्त गेटों से निकालने की व्यवस्था की गई, जिससे टोल पर जमा वाहनों की भीड़ को कम करने में मदद मिली.

घटना ने यह भी दिखाया कि सड़क और टोल व्यवस्था में छोटी सी प्रशासनिक या संचालन संबंधी चूक का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है. खासकर रिंग रोड जैसे मार्ग पर, जहां बड़ी संख्या में वाहन लगातार गुजरते हैं, वहां टोल संचालन में किसी भी तरह की अव्यवस्था से यातायात प्रभावित हो सकता है.

जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग

पूरे मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टोल प्रबंधन की ओर से गेट बंद रखने के पीछे क्या कारण बताया जाता है. यदि किसी तकनीकी समस्या, स्टाफ की कमी या किसी अन्य कारण से गेट बंद किए गए थे, तो इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए.

साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि टोल संचालन की निगरानी किस एजेंसी की जिम्मेदारी है और यातायात का दबाव बढ़ने पर उपलब्ध सभी गेटों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रोटोकॉल तय है.

रीवा रिंग रोड पर सामने आया यह मामला सिर्फ एक टोल नाके पर जाम तक सीमित नहीं है. यह सवाल भी खड़ा करता है कि आम वाहन चालकों से शुल्क लेने वाली व्यवस्था कितनी सुचारु और जवाबदेह तरीके से संचालित हो रही है.

फिलहाल विधायक प्रदीप पटेल के हस्तक्षेप के बाद टोल के बंद गेट खोले गए और वाहनों की आवाजाही को सामान्य करने की कोशिश की गई. अब निगाह इस बात पर है कि टोल प्रबंधन इस अव्यवस्था को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था की जाती है.

रिपोर्ट: लवकेश सिंह

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