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मऊगंज: हनुमना अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, दवा वितरण से स्वच्छता तक उठे गंभीर आरोप

हनुमना अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल—दवा वितरण से लेकर अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी तक, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल.

मऊगंज: हनुमना अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, दवा वितरण से स्वच्छता तक उठे गंभीर आरोप

मऊगंज जिले के हनुमना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. अस्पताल से सामने आए वीडियो और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों ने मरीजों की सुरक्षा, दवा वितरण व्यवस्था और अस्पताल परिसर की स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

आरोप है कि अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी के चलते डॉक्टरों द्वारा लिखी गई पर्ची के आधार पर सफाईकर्मी या आउटसोर्स कर्मचारियों से मरीजों को दवाएं वितरित कराई जा रही हैं. इतना ही नहीं, अस्पताल में इंजेक्शन लगाने और मलहम-पट्टी जैसे चिकित्सकीय कार्यों में भी गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं.

इसी के साथ अस्पताल की ओपीडी और प्रसव कक्ष के आसपास आवारा कुत्तों की मौजूदगी के वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है. ऐसे में सवाल सिर्फ अस्पताल की अव्यवस्था का नहीं, बल्कि मरीजों और नवजात बच्चों की सुरक्षा से भी जुड़ जाता है.

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सफाईकर्मी के हाथ में दवा वितरण की जिम्मेदारी?l

हनुमना सामुदायिक अस्पताल से सामने आए कथित वीडियो में एक कर्मचारी के मरीजों को दवाएं वितरित करने का दावा किया जा रहा है. स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी के कारण डॉक्टरों की पर्ची देखकर अन्य कर्मचारी मरीजों को दवाएं देते हैं.

यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति अस्पताल की सफाई व्यवस्था के लिए हुई है, तो उसके द्वारा दवा वितरण किए जाने की स्थिति कई सवाल खड़े करती है. दवा की पहचान, उसकी मात्रा, मरीज की उम्र और उसकी चिकित्सकीय स्थिति जैसे कई पहलू दवा वितरण के दौरान महत्वपूर्ण होते हैं.

ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित कर्मचारी को दवा वितरण का अधिकार और प्रशिक्षण किस आधार पर दिया गया था. क्या अस्पताल प्रशासन की ओर से इसके लिए कोई अधिकृत व्यवस्था बनाई गई है या फिर स्टाफ की कमी के कारण वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर यह काम कराया जा रहा है?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

इंजेक्शन और उपचार को लेकर भी आरोप

स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए आरोप केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं हैं. अस्पताल में इंजेक्शन लगाने, मलहम-पट्टी करने और अन्य संवेदनशील चिकित्सकीय कार्यों में भी गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों के इस्तेमाल की बात कही जा रही है.

मरीजों के इलाज से जुड़े ऐसे कार्यों में प्रशिक्षित और अधिकृत स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय प्रक्रिया में लापरवाही या तकनीकी गलती मरीज के लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है, यह विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा. इसलिए स्वास्थ्य विभाग के लिए जरूरी है कि वह अस्पताल में तैनात कर्मचारियों की भूमिका, उनकी योग्यता और उन्हें सौंपे गए कार्यों की जांच करे.

ओपीडी से प्रसव कक्ष तक आवारा कुत्तों की मौजूदगी

हनुमना अस्पताल की व्यवस्था को लेकर दूसरा गंभीर सवाल अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर है.

सामने आई तस्वीरों और वीडियो में अस्पताल की ओपीडी के आसपास कुत्ते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. आरोप यह भी है कि आवारा कुत्ते प्रसव कक्ष के आसपास तक पहुंच रहे हैं.

अस्पताल ऐसा स्थान है जहां संक्रमण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. खासकर प्रसव कक्ष के आसपास साफ-सफाई और सुरक्षा के मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वहां प्रसूताओं और नवजात बच्चों की देखभाल होती है.

ऐसे में अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं की मौजूदगी पर अस्पताल प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से जवाब अपेक्षित है.

मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल

सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोगों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं.

ऐसे में यदि स्टाफ की कमी के कारण गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों से चिकित्सकीय कार्य कराया जा रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक कमी का मामला नहीं रह जाता। इसका सीधा संबंध मरीजों की सुरक्षा से जुड़ सकता है.

वहीं, अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है. अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि मरीजों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाए.

क्या अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ है?

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अस्पताल में मानव संसाधन की उपलब्धता को लेकर है.

यदि वास्तव में फार्मासिस्ट की कमी है, तो स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हनुमना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत पद कितने हैं, वर्तमान में कितने फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं और रिक्त पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

स्टाफ की कमी का असर यदि दवा वितरण या मरीजों की देखभाल जैसी आवश्यक सेवाओं पर पड़ रहा है, तो विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जरूरत है.

अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही जरूरी

हनुमना अस्पताल को लेकर सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है. जांच में यह देखा जाना चाहिए कि दवा वितरण कौन कर रहा है, संबंधित कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण क्या है, अस्पताल में फार्मासिस्ट की वास्तविक स्थिति क्या है और चिकित्सकीय कार्यों के लिए कौन-कौन से कर्मचारी अधिकृत हैं.

इसके अलावा अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. यदि वीडियो और तस्वीरें वास्तविक हैं, तो अस्पताल प्रशासन को यह बताना होगा कि परिसर में आवारा पशुओं की रोकथाम और स्वच्छता के लिए क्या व्यवस्था है.

अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल

किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था केवल अस्पताल के कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं होती. जिला और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी भी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा हनुमना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नियमित निरीक्षण किया जाता है? यदि निरीक्षण होते हैं, तो क्या दवा वितरण, स्टाफ की उपलब्धता और स्वच्छता व्यवस्था की भी जांच की जाती है?

अगर इन व्यवस्थाओं में लंबे समय से कमी है, तो निरीक्षण के बावजूद ये समस्याएं सामने क्यों नहीं आईं—यह भी जांच का विषय है.

अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

हनुमना सामुदायिक अस्पताल को लेकर सामने आए आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर चर्चा जरूर शुरू कर दी है. हालांकि, वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पूरे मामले की आधिकारिक जांच जरूरी है.

स्वास्थ्य विभाग यदि मामले की जांच करता है, तो उससे कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं—क्या वास्तव में सफाईकर्मी या आउटसोर्स कर्मचारी दवाएं बांट रहे थे? क्या गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों से चिकित्सकीय कार्य कराया जा रहा था? क्या अस्पताल में फार्मासिस्ट के पद रिक्त हैं? और अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

फिलहाल निगाहें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं. क्योंकि सरकारी अस्पताल में आने वाला हर मरीज केवल इलाज नहीं, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवा का अधिकार लेकर पहुंचता है. हनुमना अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली व्यवस्था से मिलना चाहिए.

रिपोर्ट:  लवकेश सिंह

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