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रीवा: तहसीलदार बनकर फोन, ANM से 53 हजार की ठगी

रीवा: तहसीलदार बनकर फोन, ANM से 53 हजार की ठगी

रीवा: तहसीलदार बनकर फोन, ANM से 53 हजार की ठगी

रीवा: रीवा जिले में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है. रंगौली में पदस्थ एएनएम विश्व मोहिनी नामदेव के बैंक खाते से करीब 53 हजार रुपए निकल गए. आरोप है कि साइबर ठग ने नायब तहसीलदार के नाम का इस्तेमाल कर फोन किया और जानकारी हासिल करने के बाद खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर दिए.

मामले की शिकायत एएनएम ने रीवा कलेक्टर से की है. उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने, खाते से निकली रकम वापस दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

BMO ने पहले ही फोन आने की दी थी जानकारी

एएनएम विश्व मोहिनी नामदेव के मुताबिक, घटना से पहले बीएमओ डॉ. आनंद पांडेय ने उन्हें बताया था कि अशोक मीणा, नायब तहसीलदार कलेक्ट्रेट के नाम से फोन आएगा.

बीएमओ की ओर से पहले ही जानकारी मिलने के कारण एएनएम को फोन करने वाले व्यक्ति पर संदेह नहीं हुआ. उन्हें लगा कि फोन वास्तव में कलेक्ट्रेट से जुड़े किसी अधिकारी की ओर से किया जा रहा है.

इसके बाद जब संबंधित व्यक्ति का फोन आया तो एएनएम ने बातचीत की और फोन पर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई.

जानकारी देने के बाद होने लगे ट्रांजेक्शन

शिकायत के अनुसार, फोन पर बातचीत और जानकारी साझा करने के बाद एएनएम के बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन होने लगे.

कुछ ही समय बाद उनके मोबाइल पर रकम निकलने के मैसेज आने लगे. लगातार बैंक ट्रांजेक्शन के मैसेज देखकर उन्हें खाते से पैसे निकाले जाने की जानकारी हुई.

एएनएम के मुताबिक, उनके खाते से कुल करीब 53 हजार रुपए निकाले गए हैं.

एक ट्रांजेक्शन 34,990 रुपए का

शिकायत में खाते से हुई निकासी का विवरण भी दिया गया है. इसमें एक ट्रांजेक्शन 34,990 रुपए का बताया गया है.

इसके अलावा भी खाते से अलग-अलग रकम निकाले जाने की जानकारी सामने आई है. कुल रकम करीब 53 हजार रुपए बताई गई है.

घटना के बाद एएनएम ने मामले की शिकायत कलेक्टर से करते हुए पूरी घटना की जांच कराने की मांग की है.

BMO भी साइबर ठग के झांसे में आए

इस मामले में खास बात यह है कि साइबर ठग ने सिर्फ एएनएम को ही नहीं, बल्कि बीएमओ को भी अपने झांसे में लिया.

बीएमओ डॉ. आनंद पांडेय ने बताया कि उन्हें भी फोन आया था. फोन करने वाले व्यक्ति ने कहा कि सभी एएनएम को ग्रुप में सूचना दे दें कि उसका फोन आने वाला है और फोन पर मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दें.

बीएमओ ने फोन करने वाले की बात पर भरोसा करते हुए एएनएम के ग्रुप में इसकी सूचना दे दी.

इसके बाद विश्व मोहिनी नामदेव को फोन आया. पहले से सूचना होने के कारण एएनएम को भी फोन करने वाले व्यक्ति पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ.

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अधिकारी का नाम सुनकर नहीं हुआ शक

साइबर ठगी के इस मामले में ठग ने कथित तौर पर सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया.

एएनएम का कहना है कि उन्हें पहले ही बीएमओ की ओर से फोन आने की जानकारी दी गई थी. इसी वजह से जब फोन आया तो उन्हें लगा कि संबंधित अधिकारी ही उनसे बात कर रहे हैं.

इसी भरोसे के कारण उन्होंने फोन पर मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दी. इसके बाद खाते से रकम निकलने लगी.

यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर ठग किस तरह सरकारी अधिकारियों और विभागीय संपर्कों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं.

कलेक्टर से की शिकायत

खाते से रकम निकलने के बाद एएनएम विश्व मोहिनी नामदेव ने मामले को लेकर रीवा कलेक्टर से शिकायत की है.

उन्होंने शिकायत में पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. साथ ही खाते से निकली रकम वापस दिलाने और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है.

एएनएम का कहना है कि जिस तरह से फोन करने वाले ने सरकारी अधिकारी का नाम इस्तेमाल किया और पहले से विभागीय स्तर पर फोन आने की सूचना पहुंचाई गई, उससे उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ.

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल इस मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि फोन करने वाला व्यक्ति कौन था और उसने एएनएम के बैंक खाते से रकम किस तरीके से निकाली.

मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि साइबर ठग ने किस तकनीक का इस्तेमाल किया और खाते से रकम किस माध्यम से दूसरे खाते में ट्रांसफर की गई.

पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिस नंबर से फोन किया गया था, वह किसके नाम पर है और ठगी की रकम कहां ट्रांसफर हुई.

सरकारी अधिकारी बनकर ठगी से रहें सावधान

साइबर ठगी के मामलों में ठग अक्सर पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, कलेक्टर कार्यालय, तहसील या अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करते हैं.

इस तरह के मामलों में किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, OTP, PIN, CVV या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए.

किसी अधिकारी के नाम से फोन आने पर भी पहले संबंधित कार्यालय से स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करना जरूरी है.

रीवा में सामने आया यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें कथित तौर पर सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया गया और पहले से सूचना दिलवाकर पीड़िता का भरोसा हासिल किया गया.

अब शिकायत के बाद जांच में यह सामने आने का इंतजार है कि इस साइबर ठगी के पीछे कौन लोग हैं और करीब 53 हजार रुपए की रकम आखिर कहां ट्रांसफर की गई.

रिपोर्ट: हीरो गुप्ता 

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