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रीवा: रीवा साइबर ठगी, 5 रुपये की फीस ने डुबोए 1 लाख रुपये

रीवा में डॉक्टर का अपॉइंटमेंट दिलाने के नाम पर साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को APK फाइल डाउनलोड कराई और उनकी एफडी से 1 लाख रुपये निकाल लिए

रीवा: रीवा साइबर ठगी, 5 रुपये की फीस ने डुबोए 1 लाख रुपये

आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन सुविधाओं ने जीवन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन साइबर अपराधियों ने इन्हीं सुविधाओं को ठगी का हथियार भी बना लिया है.कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर, कभी बैंक अधिकारी बनकर और अब डॉक्टर का अपॉइंटमेंट दिलाने के बहाने लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाला जा रहा है.

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सामने आया ताजा मामला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि केवल 5 रुपये की ऑनलाइन फीस भरने के बहाने भी साइबर ठग लाखों रुपये का नुकसान कर सकते हैं.

इस घटना में डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेने की कोशिश कर रहे एक व्यक्ति को पहले भरोसे में लिया गया, फिर मोबाइल में एक APK फाइल डाउनलोड कराई गई और देखते ही देखते उनकी एफडी से 1 लाख रुपये निकाल लिए गए.

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क्या है पूरा मामला?

रीवा निवासी राजेश्वरी प्रसाद द्विवेदी को डॉक्टर से इलाज के लिए अपॉइंटमेंट लेना था. उन्होंने इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजने के लिए Just Dial का सहारा लिया.

कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर एक कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को डॉक्टर का अपॉइंटमेंट कराने वाला प्रतिनिधि बताया.

उसने कहा कि अपॉइंटमेंट कन्फर्म करने के लिए केवल 5 रुपये की ऑनलाइन रसीद बनानी होगी. इसके लिए उसने एक APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने के लिए कहा.

चूंकि रकम केवल 5 रुपये बताई गई थी और उस समय खाते से कोई पैसा भी नहीं कटा, इसलिए पीड़ित को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ. उन्होंने बिना ज्यादा सोच-विचार किए APK फाइल डाउनलोड कर ली.

यहीं से साइबर अपराधियों को उनके मोबाइल तक पहुंच मिल गई.

अगले दिन सामने आया बड़ा झटका

अगले दिन फिर उसी व्यक्ति का फोन आया.

उसने बताया कि रविवार होने की वजह से डॉक्टर का अपॉइंटमेंट सोमवार को मिलेगा.

इसी दौरान जब पीड़ित ने अपने बैंक खाते और निवेश की जानकारी देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.

मुथूट फाइनेंस में बेटे के नाम पर रखी 2 लाख रुपये की एफडी में से 1 लाख रुपये गायब हो चुके थे.

यानी एक छोटी-सी लापरवाही ने परिवार की बड़ी बचत को खतरे में डाल दिया.

जांच में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की.

प्रारंभिक जांच में पता चला कि निकाली गई रकम पश्चिम बंगाल के एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी.

इतना ही नहीं, उस खाते से 70 हजार रुपये कोलकाता के एक एटीएम से नकद निकाल भी लिए गए.

इससे साफ है कि साइबर अपराधी पहले से पूरी योजना बनाकर बैठे थे और पैसे निकालने की प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी कर दी गई.

सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

APK फाइल क्या होती है?

APK यानी Android Package Kit.

यह एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है.

आमतौर पर लोग Google Play Store से ऐप डाउनलोड करते हैं, जहां सुरक्षा जांच होती है.

लेकिन जब कोई व्यक्ति WhatsApp, SMS, Telegram या किसी अन्य माध्यम से APK फाइल भेजकर उसे इंस्टॉल करने को कहता है, तो यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

ऐसी फाइलों में अक्सर मैलवेयर (Malware) या स्पाइवेयर (Spyware) छिपे होते हैं, जो मोबाइल का नियंत्रण साइबर अपराधियों तक पहुंचा देते हैं.

APK डाउनलोड करते ही कैसे होती है ठगी?

साइबर अपराधी पहले किसी भरोसेमंद सेवा का नाम लेते हैं.

जैसे—

  • डॉक्टर का अपॉइंटमेंट
  • बैंक
  • बिजली बिल
  • केवाईसी अपडेट
  • गैस सब्सिडी
  • सरकारी योजना
  • पार्सल डिलीवरी

इसके बाद वे APK फाइल डाउनलोड कराते हैं.

फाइल इंस्टॉल होते ही अपराधी मोबाइल की कई परमिशन हासिल कर लेते हैं.

इसके जरिए वे—

  • बैंकिंग ऐप की जानकारी देख सकते हैं.
  • OTP पढ़ सकते हैं.
  • SMS एक्सेस कर सकते हैं.
  • स्क्रीन रिकॉर्ड कर सकते हैं.
  • मोबाइल को रिमोट से नियंत्रित कर सकते हैं.

यही वजह है कि कई मामलों में बिना OTP बताए भी लोगों के खाते खाली हो जाते हैं.

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे साइबर अपराध?

भारत में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है.

इसी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं.

अब ठग केवल लिंक भेजकर ही नहीं, बल्कि नकली वेबसाइट, फर्जी कॉल सेंटर, सोशल मीडिया और APK फाइलों के जरिए भी लोगों को निशाना बना रहे हैं.

इनका सबसे बड़ा हथियार होता है—

  • भरोसा जीतना
  • जल्दबाजी पैदा करना
  • छोटी रकम बताकर विश्वास दिलाना
  • तकनीकी जानकारी का फायदा उठाना

इन गलतियों से बचें

यदि आप साइबर ठगी से बचना चाहते हैं तो इन बातों का हमेशा ध्यान रखें—

1. APK फाइल कभी डाउनलोड न करें

यदि कोई अनजान व्यक्ति APK भेजे तो उसे तुरंत डिलीट कर दें.

2. केवल Play Store से ऐप डाउनलोड करें

किसी भी ऐप को केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही इंस्टॉल करें.

3. स्क्रीन शेयरिंग ऐप से बचें

AnyDesk, QuickSupport या अन्य स्क्रीन शेयरिंग ऐप केवल विश्वसनीय तकनीकी सहायता के लिए ही इस्तेमाल करें.

4. OTP और बैंक जानकारी साझा न करें

कोई भी बैंक, अस्पताल या सरकारी विभाग फोन पर OTP नहीं मांगता.

5. छोटी रकम देखकर भरोसा न करें

अक्सर साइबर अपराधी 1 रुपये, 2 रुपये या 5 रुपये का बहाना बनाकर बड़ी ठगी को अंजाम देते हैं.

यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?

अगर गलती से आपने ऐसी फाइल डाउनलोड कर ली है या खाते से पैसे निकल गए हैं, तो बिना देर किए ये कदम उठाएं—

  • तुरंत बैंक को सूचित करें.
  • नेट बैंकिंग और UPI सेवाएं ब्लॉक करवाएं.
  • सभी पासवर्ड बदल दें.
  • मोबाइल से संदिग्ध ऐप हटाएं.
  • साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें.
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें.
  • नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में एफआईआर दर्ज कराएं.

जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक रहती है.

डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

रीवा की यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक के लिए चेतावनी है जो रोजाना इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करता है.

साइबर अपराधी अब बड़े लालच नहीं देते, बल्कि छोटी-सी फीस, अपॉइंटमेंट, पार्सल, बिजली बिल या बैंक अपडेट जैसे सामान्य बहानों का इस्तेमाल करते हैं.

याद रखें—

कोई भी अनजान APK फाइल, लिंक या ऐप आपके मोबाइल और बैंक खाते दोनों के लिए खतरा बन सकती है.

निष्कर्ष

रीवा में डॉक्टर का अपॉइंटमेंट दिलाने के नाम पर हुई 1 लाख रुपये की साइबर ठगी यह साबित करती है कि डिजिटल दुनिया में केवल तकनीक नहीं, बल्कि सतर्कता भी जरूरी है.

यदि कोई व्यक्ति किसी सेवा के नाम पर APK फाइल डाउनलोड करने, स्क्रीन शेयर करने या बैंक संबंधी जानकारी देने के लिए कहे, तो तुरंत सावधान हो जाएं.

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