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Toggleसीधी: फोन पर तहसीलदार का दबाव पड़ा तो पहुंची एएनएम — टीकाकरण केंद्र में लापरवाही का बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक मामला सामने आया है. रामपुर नैकिन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण कार्यक्रम के दौरान गंभीर लापरवाही उजागर हुई, जहां एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) की अनुपस्थिति के कारण दर्जनों महिलाओं और छोटे बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़ा.
यह मामला केवल एक कर्मचारी की देरी का नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है.
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सुबह 10 बजे से इंतजार, दोपहर तक नहीं पहुंची स्वास्थ्यकर्मी
मंगलवार को निर्धारित टीकाकरण दिवस होने के कारण आसपास के गांवों से महिलाएं अपने नवजात और छोटे बच्चों को लेकर सुबह 10 बजे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गई थीं.
लेकिन समय बीतता गया और केंद्र पर न तो संबंधित एएनएम मौजूद थीं और न ही कोई अन्य स्वास्थ्यकर्मी टीकाकरण की जिम्मेदारी संभालने के लिए उपलब्ध था.
करीब दो घंटे तक महिलाएं बच्चों को गोद में लिए केंद्र परिसर में बैठी रहीं. बढ़ती गर्मी और बच्चों की परेशानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया.
महिलाओं की नाराजगी, व्यवस्था पर उठे सवाल
टीकाकरण कराने आई महिला प्रतीक्षा मिश्रा ने बताया कि वे तय समय पर केंद्र पहुंच गई थीं, लेकिन दोपहर 12 बजे तक कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी नहीं आया.
उनके अनुसार, वहां मौजूद अन्य महिलाओं ने बताया कि संबंधित एएनएम अक्सर देर से आती हैं और कुछ ही समय बाद लौट जाती हैं. इस कारण लोगों में पहले से ही असंतोष था.
महिलाओं का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही सीमित हैं, ऐसे में यदि निर्धारित दिन पर भी कर्मचारी समय पर न पहुंचे तो आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है.
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
जब इंतजार लंबा हो गया तो स्थानीय लोगों ने मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से की.
प्रभारी बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) श्वेता राजपूत और रामपुर नैकिन के तहसीलदार आशीष मिश्रा को स्थिति की जानकारी दी गई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार आशीष मिश्रा ने स्वयं संबंधित एएनएम सुषमा सिंह को फोन कर तत्काल केंद्र पहुंचने के निर्देश दिए. प्रशासनिक दबाव के बाद एएनएम केंद्र पहुंचीं, लेकिन तब तक महिलाएं लंबे इंतजार से परेशान हो चुकी थीं.
एएनएम की सफाई — ‘ड्यूटी याद नहीं थी’
मामले पर जब एएनएम सुषमा सिंह से बात की गई तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें ड्यूटी का ध्यान नहीं था और उन्हें लगा कि उस दिन अवकाश है.
हालांकि, यह जवाब स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी और पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है, क्योंकि टीकाकरण जैसे कार्यक्रम पूर्व निर्धारित होते हैं और उनकी जानकारी संबंधित कर्मचारियों को पहले से दी जाती है.
बीएमओ ने दिए कार्रवाई के संकेत
प्रभारी बीएमओ श्वेता राजपूत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कर्मचारी को नोटिस जारी किया जाएगा. विभागीय नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
पुरानी आदत का खुलासा — पहले भी मिल चुके नोटिस
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब पूर्व बीएमओ प्रेरणा पाठक ने स्वीकार किया कि एएनएम सुषमा सिंह की देरी से आने की शिकायत नई नहीं है.
उन्होंने बताया कि पहले भी कई बार वेतन कटौती की कार्रवाई की जा चुकी है और 7 से 8 बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन व्यवहार में सुधार नहीं हुआ.
मामला पहले ही उच्च अधिकारियों तक भेजा जा चुका था, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई.
तहसीलदार का सख्त रुख
तहसीलदार आशीष मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भेजी जाएगी और सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी.
उनके अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं.
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक केंद्र की समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की कई कमजोरियों को उजागर करती है, जैसे:
- कर्मचारियों की निगरानी की कमी
- समय पालन की कमजोर व्यवस्था
- शिकायतों पर धीमी कार्रवाई
- जवाबदेही तय न होना
ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण कार्यक्रम बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में कर्मचारियों की अनुपस्थिति सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.
टीकाकरण क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
टीकाकरण केवल एक नियमित स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है.
समय पर टीका न लग पाने से बच्चों में संक्रमण और रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ग्रामीण परिवार अक्सर लंबी दूरी तय करके स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, इसलिए सेवा में देरी उनके लिए बड़ी समस्या बन जाती है.
लापरवाही का सामाजिक प्रभाव
इस तरह की घटनाएं लोगों के मन में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं.
जब लोग बार-बार परेशान होते हैं तो वे सरकारी केंद्रों पर जाना कम कर देते हैं, जिससे टीकाकरण दर प्रभावित हो सकती है. इसका असर लंबे समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है.
क्या सुधार जरूरी हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं:
- बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करना
- नियमित निरीक्षण और औचक जांच
- शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई
- जवाबदेही तय करने की स्पष्ट नीति
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग
जनता की अपेक्षा — सेवा समय पर मिले
ग्रामीण नागरिकों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि उन्हें तय समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें.
सरकार द्वारा स्वास्थ्य योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर कर्मचारी जिम्मेदारी नहीं निभाते तो योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाता है.
निष्कर्ष
रामपुर नैकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह घटना प्रशासनिक सतर्कता और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही दोनों की परीक्षा बन गई है.
तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद भले ही एएनएम केंद्र पहुंच गईं, लेकिन सवाल यह है कि क्या बिना प्रशासनिक दबाव के व्यवस्था सही तरीके से चल रही थी?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसी लापरवाही पर स्थायी रोक लग पाएगी.
जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में समय की कीमत सबसे ज्यादा होती है — और यही संदेश इस पूरे घटनाक्रम से सामने आता है.
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