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सीधी: सोन नदी में रेत माफियाओं का आतंक,कर्मचारियों को बंधक बनाकर की मारपीट

सोन नदी में अवैध रेत उत्खनन रोकने पहुंची सरकारी टीम पर रेत माफियाओं का हमला. कर्मचारियों को बंधक बनाकर की गई मारपीट, आरोपी ट्रैक्टर लेकर फरार

सीधी: सोन नदी में रेत माफियाओं का आतंक,कर्मचारियों को बंधक बनाकर की मारपीट

सीधी: मध्यप्रदेश के सीधी जिले में अवैध रेत उत्खनन एक बार फिर कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. सोन नदी के खुटेली घाट पर कार्रवाई करने पहुंची सरकारी टीम पर रेत माफियाओं द्वारा किए गए हमले ने प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था और खनन माफियाओं के बढ़ते हौसलों को उजागर कर दिया है.

यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध खनन का नेटवर्क किस हद तक संगठित और आक्रामक हो चुका है.

रात 3 बजे की कार्रवाई बनी हिंसक घटना

जानकारी के अनुसार, 29 मार्च 2026 की रात करीब 3 बजे सोन घड़ियाल विभाग की टीम को सोन नदी में अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई के लिए बहरी थाना क्षेत्र के खुटेली घाट पहुंचे.

मौके पर पहुंचने पर टीम ने देखा कि नदी में अवैध रूप से रेत निकासी जारी थी और कई ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत परिवहन किया जा रहा था. अधिकारियों को देखते ही मौके पर मौजूद लोग ट्रैक्टर छोड़कर भाग निकले, जिससे लगा कि कार्रवाई सफल हो जाएगी.

लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई.

माफियाओं की संगठित वापसी और हमला

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भागे हुए आरोपी थोड़ी देर बाद दोबारा संगठित होकर लौटे और उन्होंने टीम को चारों तरफ से घेर लिया. इसके बाद कर्मचारियों को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट की गई.

हमलावरों की संख्या अधिक होने के कारण सरकारी टीम खुद को बचाने में असहाय नजर आई. घटना के दौरान कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की और हिंसा की गई, जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई.

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपियों की दबंगई और कानून का खुला उल्लंघन साफ दिखाई देता है.

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ट्रैक्टर लेकर फरार हुए आरोपी

हमले के बाद आरोपी मौके से ट्रैक्टर लेकर फरार हो गए. इससे स्पष्ट होता है कि अवैध खनन में शामिल लोग न केवल संगठित हैं बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देने का साहस भी रखते हैं.

इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अवैध खनन माफिया अब कानून से बेखौफ हो चुके हैं?

पुलिस में मामला दर्ज, जांच शुरू

घटना के बाद बहरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. सोन घड़ियाल विभाग के डिप्टी संजीव सोनकर और कर्मचारी एहसान मलिक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है.

पुलिस ने निम्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है:

  • धारा 126(2)
  • धारा 132
  • धारा 296
  • धारा 121
  • धारा 351(3)
  • धारा 3(5)

आरोपियों में लवकेश उपाध्याय, प्रभांशु पाठक, पतुलखी निवासी समेत एक अज्ञात व्यक्ति को नामजद किया गया है. पुलिस द्वारा आरोपियों की तलाश जारी है.

कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद विभागीय कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है. रात के समय अवैध खनन रोकने के लिए गश्त करना अब बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पर्याप्त पुलिस सुरक्षा के ऐसे अभियानों को अंजाम देना कर्मचारियों की जान खतरे में डालना है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन माफिया अब स्थानीय स्तर पर मजबूत नेटवर्क बना चुके हैं, जिसके कारण कार्रवाई करने वाली टीम अक्सर निशाना बन जाती है.

स्थानीय लोगों की मांग: विशेष टीम गठित हो

घटना के बाद क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि:

  • घाटों पर स्थायी पुलिस चौकी बनाई जाए
  • रात में संयुक्त गश्त शुरू हो
  • अवैध खनन में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त की जाए
  • जिला स्तर पर विशेष टास्क फोर्स बनाई जाए

स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि यदि अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो सोन नदी का पर्यावरण और कानून व्यवस्था दोनों खतरे में पड़ जाएंगे.

प्रशासन का बयान

विभागीय अधिकारियों के अनुसार घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है. जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी और फरार ट्रैक्टरों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

सोन नदी में अवैध रेत उत्खनन: बढ़ती चुनौती

सोन नदी लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन का केंद्र बनी हुई है. निर्माण कार्यों में बढ़ती मांग और भारी मुनाफे के कारण रेत का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है.

इसके गंभीर प्रभाव सामने आ रहे हैं:

  • नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है
  • जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है
  • नदी किनारे कटाव बढ़ रहा है
  • भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है

विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित खनन भविष्य में पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है.

कानून बनाम माफिया: प्रशासन के सामने बड़ी परीक्षा

सीधी की यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए चेतावनी है. जब सरकारी टीम पर हमला होने लगे, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जाता है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या प्रशासन रेत माफियाओं पर सख्त कार्रवाई कर पाएगा या अवैध खनन का यह नेटवर्क और मजबूत होता जाएगा?

आगे क्या?

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी का इंतजार किया जा रहा है. क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि इस मामले में उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने की हिम्मत कोई न कर सके.

सोन नदी में बढ़ते अवैध उत्खनन को रोकना अब प्रशासन की प्राथमिकता बन चुका है. आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि कानून का डर कायम होता है या माफियाओं का आतंक जारी रहता है.

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