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सतना विधानसभा: कांग्रेस के साथ रहेगी जनता या बीजेपी, बीएसपी पर करेगी भरोसा?

सतना विधानसभा विंध्य की राजनीति में एक सक्रिय भूमिका निभाता है. साल 2003 से लेकर 2018 तक लगातार यहां से बीजेपी के शंकरलाल तिवारी ने जीत दर्ज की थी. 2018 के चुनाव में लंबे अंतराल के बाद यहां कांग्रेस की वापसी हुई है. कांग्रेस के सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा डब्बू ने जीत दर्ज की. इन्होंने बीजेपी को 12558 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी.

सतना विधानसभा के इतिहास में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत हार का सिलसिला चला आया. साल 1990 में बीजेपी से बृजेंद्र पाठक ने जीत दर्ज की थी. साल 1998 में कांग्रेस से सईद अहमद ने जीत दर्ज की थी. साल 2003 से लेकर 2018 तक यहां की जनता बीजेपी का साथ दिया.

जातिगत समीकरण
चुनाव आयोग के 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, सतना विधानसभा में कुल 2.30 लाख से ज्यादा वोटर्स हैं. इसमें 1.22 लाख से ज्यादा पुरुष और 1.08 लाख से ज्यादा महिला वोटर्स हैं. यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, पटेल, वैश्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति मिलकर निर्णायक स्थिति बनाते हैं.

2008 से 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर एक नजर 
विधानसभा चुनाव वर्ष 2018 में सतना से कांग्रेस उम्मीदवार सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा डब्बू और बीजेपी प्रत्याशी शंकरलाल तिवारी मैदान थे. कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा ने इस चुनाव में 60105 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी के शंकरलाल तिवारी को 47547 वोट मिले. इस चुनाव में भाजपा दूसरे और बीएसपी तीसरे नंबर पर थी.

इस सीट से 2013 का चुनाव भी दिलचस्प रहा जब यहां से दो ब्राह्मण बीजेपी की ओर से शंकरलाल तिवारी और कांग्रेस से राजाराम त्रिपाठी मैदान में उतरे थे. इस चुनाव में जीत बीजेपी प्रत्याशी शंकरलाल तिवारी की हुई. सवर्णों की लड़ाई से बीएसपी को भी फायदा हुआ.

विधानसभा चुनाव वर्ष 2008 में इस सीट से बीजेपी के शंकर लाल तिवारी और कांग्रेस से सईद अहमद को मैदान में उतारा गया था. इस चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था.