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Vindhya First

हेल्थ अलर्ट: बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम अंधा भी बना सकता है, हर दिन आधे घंटे की आउटडोर एक्टिविटी से बढ़ेगी आंखों की रोशनी

ज्यादा देर तक टीवी या मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कई तरह के नेत्र रोग हो सकते हैं, जिनमें से एक है मायोपिया. इसे शॉर्ट साइट या निकटदृष्टिता के नाम से भी जाना जाता है. इसमें दूर रखी चीजों को देखने में दिक्कत होती है जबकि पास रखी चीजें साफ दिखाई देती हैं. यह बीमारी ज्यादातर बच्चों में होती है. इस बीमारी में पुतली का आकार बदल जाता है, जिसकी वजह से प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बल्कि आगे की तरफ बनता है. जिसकी वजह से कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लग जाता है.

साल 2001 में दिल्ली में 7 प्रतिशत बच्चे मायोपिया से पीड़ित थे जबकि 2011 में यह बढ़कर 13.5 प्रतिशत हो गया. कोविड के बाद बच्चों में मायोपिया के मामले काफी तेजी से बढ़े और 20 से 22 प्रतिशत बच्चों में ये बीमारी पाई गई. लगभग बीस सालों में तीन गुना तेजी से बढ़ी इस बीमारी की वजह बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम है. मोबाइल, टीवी, लैपटॉप की वजह से बच्चों के आंखों की रोशनी कम हो रही है और उन्हे चश्मा लग जाता है. पहले इस बीमारी की शुरुआत 12 से 13 साल की उम्र में होती थी और 18-19 साल की उम्र में चशमा लग जाता था लेकिन अब इस बीमारी की शुरुआत कम उम्र में ही हो जाती है.

एम्स के डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को आउटडोर एक्टिविटी करवाई जाए. अगर बच्चा हर दिन आधा घंटा भी बाहर खेलता है तो उसकी आंखों की रोशनी में काफी फर्क पड़ता है और सुधार हो सकता है. साथ ही डॉक्टरों की यह भी सलाह है कि अगर बच्चों को चश्मा लगता है तो उन्हें चश्मा जरूर लगवाएं, वरना आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ सकता है.

मायोपिया के लक्षण और बचाव के बारे में जानने के लिए वीडियो पर क्लिक करें