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रीवा: छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश का NSUI ने किया स्वागत

रीवा: छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश का NSUI ने किया स्वागत

रीवा: छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश का NSUI ने किया स्वागत

रीवा: मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही मांग के बीच जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद छात्र राजनीति एक बार फिर सक्रिय होती नजर आ रही है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सितंबर के प्रथम सप्ताह तक छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले का भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने स्वागत किया है. रीवा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन ने इसे प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं की लोकतांत्रिक जीत बताया और चुनाव जल्द कराने की मांग दोहराई.

हाईकोर्ट के फैसले का किया स्वागत

रीवा में आयोजित प्रेस वार्ता में NSUI जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर संगठन लगातार संघर्ष कर रहा था. उन्होंने बताया कि NSUI द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन को सितंबर के प्रथम सप्ताह तक छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं.

उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल NSUI की जीत नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत है. छात्र लंबे समय से अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का इंतजार कर रहे थे.

प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI ने मांग की कि छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाएं. संगठन का कहना है कि प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में प्रत्येक छात्र अपने मताधिकार का उपयोग कर सीधे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव करता है.

पंकज उपाध्याय ने कहा कि प्रत्यक्ष प्रणाली छात्रों की भागीदारी को मजबूत करती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाती है. इससे हर छात्र को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलता है.

रीवा: छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश का NSUI ने किया स्वागत
रीवा: छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश का NSUI ने किया स्वागत

अप्रत्यक्ष प्रणाली पर जताई आपत्ति

NSUI जिलाध्यक्ष ने कहा कि अप्रत्यक्ष प्रणाली में केवल कक्षा प्रतिनिधियों का चुनाव होता है और वही आगे छात्रसंघ के पदाधिकारियों का चयन करते हैं. उनका आरोप है कि इस व्यवस्था में बंद कमरे की राजनीति और खरीद-फरोख्त की संभावना बढ़ जाती है.

उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव का उद्देश्य छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ना है. ऐसे में प्रत्यक्ष प्रणाली ही अधिक प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था साबित हो सकती है.

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10 वर्षों से नहीं हुए नियमित चुनाव

पंकज उपाध्याय ने कहा कि पिछले करीब 10 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से नहीं हो पाए हैं. इसका असर छात्र राजनीति और नेतृत्व विकास पर पड़ा है.

उन्होंने कहा कि छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला माना जाता है. यहीं से कई बड़े जनप्रतिनिधि और राजनीतिक नेता निकले हैं. चुनाव नहीं होने से युवाओं को नेतृत्व विकसित करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है.

सरकार पर लगाए आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान NSUI ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा. संगठन का आरोप है कि राज्य सरकार छात्रसंघ चुनाव कराने के पक्ष में गंभीर नहीं रही है.

पंकज उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान समय में छात्र और युवा सरकार की कई नीतियों से नाराज हैं. उन्होंने NEET जैसे मुद्दों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को मजबूत करने के लिए छात्रसंघ चुनाव आवश्यक हैं.

छात्र हितों की लड़ाई जारी रहने का दावा

NSUI जिलाध्यक्ष ने कहा कि संगठन की लड़ाई किसी छात्र संगठन के सामान्य कार्यकर्ताओं से नहीं है. उन्होंने कहा कि NSUI उन व्यवस्थाओं और नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहा है, जो छात्र हितों को प्रभावित करती हैं.

उन्होंने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रशासनिक माहौल को लेकर भी अपनी बात रखी और आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर विचारधारा आधारित प्रभाव देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों का वातावरण निष्पक्ष और लोकतांत्रिक होना चाहिए.

सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब छात्र संगठनों और विद्यार्थियों की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं. यदि सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करती है, तो करीब एक दशक बाद प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव का माहौल देखने को मिल सकता है.

फिलहाल NSUI ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए प्रत्यक्ष प्रणाली से जल्द छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग दोहराई है. अब यह देखना होगा कि सरकार इस दिशा में क्या निर्णय लेती है.

रिपोर्ट: हीरो गुप्ता 

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