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Toggleमऊगंज: कलेक्टर की पहल से 5 साल पुरानी आधार की गलती 10 मिनट में सुधरी
मऊगंज: कई बार सरकारी दस्तावेज में हुई एक छोटी-सी गलती किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी को मुश्किलों में डाल देती है. एक प्रमाण पत्र या पहचान पत्र में दर्ज त्रुटि के कारण आम नागरिकों को वर्षों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति पिछले पांच वर्षों से अपने आधार कार्ड में दर्ज जेंडर संबंधी गलती को ठीक कराने के लिए परेशान था. लेकिन जब मामला कलेक्टर तक पहुंचा तो वर्षों से लंबित समस्या का समाधान महज 10 मिनट में हो गया. यह घटना प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित निर्णय क्षमता का उदाहरण बन गई है.
पांच वर्षों तक भटकते रहे गोरेलाल सेन
मऊगंज जिले के ग्राम बिछरहटा निवासी गोरेलाल सेन पिछले पांच वर्षों से अपने आधार कार्ड में दर्ज जेंडर की त्रुटि को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे. आधार कार्ड में पुरुष की जगह महिला दर्ज होने के कारण उन्हें लगभग हर सरकारी कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.
उन्होंने कई बार संबंधित कार्यालयों में आवेदन दिए. अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाए. कई अधिकारियों से गुहार भी लगाई. इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका. एक छोटी-सी तकनीकी गलती उनके लिए बड़ी परेशानी बन चुकी थी.
सरकारी कामों में आ रही थी लगातार दिक्कत
आधार कार्ड आज लगभग हर सरकारी और निजी सेवा के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है. बैंकिंग सेवाओं से लेकर शासकीय योजनाओं तक, हर जगह आधार की आवश्यकता पड़ती है.
ऐसे में आधार कार्ड में गलत जेंडर दर्ज होने के कारण गोरेलाल सेन को बार-बार दस्तावेज सत्यापन में परेशानी का सामना करना पड़ता था. कई बार उन्हें अपनी पहचान साबित करनी पड़ती थी. इससे उनका समय और आर्थिक संसाधन दोनों प्रभावित हो रहे थे.
कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
लगातार प्रयासों के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गोरेलाल सेन अपनी शिकायत लेकर मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन के पास पहुंचे.
कलेक्टर ने उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी. उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और बिना किसी देरी के संबंधित अधिकारियों को बुलाकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. कलेक्टर ने ई-गवर्नेंस प्रबंधक को मौके पर ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा.
10 मिनट में सुधरी पांच साल पुरानी गलती
कलेक्टर के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की. आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद आधार कार्ड में दर्ज जेंडर संबंधी त्रुटि को सुधार दिया गया.
जिस समस्या के समाधान के लिए गोरेलाल सेन पिछले पांच वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे, वही कार्य महज 10 मिनट में पूरा हो गया. समस्या का तत्काल समाधान होने पर गोरेलाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.
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भावुक हुए गोरेलाल सेन
अपनी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने के बाद गोरेलाल सेन भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी शिकायत पर इतनी जल्दी कार्रवाई होगी.
उन्होंने मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि शुरुआत में ही इस तरह संवेदनशीलता दिखाई जाती तो उन्हें पांच वर्षों तक परेशान नहीं होना पड़ता.
कलेक्टर ने क्या कहा
मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील समाधान जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों को राहत देना है, न कि उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगवाना. यदि किसी नागरिक को किसी प्रकार की प्रशासनिक समस्या का सामना करना पड़ता है तो उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा.
सुशासन का बना उदाहरण
यह मामला केवल आधार कार्ड की गलती सुधारने तक सीमित नहीं है. यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का उदाहरण भी है.
सरकारी व्यवस्था को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रहती हैं कि छोटे-छोटे कामों के लिए लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में मऊगंज का यह मामला बताता है कि यदि अधिकारी गंभीरता और इच्छाशक्ति के साथ कार्य करें तो वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है.
आम नागरिकों का बढ़ा भरोसा
गोरेलाल सेन के मामले ने यह संदेश भी दिया है कि प्रशासन यदि आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता देकर कार्य करे तो लोगों का विश्वास मजबूत होता है. इससे न केवल शासन-प्रशासन की छवि बेहतर होती है, बल्कि नागरिकों को भी व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की संवेदनशील पहल अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है. आम नागरिकों की छोटी-छोटी समस्याओं का समय पर समाधान ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है.
जनसुनवाई की व्यवस्था का मिला सकारात्मक परिणाम
प्रदेश सरकार लगातार जनसुनवाई और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने का दावा करती रही है. मऊगंज का यह मामला बताता है कि जब अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं तो लोगों को तत्काल राहत मिल सकती है.
गोरेलाल सेन की पांच वर्षों पुरानी परेशानी का महज 10 मिनट में समाधान इस बात का उदाहरण है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील कार्यशैली से आम नागरिकों की जिंदगी आसान बनाई जा सकती है.
रिपोर्ट: लवकेश सिंह गहरवर