Table of Contents
Toggleसीधी:सीधी के स्कूल में शिक्षक पर नशे के आरोप, बच्चों ने बताई चौंकाने वाली बात
स्कूल बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करने की जगह है. यहां शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, उन्हें अनुशासन सिखाते हैं और बेहतर भविष्य के लिए तैयार करते हैं.
लेकिन अगर इसी स्कूल में शिक्षक पर शराब के नशे में आने के आरोप लगें, तो सवाल सिर्फ एक शिक्षक पर नहीं उठता. सवाल पूरी व्यवस्था की निगरानी पर खड़ा होता है.
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के सिहावल क्षेत्र से ऐसा ही मामला सामने आया है. ग्राम डिहुली नंबर-4 के प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल पर शराब के नशे में स्कूल आने और स्कूल परिसर में शराब पीने के आरोप लगे हैं.
मामले का एक वीडियो भी सामने आया है. इसके बाद जब पड़ताल की गई, तो बच्चों और स्कूल के दूसरे शिक्षक ने भी संबंधित शिक्षक को लेकर गंभीर आरोप लगाए.
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है.
यह भी पढ़ें: शहडोल: चिकन बनाने के विवाद में बेटे ने पिता की हत्या की, मां गंभीर घायल
वायरल वीडियो के बाद सामने आया मामला
डिहुली नंबर-4 का प्राथमिक विद्यालय सीधी जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर सिहावल जनपद पंचायत क्षेत्र में स्थित है.
वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामले की पड़ताल की गई. इस दौरान शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल स्कूल के एक कमरे में लेटे हुए मिले.
जब उनसे शराब पीने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने शराब पीने से इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है और इसी वजह से उनकी तबीयत खराब है.
इसके बाद शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड के सामने पहुंचे.
इस दौरान उनके चलने और बोलने के तरीके को लेकर सवाल उठे.
बताया गया कि उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर जिला कलेक्टर विकास मिश्रा का नाम लिखने के बजाय ‘मनीष मिश्रा’ लिख दिया.
इसके बाद शिक्षक की स्थिति को लेकर सवाल और गहरे हो गए.
बच्चों ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर दावे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की ओर से सामने आए हैं.
बच्चों का आरोप है कि शिक्षक अक्सर शराब के नशे में स्कूल आते हैं.
उनके मुताबिक, कई बार शिक्षक कक्षा में गिर जाते हैं. कुछ मौकों पर बच्चों के ऊपर गिरने की स्थिति भी बन जाती है.
बच्चों ने यह भी दावा किया कि शिक्षक कई बार स्कूल में उल्टी कर देते हैं.
अगर बच्चों के ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल शिक्षक की अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहेगा.
यह सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के माहौल से जुड़ा मामला बन जाएगा.
अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना किया बंद?
बच्चों ने यह भी दावा किया कि शिक्षक के कथित व्यवहार से परेशान होकर कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया.
हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है.
लेकिन अगर किसी सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है, तो शिक्षा विभाग के लिए यह गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए.
दूसरे शिक्षक ने भी उठाए सवाल
स्कूल में पदस्थ दूसरे शिक्षक अशोक कुमार शर्मा ने भी दिनेश प्रसाद कोल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.
उनका दावा है कि पिछले करीब दो वर्षों से स्कूल में ऐसी स्थिति बनी हुई है.
अशोक कुमार शर्मा के मुताबिक, संबंधित शिक्षक महीने में मुश्किल से दो-तीन दिन ही स्कूल आते हैं.
उनका आरोप है कि कई बार शिक्षक नशे की हालत में भी स्कूल पहुंचते हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले की शिकायत कई बार संकुल प्राचार्य और बीआरसी कार्यालय में की गई.
शिकायत के साथ उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड भी अधिकारियों को दिए जाने की बात कही गई है.
उपस्थिति को लेकर भी बड़ा सवाल
मामले में केवल नशे के आरोप ही नहीं हैं.
शिक्षक की स्कूल में उपस्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं.
दूसरे शिक्षक का दावा है कि संबंधित शिक्षक की उपस्थिति बेहद कम रही. इसके बावजूद उन्हें पूरा वेतन मिलता रहा.
अगर यह आरोप सही है, तो मामला और गंभीर हो सकता है.
क्योंकि सरकारी कर्मचारी का वेतन उसकी स्वीकृत सेवा और उपस्थिति से जुड़े नियमों के अनुसार जारी होता है.
ऐसे में यह जांचना जरूरी होगा कि उपस्थिति रजिस्टर में क्या दर्ज है और वेतन किस आधार पर जारी किया गया.
200 बच्चों से घटकर 28 रह गई संख्या?
इस मामले में स्कूल में बच्चों की संख्या को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है.
दूसरे शिक्षक अशोक कुमार शर्मा के मुताबिक, पहले इस स्कूल में करीब 200 बच्चे पढ़ते थे.
अब यहां छात्रों की संख्या घटकर सिर्फ 28 रह गई है.
हालांकि, बच्चों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट के पीछे केवल शिक्षक की कथित कार्यप्रणाली जिम्मेदार है या इसके पीछे दूसरी वजहें भी हैं, यह जांच के बाद ही साफ होगा.
फिर भी यह आंकड़ा शिक्षा विभाग के लिए जांच का विषय जरूर होना चाहिए.
अधिकारियों ने क्या कहा?
मामले में संकुल प्राचार्य टीकर सुरेश प्रसाद कोल ने बताया कि उन्होंने वायरल वीडियो देखा है.
उनके मुताबिक, संबंधित शिक्षक को कई बार समझाइश दी गई है.
इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने की बात सामने आई है.
वहीं एसीएस दिवाकर प्रसाद शुक्ला ने बताया कि शिक्षकों का वेतन संकुल से भेजी गई उपस्थिति के आधार पर जारी होता है.
प्रारंभिक जानकारी में संबंधित शिक्षक की केवल चार दिन की उपस्थिति सामने आने की बात कही गई है.
जबकि शिक्षक की ओर से पूरी उपस्थिति भेजे जाने की बात कही जा रही है.
ऐसे में अब उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच इस मामले का अहम हिस्सा होगी.
अधिकारी ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है.
शिक्षक ने क्या सफाई दी?
आरोपों के बीच शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल ने भी अपना पक्ष रखा है.
उन्होंने कभी-कभार शराब पीने की बात स्वीकार की है.
शिक्षक का कहना है कि वे ब्लड प्रेशर के मरीज हैं और डॉक्टर की सलाह पर शराब का सेवन करते हैं.
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे शराब की बोतल स्कूल लेकर आते हैं.
अब यह जांच का विषय है कि स्कूल परिसर में शराब का सेवन हुआ था या नहीं और क्या शिक्षक ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में थे.
जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच में कई सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है.
पहला सवाल: शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति कितनी रही?
दूसरा सवाल: उपस्थिति रजिस्टर में क्या दर्ज किया गया?
तीसरा सवाल: वेतन किस आधार पर जारी किया गया?
चौथा सवाल: शिक्षक के खिलाफ पहले कितनी शिकायतें की गईं?
पांचवां सवाल: शिकायतों के बाद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?
छठा सवाल: क्या शिक्षक ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाए गए?
सातवां सवाल: क्या स्कूल परिसर में शराब का सेवन हुआ?
आठवां सवाल: स्कूल में बच्चों की संख्या इतनी कम क्यों हुई?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा.
सिर्फ शिक्षक नहीं, निगरानी व्यवस्था भी सवालों में
अगर जांच में शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो विभाग को यह भी देखना होगा कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
अगर किसी शिक्षक की उपस्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे, तो उसकी निगरानी क्यों नहीं की गई?
अगर बच्चों और अभिभावकों की ओर से शिकायतें आई थीं, तो उनका समाधान क्यों नहीं हुआ?
और अगर उपस्थिति रिकॉर्ड और वेतन भुगतान में अंतर पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
यही सवाल इस मामले को सिर्फ एक शिक्षक के विवाद से आगे ले जाते हैं.
बच्चों के भविष्य से जुड़ा है मामला
स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए शिक्षक उनके सीखने और विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं.
ऐसे में शिक्षक के व्यवहार का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है.
अगर बच्चों के सामने शिक्षक के नशे में होने या स्कूल में शराब लाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्कूल के अनुशासन और बच्चों की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर स्थिति होगी.
इसलिए मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय निष्पक्ष जांच जरूरी है.
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
डिहुली नंबर-4 प्राथमिक विद्यालय का मामला फिलहाल आरोपों, दावों और शिक्षक की सफाई के बीच है.
शिक्षा विभाग ने जांच की बात कही है.
अब देखना होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष और कितनी जल्द होती है.
उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच होती है या नहीं.
शिकायतों की पड़ताल होती है या नहीं.
और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है.
क्योंकि स्कूल सिर्फ चार दीवारों और ब्लैकबोर्ड का नाम नहीं है.
स्कूल वह जगह है जहां बच्चों के भविष्य की नींव रखी जाती है.
इसलिए सवाल सिर्फ एक शिक्षक पर लगे आरोपों का नहीं है. सवाल उन 28 बच्चों के भविष्य का भी है, जो आज इसी स्कूल में पढ़कर अपने बेहतर कल का सपना देख रहे हैं.
रिपोर्ट: मनोज शुक्ला
यह भी पढ़ें: MP भर्ती 2026: 19 हजार सरकारी नौकरियों का मौका, अक्टूबर में पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा