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Toggleसीधी: 25 साल पुराने स्कूल भवन में पढ़ रहे बच्चे, सुरक्षा पर सवाल
सीधी: सीधी जिले के पखड़ा गांव स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है. ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल भवन काफी पुराना हो चुका है और लंबे समय से जरूरी मरम्मत नहीं होने के कारण इसकी हालत खराब होती जा रही है.
सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है. जिस भवन में बच्चे रोजाना पढ़ाई करने पहुंचते हैं, उसी भवन के कई हिस्से बदहाल नजर आ रहे हैं.ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
2001 में हुआ था स्कूल भवन का निर्माण
जानकारी के मुताबिक पखड़ा के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय के भवन का निर्माण वर्ष 2001 में कराया गया था.यानी वर्ष 2026 में इस भवन को बने करीब 25 साल हो चुके हैं.
ग्रामीणों का आरोप है कि इतने लंबे समय के दौरान भवन में आवश्यक स्तर पर मरम्मत और रखरखाव का काम नहीं कराया गया. यही वजह है कि अब भवन की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
हालांकि भवन की तकनीकी स्थिति और उसकी मजबूती को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकता है.
बच्चों के स्कूल की तस्वीरें चिंता बढ़ा रही हैं
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्कूल भवन के कई हिस्सों की स्थिति खराब दिखाई दी.ये कोई बंद या इस्तेमाल से बाहर पड़ा भवन नहीं है. इसी भवन में बच्चे रोजाना पढ़ने आते हैं और कक्षाएं संचालित होती हैं.
ऐसे में भवन की स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा का है.ग्रामीणों का कहना है कि अगर भवन का कोई हिस्सा अचानक क्षतिग्रस्त होकर गिरता है तो इसकी चपेट में बच्चे या शिक्षक आ सकते हैं.
शिकायत के बावजूद मरम्मत का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने स्कूल भवन की खराब स्थिति को लेकर शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत की है.
ग्रामीणों की ओर से दिए गए आवेदन में भी स्कूल भवन की मरम्मत कराने की मांग की गई है. आवेदन में भवन की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है.ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें पहले भी की गईं, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ.
अब ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी स्कूल भवन का निरीक्षण करें और इसकी वास्तविक स्थिति का तकनीकी आकलन कराएं.
स्कूल प्रबंधन के पास पर्याप्त फंड नहीं होने की बात
स्कूल की मरम्मत को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से बताया जाता है कि उनके पास पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होता.यही बात अब एक बड़े सवाल को जन्म देती है. अगर किसी सरकारी स्कूल की इमारत की हालत ऐसी हो जाए कि उसकी सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगें, तो उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी किस विभाग की है?
फंड किस स्तर से उपलब्ध कराया जाएगा, मरम्मत कौन कराएगा और काम की निगरानी कौन करेगा, इन सवालों का जवाब जरूरी है.क्योंकि स्कूल भवन का रखरखाव सिर्फ सुविधा का मामला नहीं है. यह बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है.
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शौचालय पर ताला, बाउंड्रीवाल भी नहीं
समस्या सिर्फ स्कूल भवन तक सीमित नहीं दिखाई देती.ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्कूल के शौचालय पर ताला लगा हुआ दिखाई दिया. इसके अलावा स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल भी नहीं है.ऐसे में बच्चों के लिए स्कूल का सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
स्कूल परिसर में बच्चों के लिए बनाई गई पानी की टंकी और उससे जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर भी बदहाल दिखाई दिया.इन परिस्थितियों में सवाल यह है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी.
देश के स्कूलों की सुविधाओं पर नीति आयोग के आंकड़े
पखड़ा स्कूल की स्थिति को देश में स्कूली बुनियादी सुविधाओं की व्यापक तस्वीर से भी जोड़कर देखा जा सकता है.नीति आयोग की School Education System in India: A Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement रिपोर्ट में UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि देश में 61,540 स्कूलों में कोई भी usable toilet नहीं था.
इसी रिपोर्ट के अनुसार 14,505 स्कूलों में functional water source नहीं था, जबकि करीब 1.19 लाख स्कूलों में functional electricity उपलब्ध नहीं थी.रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्कूलों के लिए बिजली, पेयजल, बाउंड्रीवाल, functional toilets और hygiene facilities जैसी foundational infrastructure सुविधाएं जरूरी हैं.
वहीं, 2024-25 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में बिजली सुविधा वाले स्कूलों का प्रतिशत 93.6 और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता 99.3 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी.इससे साफ है कि राष्ट्रीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है, लेकिन कई स्कूलों में अभी भी सुविधा और उसके functional होने के बीच का अंतर चिंता का विषय है.
चुनाव के समय बना था पोलिंग बूथ
ग्रामीणों के मुताबिक चुनाव के दौरान इसी स्कूल भवन का इस्तेमाल पोलिंग बूथ के तौर पर भी किया गया था.
उनका कहना है कि चुनाव के समय भवन को उपयोग के योग्य बनाने के लिए कुछ अस्थायी व्यवस्थाएं की गई थीं.इसी आधार पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि अगर चुनाव के दौरान भवन को उपयोग के लायक बनाने की व्यवस्था की जा सकती है, तो बच्चों की रोजाना पढ़ाई और सुरक्षा के लिए स्थायी मरम्मत क्यों नहीं कराई जा रही? हालांकि, चुनाव के दौरान की गई व्यवस्थाओं और उनकी प्रकृति की आधिकारिक जानकारी संबंधित विभाग से सामने आना बाकी है.
हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी स्कूल भवन का निरीक्षण करें और उसकी तकनीकी स्थिति की जांच कराएं.
अगर भवन की मरम्मत जरूरी है तो जल्द से जल्द काम शुरू कराया जाए. साथ ही स्कूल के शौचालय, पानी की व्यवस्था और बाउंड्रीवाल जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी दुरुस्त किया जाए.ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई किसी हादसे के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
पखड़ा के इस स्कूल की तस्वीरें एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती हैं. सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षित भवन और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना आखिर किसकी जिम्मेदारी है?बच्चों की शिक्षा सिर्फ किताबों और शिक्षकों तक सीमित नहीं है. इसके लिए सुरक्षित स्कूल भवन, स्वच्छ शौचालय, पानी, बिजली और सुरक्षित परिसर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी हैं.
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन स्कूल भवन की स्थिति का तकनीकी आकलन कब कराता है और मरम्मत को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं.क्योंकि मामला सिर्फ ईंट, सीमेंट और दीवारों का नहीं है. मामला उन बच्चों का है, जो हर सुबह अपना भविष्य बनाने के लिए इसी स्कूल में पहुंचते हैं.
अब सवाल यही है कि प्रशासन इस शिकायत पर समय रहते कार्रवाई करेगा या फिर किसी हादसे के बाद व्यवस्था जागेगी.
रिपोर्ट- दिनेंद्र कुशवाहा