Skip to main content

Vindhya First

रीवा: कल्पना मिश्रा मौ*त केस, कार्रवाई के बीच डॉ. बीनू सिंह पर उठे सवाल

कल्पना मिश्रा मौत मामले में कार्रवाई जारी है, लेकिन 2023 के पुराने आदेश को लेकर डॉ. बीनू सिंह पर अब सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग सभी आदेशों की समान रूप से पालना करेगा? पूरी कहानी पढ़िए

रीवा: कल्पना मिश्रा मौ*त केस, कार्रवाई के बीच डॉ. बीनू सिंह पर उठे सवाल

गांधी मेमोरियल अस्पताल में 26 अगस्त 2026 को प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है. मामले में जांच, निलंबन और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया के बीच अब एक पुराना सरकारी आदेश भी चर्चा के केंद्र में है. यह आदेश वर्ष 2023 का है और इसमें डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई के साथ तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने का उल्लेख था.

अब सवाल यह है कि 2023 के उस आदेश के बाद दोनों अधिकारियों के संबंध में विभागीय स्तर पर क्या-क्या कार्रवाई हुई? क्या आदेश का पूरी तरह पालन हुआ? और यदि हुआ, तो उसका रिकॉर्ड क्या है?

ये भी पढ़ें: रीवा: कल्पना मिश्रा मामले में विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने उठाया

कल्पना मिश्रा मौत मामले में कार्रवाई तेज

कल्पना मिश्रा की मौत के बाद गठित जांच प्रक्रिया में अस्पताल की व्यवस्थाओं, उपचार से जुड़े पहलुओं और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है. सरकार ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी. बाद में कार्रवाई का दायरा भी बढ़ा.

16 सितंबर 2026 को जारी कार्रवाई के तहत डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं समाप्त करने का आदेश सामने आया. वहीं कल्पना मिश्रा की मौत से जुड़े अथर्व ब्लड सेंटर की अनियमितताओं के मामले में औषधि निरीक्षक राधेश्याम बट्टी को निलंबित किया गया और ब्लड सेंटर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए.

यानी मौजूदा मामले में सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का दायरा केवल अस्पताल के डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ब्लड सेंटर और औषधि प्रशासन से जुड़े स्तर तक भी पहुंचा है.

तीन साल पुरानी फाइल ने फिर खड़े किए सवाल

मौजूदा कार्रवाई के बीच वर्ष 2023 का एक सरकारी आदेश फिर चर्चा में आया है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 7 मार्च 2023 को मध्य प्रदेश शासन की ओर से जारी आदेश में संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति विभाग से जुड़े मामले में डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ सेवा से पृथक करने की कार्रवाई का उल्लेख था. इसी प्रकरण में डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने की कार्रवाई भी दर्ज थी.

मामला इतना पुराना है कि मार्च 2023 में विधानसभा में भी इस प्रकरण को लेकर चर्चा हुई थी. विधानसभा की कार्यवाही में तत्कालीन सरकार की ओर से जांच समिति द्वारा गड़बड़ी पाए जाने और डॉ. बीनू सिंह तथा डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा का उल्लेख मिलता है.

यही पुराना आदेश अब कल्पना मिश्रा मौत मामले की मौजूदा कार्रवाई के बीच एक अहम सवाल खड़ा कर रहा है.

सोनल अग्रवाल पर कार्रवाई हुई, बीनू सिंह के मामले में क्या हुआ?

डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ 2023 से लंबित कार्रवाई अब सेवा समाप्ति तक पहुंच गई है. लेकिन उसी पुराने प्रकरण में डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने का निर्णय भी दर्ज था.

ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उस आदेश के बाद डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किस स्तर तक हुई?

क्या तीन वेतनवृद्धियां वास्तव में रोकी गईं?

क्या आदेश की अनुपालना का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है?

अगर आदेश का पालन हुआ, तो उसके बाद उनकी विभागीय जिम्मेदारियों और पदस्थापनाओं से जुड़ी प्रक्रिया क्या रही?

और यदि आदेश का पालन लंबित रहा, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या विभागीय स्तर पर थी?

इन सवालों का जवाब किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि सरकारी आदेश की वास्तविक अनुपालना को स्पष्ट करने के लिए जरूरी है.

‘एक आदेश, दो नाम और कार्रवाई का अलग रास्ता क्यों?’

इस पूरे मामले में सवाल यह नहीं है कि किसी अधिकारी को बिना जांच दोषी माना जाए. सवाल यह है कि एक ही पुराने प्रकरण में जारी सरकारी आदेश के बाद हुई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों न किया जाए?

यदि डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ 2023 का आदेश वर्षों बाद भी प्रभावी माना गया और अब उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई हुई, तो उसी आदेश में डॉ. बीनू सिंह से जुड़ी कार्रवाई का वर्तमान स्टेटस भी सामने आना चाहिए.

क्या उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकी गईं?

अगर रोकी गईं तो किस तारीख से और किस आदेश के तहत?

क्या इसके बाद कोई अन्य विभागीय आदेश जारी हुआ?

क्या उनके पद या जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ?

इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही 2023 के आदेश की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.

स्वास्थ्य मंत्री के जवाब से भी बढ़ी चर्चा

इसी मुद्दे पर जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से सवाल किया गया तो, उन्होंने संबंधित आदेश पढ़ने की बात कही और डॉ. बीनू सिंह को लेकर पूछे गए सवाल पर भी जवाब दिया.

स्वास्थ्य मंत्री के बयान का पूरा संदर्भ और आधिकारिक आदेश सामने रखकर ही इस हिस्से को समझना जरूरी है. किसी मंत्री के संक्षिप्त बयान के आधार पर कार्रवाई की पूरी स्थिति तय नहीं की जा सकती. इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज वही 2023 का आदेश और उसके बाद की अनुपालना रिपोर्ट होगी.

डीन बोले—कार्रवाई अभी जारी है

पूरे मामले में जब मेडिकल कॉलेज के डीन से स्थिति जानने की कोशिश की गई तो उनका कहना है कि कार्रवाई अभी जारी है और दो दिन बाद पूरे मामले पर बयान दिया जाएगा.

इसका मतलब यह है कि फिलहाल विभागीय प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका पर आगे कार्रवाई होती है और किन मामलों में विभाग अपना अंतिम निर्णय लेता है.

‘फाइल खुली है तो पूरी फाइल सामने आए’

कल्पना मिश्रा मौत मामले में कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि किस अधिकारी पर क्या कार्रवाई हुई.

सवाल यह भी है कि अस्पताल की व्यवस्था से जुड़े पुराने मामलों में लिए गए निर्णयों का कितना पालन हुआ और उनकी निगरानी किस स्तर पर की गई?

अगर 2023 में किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी हुआ था, तो उसकी अनुपालना का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए. अगर किसी आदेश में सेवा समाप्ति या वेतनवृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई दर्ज थी, तो उसके बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए.

क्योंकि किसी भी सरकारी कार्रवाई की विश्वसनीयता केवल आदेश जारी होने से नहीं, बल्कि उसके निष्पक्ष और पूर्ण अनुपालन से तय होती है.

अब आगे क्या?

कल्पना मिश्रा मौत मामले की जांच अभी जारी है. इस मामले में पहले ही कई स्तरों पर कार्रवाई हो चुकी है और अब ब्लड सेंटर से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर भी आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं.

ऐसे में आने वाले दिनों में तीन बातें महत्वपूर्ण रहेंगी—पहली, कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत की जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या आता है; दूसरी, जांच में सामने आने वाली अन्य जिम्मेदारियों पर क्या कार्रवाई होती है; और तीसरी, 2023 के पुराने आदेश की डॉ. बीनू सिंह के संबंध में वास्तविक अनुपालना क्या रही.

फिलहाल सवाल कायम है—अगर 2023 की फाइल अब फिर खुली है, तो क्या उस फाइल में दर्ज हर आदेश और उसकी अनुपालना का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक होगा?

यही जानकारी यह स्पष्ट करेगी कि विभागीय कार्रवाई किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ी.

रिपोर्ट: हीरो गुप्ता

ये भी पढ़ें: सिंगरौली: एनटीपीसी विंध्याचल में सीईआरसी का दौरा, तकनीकी नवाचार से सामाजिक सरोकार तक हुई समीक्षा