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सिंगरौली: एनटीपीसी विंध्याचल में सीईआरसी का दौरा, तकनीकी नवाचार से सामाजिक सरोकार तक हुई समीक्षा

सिंगरौली में सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल का एनटीपीसी विंध्याचल दौरा—तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सीएसआर कार्यों की समीक्षा

सिंगरौली: एनटीपीसी विंध्याचल में सीईआरसी का दौरा, तकनीकी नवाचार से सामाजिक सरोकार तक हुई समीक्षा

सिंगरौली. देश के प्रमुख विद्युत उत्पादन केंद्रों में शामिल एनटीपीसी विंध्याचल का 12 और 13 सितंबर 2026 को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दौरा किया. सीईआरसी के चेयरपर्सन श्री जिष्णु बरुआ और सचिव श्री हरप्रीत सिंह प्रूथी ने इस दौरान विद्युत उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाओं के साथ तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया.

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी विंध्याचल के व्यू प्वाइंट, स्टेज-III कंट्रोल रूम और कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा का निरीक्षण किया. इसके अलावा एसएमसी बैठक में स्टेशन की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा की गई. दौरे का सामाजिक पक्ष भी खास रहा, जहां जरूरतमंद लाभार्थियों को सहायक उपकरण और कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं.

यह दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ऊर्जा क्षेत्र में बिजली उत्पादन के साथ तकनीकी दक्षता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्थानीय समुदायों के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व को भी लगातार महत्व दिया जा रहा है.

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तकनीकी व्यवस्थाओं का लिया जायजा

सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी विंध्याचल की महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया. प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में स्टेशन के व्यू प्वाइंट के साथ स्टेज-III कंट्रोल रूम का भ्रमण प्रमुख रहा.

कंट्रोल रूम में सीईआरसी अधिकारियों ने युवा अभियंताओं से संवाद किया. इस दौरान अभियंताओं के कार्य, जिम्मेदारियों और उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली गई.

विद्युत उत्पादन संयंत्रों में कंट्रोल रूम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी, संचालन और विभिन्न तकनीकी गतिविधियों के समन्वय में यहां तैनात अभियंताओं की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण रहती है.

ऐसे में सीईआरसी अधिकारियों का युवा अभियंताओं के साथ संवाद तकनीकी कार्यप्रणाली को समझने के साथ-साथ नई पीढ़ी के इंजीनियरों की भूमिका को जानने का अवसर भी रहा.

कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा बनी आकर्षण का केंद्र

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी विंध्याचल की कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा का भी अवलोकन किया. इस सुविधा में किए जा रहे तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों की प्रतिनिधिमंडल ने सराहना की.

ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही हैं.ऐसे में कार्बन से जुड़े तकनीकी प्रयोग भविष्य की ऊर्जा और पर्यावरणीय रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं.

एनटीपीसी विंध्याचल में इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों का निरीक्षण यह बताता है कि विद्युत उत्पादन के पारंपरिक मॉडल के साथ नई तकनीकी संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है.

एसएमसी बैठक में उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा

दौरे के दौरान एसएमसी बैठक आयोजित की गई. बैठक में एनटीपीसी विंध्याचल की प्रमुख उपलब्धियों, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों और स्टेशन के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई.

बैठक में सतत राख उपयोग और राख प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा सीएसआर गतिविधियों तथा स्टेशन को मिले विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों के बारे में भी जानकारी साझा की गई.

बैठक में श्री किशोर कुमार होता, कार्यकारी निदेशक, विंध्याचल और श्रीमती रूमा दे शर्मा, महाप्रबंधक, मानव संसाधन सहित एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

राख प्रबंधन क्यों महत्वपूर्ण है?

कोयला आधारित विद्युत उत्पादन में राख प्रबंधन एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय विषय है. बिजली उत्पादन के साथ उत्पन्न राख का सुरक्षित, वैज्ञानिक और उपयोगी प्रबंधन जरूरी होता है.

सतत राख उपयोग पर चर्चा इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इससे औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले अपशिष्ट के उपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.

हालांकि राख प्रबंधन की सफलता का वास्तविक आकलन उसके उपयोग, सुरक्षित निपटान, पर्यावरणीय प्रभाव और निर्धारित मानकों के अनुपालन के आधार पर किया जाता है. इसलिए ऐसे प्रयासों की निरंतर निगरानी और पारदर्शी आंकड़े महत्वपूर्ण हैं.

सीएसआर के जरिए जरूरतमंदों तक पहुंची मदद

एनटीपीसी विंध्याचल के इस दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा. 13 सितंबर को सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी विंध्याचल की सीएसआर पहलों के तहत आयोजित जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में सहभागिता की.

जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र और ओपन शेल्टर होम में जरूरतमंद लाभार्थियों को विभिन्न सहायक उपकरण वितरित किए गए.

इनमें शामिल रहे—

  • श्रवण यंत्र
  • मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल
  • व्हीलचेयर
  • स्टेशनरी किट

सहायक उपकरणों का वितरण जरूरतमंद लोगों के दैनिक जीवन को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है. खासतौर पर गतिशीलता से जुड़े उपकरण दिव्यांगजनों के लिए आवागमन और आत्मनिर्भरता में उपयोगी साबित हो सकते हैं.

हालांकि किसी भी सीएसआर कार्यक्रम का प्रभाव केवल वितरण कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए. यह भी महत्वपूर्ण है कि लाभार्थियों की वास्तविक जरूरतों की पहचान हो और उन्हें मिलने वाली सहायता का उपयोग लंबे समय तक प्रभावी तरीके से हो सके.

छात्राओं को साइकिल, शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा

सीएसआर गतिविधियों के तहत सूर्य भवन गेस्ट हाउस में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, बलियरी की छात्राओं को साइकिलें भी वितरित की गईं.

ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में छात्राओं के लिए आवागमन शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है. विद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच में परिवहन की सुविधा होने से छात्राओं को दैनिक आवागमन में मदद मिल सकती है.

साइकिल वितरण की इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उनकी शिक्षा तक पहुंच को प्रोत्साहित करना है.

यह पहल सीएसआर गतिविधियों को केवल आर्थिक सहायता के बजाय शिक्षा और सामाजिक विकास से जोड़ने की दिशा में भी देखी जा सकती है.

तकनीक से लेकर समाज तक, दौरे में दिखे कई पहलू

सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल के दौरे को केवल एक औपचारिक निरीक्षण के तौर पर नहीं देखा जा सकता. कार्यक्रम के दौरान तकनीकी संचालन, पर्यावरणीय पहल और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया.

क्षेत्र प्रमुख पहल महत्व
तकनीक स्टेज-III कंट्रोल रूम का भ्रमण तकनीकी संचालन और निगरानी
नवाचार कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा पर्यावरण और नई तकनीक
पर्यावरण राख प्रबंधन और सतत उपयोग पर्यावरणीय जिम्मेदारी
सामाजिक सरोकार सहायक उपकरण वितरण जरूरतमंदों को सहायता
शिक्षा छात्राओं को साइकिल वितरण आवागमन और शिक्षा में सुविधा

ऊर्जा उत्पादन के बड़े संस्थानों के लिए इन सभी क्षेत्रों का महत्व अलग-अलग है. बिजली उत्पादन जहां देश की ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा है, वहीं पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर संस्थान की भूमिका को व्यापक बनाते हैं.

सिंगरौली के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

सिंगरौली को देश के प्रमुख ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां विद्युत उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियां स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा विकास से सीधे जुड़ी हैं.

ऐसे क्षेत्र में बड़े औद्योगिक संस्थानों की भूमिका सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहती. स्थानीय समुदाय, पर्यावरण और सामाजिक विकास से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण होते हैं.

एनटीपीसी विंध्याचल की सीएसआर गतिविधियां इसी संदर्भ में स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं. दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना और छात्राओं को साइकिल देना सीधे तौर पर लाभार्थियों की जरूरतों से जुड़ी पहल है.

वहीं कार्बन-टू-मेथनॉल जैसी तकनीकी पहल और राख प्रबंधन पर चर्चा ऊर्जा उत्पादन के पर्यावरणीय पक्ष को सामने लाती है.

आगे की राह में पारदर्शिता और परिणाम महत्वपूर्ण

किसी भी तकनीकी या सामाजिक पहल की सफलता उसके लंबे समय के परिणामों से तय होती है. इसलिए एनटीपीसी विंध्याचल में किए जा रहे नवाचारों और सीएसआर कार्यक्रमों के संदर्भ में उनके वास्तविक प्रभाव को लगातार मापना महत्वपूर्ण होगा.

तकनीकी क्षेत्र में यह देखना जरूरी है कि नई परियोजनाओं से उत्पादन क्षमता, संसाधनों के उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों पर क्या असर पड़ रहा है. इसी तरह सीएसआर के क्षेत्र में यह देखना जरूरी है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद वर्ग तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है.

स्थानीय स्तर पर कुछ सवाल भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेंगे—

  • सीएसआर योजनाओं से कितने लोगों को नियमित लाभ मिल रहा है?
  • वितरित सहायक उपकरणों का लाभार्थियों पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या है?
  • राख के सतत उपयोग को किस स्तर तक बढ़ाया जा रहा है?
  • कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा के तकनीकी और पर्यावरणीय परिणाम क्या हैं?
  • स्थानीय समुदाय की जरूरतों को सीएसआर योजनाओं में किस तरह शामिल किया जाता है?

इन सवालों के जवाब नियमित रिपोर्ट और सार्वजनिक आंकड़ों के माध्यम से सामने आने से योजनाओं की प्रभावशीलता को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.

दो दिन के दौरे में क्या-क्या हुआ?

सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल का दौरा 12 और 13 सितंबर 2026 को हुआ. इस दौरान तकनीकी निरीक्षण से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों तक कई गतिविधियां आयोजित की गईं.

प्रमुख बिंदु:

  • 12 सितंबर को सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल ने एनटीपीसी विंध्याचल का दौरा किया.
  • स्टेशन के व्यू प्वाइंट का अवलोकन किया गया.
  • स्टेज-III कंट्रोल रूम का भ्रमण हुआ.
  • युवा अभियंताओं से संवाद किया गया.
  • कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा का निरीक्षण किया गया.
  • एसएमसी बैठक में उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा हुई.
  • राख प्रबंधन और सतत राख उपयोग पर चर्चा हुई.
  • सीएसआर गतिविधियों की जानकारी ली गई.
  • 13 सितंबर को जरूरतमंद लाभार्थियों को सहायक उपकरण वितरित किए गए.
  • कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, बलियरी की छात्राओं को साइकिलें दी गईं.

निष्कर्ष

एनटीपीसी विंध्याचल में सीईआरसी प्रतिनिधिमंडल का दो दिवसीय दौरा विद्युत उत्पादन से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जिम्मेदारी पर भी केंद्रित रहा. स्टेज-III कंट्रोल रूम और कार्बन-टू-मेथनॉल सुविधा के निरीक्षण ने तकनीकी नवाचार को सामने रखा, जबकि एसएमसी बैठक में राख प्रबंधन, सतत उपयोग और सीएसआर गतिविधियों पर चर्चा हुई.

दूसरी ओर, जरूरतमंद लोगों को सहायक उपकरण और छात्राओं को साइकिल वितरण ने दौरे के सामाजिक पक्ष को रेखांकित किया. सिंगरौली जैसे ऊर्जा क्षेत्र में इन पहलों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यहां औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय समाज और पर्यावरण से जुड़े विषय भी लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं.

आगे इन पहलों की सफलता इस बात से तय होगी कि तकनीकी नवाचार कितने प्रभावी साबित होते हैं, पर्यावरणीय प्रयासों के क्या मापनीय परिणाम सामने आते हैं और सीएसआर योजनाओं का लाभ स्थानीय जरूरतमंद वर्ग तक कितनी निरंतरता और प्रभाव के साथ पहुंचता है. यही वे बिंदु हैं जिनसे किसी संस्थान की सामाजिक और पर्यावरणीय भूमिका का वास्तविक प्रभाव समझा जा सकता है.

रिपोर्ट: सोनू कुमार सोनी

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