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ToggleAnuppur: पहली बारिश में उखड़ी करोड़ों की जनमन सड़कें, गुणवत्ता पर उठे सवाल
Anuppur: अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन ग्राम सड़क योजना के तहत बैगा बहुल इलाकों के विकास के लिए बनाई गई करोड़ों रुपये की दो सड़कें पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई हैं. सड़कों की बदहाल स्थिति सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की डामर परत हाथ लगाने से ही उखड़ रही है, कई हिस्सों में सड़क बारिश के पानी के साथ बह गई है और पुलियाओं के किनारों पर भी कटाव दिखाई दे रहा है. इस मामले में निर्माण एजेंसी के साथ-साथ गुणवत्ता की निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है.
करोड़ों की लागत से बनी थीं दोनों सड़कें
प्रधानमंत्री जनमन ग्राम सड़क योजना के तहत रौसरखार–भालूखोदरा मार्ग की 4 किलोमीटर सड़क का निर्माण 1 करोड़ 74 लाख 30 हजार रुपये की लागत से कराया गया. वहीं कोहका–गर्जनबीजा मार्ग की 5.30 किलोमीटर सड़क पर 3 करोड़ 1 लाख 16 हजार रुपये खर्च किए गए.
इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य बैगा बहुल गांवों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना और ग्रामीणों की आवाजाही को आसान बनाना था. लेकिन निर्माण पूरा होने के महज चार महीने बाद ही पहली बारिश ने इन सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए.
पहली बारिश में ही खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की डामर परत कई स्थानों पर हाथ लगाने से ही निकल रही है. कई हिस्सों में सड़क पूरी तरह उखड़ गई है, जबकि कुछ स्थानों पर बारिश का पानी सड़क को बहाकर ले गया है. पुलियाओं के किनारों पर भी कटाव साफ दिखाई दे रहा है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें टिकाऊ साबित नहीं हुईं. उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुसार हुआ होता, तो पहली ही बारिश में सड़कें इस तरह क्षतिग्रस्त नहीं होतीं.
निर्माण एजेंसी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
जानकारी के अनुसार दोनों सड़कों का निर्माण मेसर्स जय माता दी कंस्ट्रक्शन, बुढ़ार द्वारा कराया गया. वहीं निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी मेसर्स परी इंजीनियरिंग एसोसिएट, सिवनी तथा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (PIU), अनूपपुर के पास थी.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी निरीक्षण किस प्रकार किया गया. यदि सड़कें पहली ही बारिश में उखड़ गईं, तो क्या निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों ने निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया.
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ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
क्षेत्र के ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि दोनों सड़कों का दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और टिकाऊ सड़क सुविधा मिल सके.
विकास योजनाओं की गुणवत्ता पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री जनमन ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है. लेकिन पुष्पराजगढ़ में सामने आई यह स्थिति विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है. यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़कों के निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई या नहीं. फिलहाल ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ सड़कों का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाएगा.
रिपोर्ट: सुनील गुप्ता
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