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Toggleरीवा: सुंदरजा आम की बढ़ी उड़ान, अबूधाबी पहुंचेगी खेप
रीवा: मध्य प्रदेश का रीवा जिला एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. इस बार पहचान की वजह कोई राजनीतिक या प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यहां का विश्व प्रसिद्ध सुंदरजा आम है. अपनी मिठास, खुशबू और अनोखी गुणवत्ता के लिए मशहूर यह आम अब विदेशी बाजारों तक पहुंचने जा रहा है. बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए जल्द ही सुंदरजा आम की एक खेप अबूधाबी भेजी जाएगी.
यह उपलब्धि केवल रीवा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों में बढ़ती मांग से किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय कृषि को नई पहचान मिलेगी.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही मांग
देश के कई राज्यों में लोकप्रिय सुंदरजा आम अब विदेशों में भी अपनी जगह बना रहा है. इसकी गुणवत्ता और स्वाद ने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया है. यही कारण है कि अब इस आम के निर्यात की तैयारी तेज हो गई है.
अबूधाबी भेजी जाने वाली खेप को रीवा के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. इससे यह साबित होता है कि स्थानीय उत्पाद भी वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं.विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खाड़ी देशों सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सुंदरजा आम की मांग बढ़ सकती है.
फल अनुसंधान केंद्र में चल रहा शोध
रीवा स्थित फल अनुसंधान केंद्र लंबे समय से आम की विभिन्न प्रजातियों पर शोध कर रहा है. यहां कुल 237 किस्मों पर अध्ययन किया जा रहा है.इन सभी प्रजातियों में सुंदरजा आम सबसे विशेष माना जाता है. वैज्ञानिक लगातार इसकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और बाजार संभावनाओं पर काम कर रहे हैं.
शोध का उद्देश्य किसानों को बेहतर तकनीक और उन्नत उत्पादन के अवसर उपलब्ध कराना है. इससे भविष्य में सुंदरजा आम का उत्पादन और निर्यात दोनों बढ़ सकते हैं.
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GI टैग से मिली नई पहचान
किसी भी कृषि उत्पाद के लिए GI टैग उसकी विशिष्टता की पहचान माना जाता है. सुंदरजा आम को यह सम्मान पहले ही मिल चुका है.GI टैग मिलने के बाद इस आम की पहचान और मजबूत हुई है. इससे उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिलता है कि वे असली और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद खरीद रहे हैं.
इसके अलावा GI टैग अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
क्या है सुंदरजा आम की खासियत
स्वाद और गुणवत्ता के मामले में सुंदरजा आम अन्य आमों से अलग माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें रेशे नहीं होते.मुलायम गूदा और प्राकृतिक मिठास इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनाते हैं. इसके अलावा इसकी खुशबू भी काफी आकर्षक होती है.फल विशेषज्ञों का कहना है कि इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.इसके अनूठे गुणों के कारण देश के कई हिस्सों में लोग विशेष रूप से सुंदरजा आम की तलाश करते हैं.
स्वास्थ्य के लिए भी माना जाता है बेहतर
विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा में शुगर के मरीज भी सुंदरजा आम का सेवन कर सकते हैं. हालांकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है.इस आम में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं. यही कारण है कि यह केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी पसंद किया जाता है.
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित मात्रा में आम का सेवन शरीर के लिए लाभकारी हो सकता है.
गोविंदगढ़ बना सुंदरजा आम का केंद्र
रीवा जिले का गोविंदगढ़ क्षेत्र सुंदरजा आम के उत्पादन के लिए विशेष पहचान रखता है. यहां के बागानों में बड़ी मात्रा में इस आम की खेती की जाती है.स्थानीय जलवायु और मिट्टी की गुणवत्ता इस आम के उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है. यही कारण है कि यहां पैदा होने वाला सुंदरजा आम अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है.
कई किसान वर्षों से इसकी खेती कर रहे हैं और अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार से बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है.
किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
अबूधाबी सहित विदेशी बाजारों में सुंदरजा आम की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है. निर्यात बढ़ने पर उत्पादकों को बेहतर कीमत मिल सकती है.इसके साथ ही क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. पैकेजिंग, परिवहन और निर्यात से जुड़े व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात का दायरा बढ़ता है तो यह पूरे विंध्य क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है.
लोकल से ग्लोबल तक का सफर
कभी केवल रीवा और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रहने वाला सुंदरजा आम आज वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहा है.यह सफलता स्थानीय किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक शोध और उत्पाद की गुणवत्ता का परिणाम है. अब यह आम “लोकल टू ग्लोबल” की अवधारणा का एक सफल उदाहरण बन चुका है.अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी बढ़ती मौजूदगी भविष्य में और बड़े अवसरों के द्वार खोल सकती है.
निष्कर्ष
रीवा का सुंदरजा आम अब केवल एक फल नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान बन चुका है. GI टैग मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है और अब अबूधाबी तक इसकी पहुंच इस सफलता को नई ऊंचाई दे रही है.
विदेशी बाजारों में बढ़ती मांग किसानों के लिए अच्छी खबर है. आने वाले वर्षों में यदि निर्यात का दायरा और बढ़ता है, तो सुंदरजा आम न केवल रीवा बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की कृषि उपलब्धियों का प्रमुख प्रतीक बन सकता है.
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