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रीवा: सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, दोनों आरोपी दोषमुक्त

रीवा: सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, दोनों आरोपी दोषमुक्त

रीवा: सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, दोनों आरोपी दोषमुक्त

रीवा: बहुचर्चित प्रशांत मिश्रा हत्याकांड में सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी लवकुश पांडेय और अम्बिकेश द्विवेदी को हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है. इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मामले में नया मोड़ आ गया है.

2019 में दर्ज हुआ था हत्या का मामला

यह मामला 28 अगस्त 2019 का है, जब थाना विश्वविद्यालय क्षेत्र में प्रशांत मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद पुलिस ने जांच करते हुए लवकुश पांडेय और अम्बिकेश द्विवेदी को आरोपी बनाया था.

पुलिस का दावा था कि आरोपियों की निशानदेही पर ही मृतक का शव बरामद किया गया था और हत्या में प्रयुक्त पिस्टल भी लवकुश पांडेय के पास से जब्त की गई थी.

रीवा: सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, दोनों आरोपी दोषमुक्त
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अभियोजन ने पेश किए 28 गवाह और 64 दस्तावेज

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत में 28 गवाह पेश किए. इसके साथ ही 64 दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, ताकि आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश किए जा सकें.

हालांकि, इन सबके बावजूद अदालत में आरोप पूरी तरह साबित नहीं हो सके.

बचाव पक्ष के तर्क बने अहम

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं की टीम ने मजबूत पैरवी की. प्रमुख अधिवक्ताओं में राजीव सिंह परिहार सहित अन्य वकील शामिल रहे.बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि मृतक प्रशांत मिश्रा को जिस व्यक्ति के साथ देखा जाता था, वह कोई और “लवकुश” था, न कि आरोपी लवकुश पांडेय.

रीवा: सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, दोनों आरोपी दोषमुक्त
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सबूतों पर उठाए गए सवाल

पक्ष ने यह भी दलील दी कि शव की बरामदगी आरोपियों के बताए अनुसार नहीं हुई थी. इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाला व्यक्ति भी आरोपी नहीं था.इन तर्कों ने अभियोजन पक्ष के दावों को कमजोर कर दिया और अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया.

फैसले से आया नया मोड़

सत्र न्यायालय के इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. जहां एक ओर आरोपी पक्ष के लिए यह राहत की खबर है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर असली आरोपी कौन है.

आगे की कार्रवाई पर नजर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है. फिलहाल, इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है.

निष्कर्ष

प्रशांत मिश्रा हत्याकांड में आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता को दर्शाता है. साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन इस केस ने कई अनुत्तरित सवाल भी छोड़ दिए हैं.