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Vindhya First

BSc AG में एडमिशन लेने वालों के लिए जरूरी खबर, जानिए कोर्स से जुड़ी जरूरी बातें

रीवा में स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में अब तक 59 से ज़्यादा एडमिशन हो चुके हैं लेकिन पूरी सीटें अभी भी नहीं भरीं हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बीएससी एजी की पढ़ाई कैसे होगी. इस बारे में राजनेताओं का क्या कहना और सोचना है हम आर्टिकल के माध्यम से आपको बताएंगे.

मध्य प्रदेश में बीएससी एजी (BSc AG) की पढ़ाई करने वालों के लिए जरूरी खबर है. बता दें कि मध्य प्रदेश के मुखिया मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने प्रदेश के सभी कॉलेजों में कृषि की पढ़ाई के लिए आदेश जारी किया था. इसी के बाद विंध्य के रीवा में स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में अब तक 59 से ज़्यादा एडमिशन हो चुके हैं लेकिन पूरी सीटें अभी भी नहीं भरीं हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बीएससी एजी की पढ़ाई कैसे होगी. इस बारे में राजनेताओं का क्या कहना और सोचना है हम आर्टिकल के माध्यम से आपको बताएंगे.

बता दें कि BSc AG की पढ़ाई मध्य प्रदेश के सामान्य यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में कराई जाएगी. इसे लेकर विंध्य फर्स्ट ने 4 पार्ट में स्टोरी की थी. पहले पार्ट में हमने बताया था कि एक कृषि कॉलेज में क्या-क्या सुविधाएं होनी चाहिए. फिर दूसरे पार्ट में एक एजी कॉलेज के लिए कितना इंफ्रास्ट्रक्चर, कितने लैब और कितने इंस्ट्रेक्शनल यूनिट होने चाहिए, इस बारे में बताया गया. एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए टीचरों की क्या योग्यता होनी चाहिए, यह भी जाना. इसी तरह तीसरे पार्ट में हमने एक सामान्य कॉलेज में एक सामान्य कॉलेज में बीएससी एजी की पढ़ाई कराना कैसे संभव होगा. इसमें हमने बताया कि एजी कॉलेज के लिए कम से कम 50 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता भी होती है. जब इस बारे में हमने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से सवाल किए तो कई तरह की जानकारी सामने आयी.

विपक्ष के नेताओं का क्या कहना है
विपक्ष के नेताओं का कहना है कि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर के, बिना बुक्स और बिना टीचर्स के BSc AG की पढ़ाई कैसे होगी. रीवा विश्वविद्यालय के पास कृषि योग्य जमीन नहीं है. रीवा विश्वविद्यालय में जो एग्रीकल्चर के कोर्स शुरू किए गए हैं. उसमें इस बार 59 एडमिशन हो गए हैं. रीवा में एग्रीकल्चर कॉलेज में टीचर्स की पोस्ट है. लेकिन वहां पर जरूरी संसाधनों का अभाव है. ऐसे में टीआरएस कॉलेज में और एपीएस यूनिवर्सिटी में कैसे एग्रीकल्चर की पढ़ाई कराना संभव होगा यह समझ से परे है.

किसानों से वार्षिक आधार पर जमीन लेगा विश्वविद्यालय
इस बारे में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति के मुताबिक जो जमीन विश्वविद्यालय के पास है वह बहुत कृषि योग्य नहीं है. चूंकि अभी BSc AG का प्रथम वर्ष है. ऐसे में किसानों के साथ एमओयू करके और वार्षिक आधार पर उनसे संविदा करके किसान अपनी फसल पैदा करेंगे. कुछ क्षेत्र विशेष में दो एकड़ पांच एकड़ जमीन में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय द्वारा अपने प्रैक्टिकल के लिए जमीनों का उपयोग किया जाएगा और उन फसलों का लाभ किसानों को मिलेगा. इस दौरान विश्वविद्यालय की हमारी जो जमीन कृषि योग्य हो सकती है वहां कुछ प्रोजेक्ट शुरू करेंगे.

BSc AG में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट पूरी जानकारी के लिए देखिए ये वीडियो।।